एडवांस्ड सर्च

आस्था का मरहम

2009 बैच के इस आइएएस अफसर ने अपना यह काम आज भी जारी रखा है. उनकी टीम में 30 लोग हैं जिनमें ज्यादातर उनके बचपन के दोस्त हैं और गरीब परिवारों की लड़कियों की शादी में मदद करते हैं.

Advertisement
आशीष मिश्रनई दिल्ली, 10 January 2019
आस्था का मरहम डॉ. अनिल पाठक

डॉ. अनिल पाठक, 53 वर्ष

क्या कियाः अयोध्या के डीएम अनाथ और मोहताज लोगों के मददगार

अनिल पाठक जब मेडिकल के छात्र थे, तभी उन्होंने पढ़ाई के लिए अपने पिता की भेजी रकम में से कुछ पैसा अलग रखना शुरू कर दिया था, ताकि गरीब लोगों के इलाज में मदद कर सकें.

कुछ मरीजों को तो वे इलाहाबाद मेडिकल कॉलेज के अपने होस्टल के कमरे में ठहरा भी लेते थे. 2009 बैच के इस आइएएस अफसर ने अपना यह काम आज भी जारी रखा है. उनकी टीम में 30 लोग हैं जिनमें ज्यादातर उनके बचपन के दोस्त हैं और गरीब परिवारों की लड़कियों की शादी में मदद करते हैं.

इनसे हर साल 30 से 40 लड़कियों को मदद मिलती है. डॉ. पाठक कहते हैं, ''हमारी पहली प्राथमिकता उन लड़कियों की शादी के लिए रुपए-पैसे से मदद करना है जो अनाथ हैं.''

***

पाएं आजतक की ताज़ा खबरें! news लिखकर 52424 पर SMS करें. एयरटेल, वोडाफ़ोन और आइडिया यूज़र्स. शर्तें लागू
Advertisement
पाएं आजतक की ताज़ा खबरें! news लिखकर 52424 पर SMS करें. एयरटेल, वोडाफ़ोन और आइडिया यूज़र्स. शर्तें लागू
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay