एडवांस्ड सर्च

Advertisement

भोपाल: गगन से है मिलन

बारह मीटर तक सीमित रहे भोपाल में अब तीस मीटर ऊंची इमारतें भी बन सकेंगी.
भोपाल: गगन से है मिलन भोपाल में ऊंची इमारतें
शुरैह नियाज़ीनई दिल्‍ली, 12 March 2013

अपनी झीलों के लिए मशहूर भोपाल अब दूसरे महानगरों की तर्ज पर विकास करने की तैयारी में है. सीमित जमीन और बढ़ती आबादी के चलते अब शहर को वर्टिकल ग्रोथ के बारे में विचार करना पड़ रहा है. मध्य प्रदेश की इस राजधानी में अभी भले ही गंगनचुंबी इमारतें नजर नहीं आती हों, लेकिन जल्द ही भोपाल में भी हाइराइज बिल्डिंग नजर आने लगेंगी.

सरकार ने जनवरी 2013 में हाइराइज बिल्डिंगों की ऊंचाई 12 मीटर से बढ़ाकर 30 मीटर तक करने को मंजूरी दे दी है. उपलब्ध सड़कों के हिसाब से बिल्डिंग की ऊंचाई बढ़ाई जा सकेगी. भोपाल के मास्टर प्लान 2005 में संशोधन कर ये प्रावधान लागू किए गए हैं. सैकड़ों योजनाएं इन्हीं प्रावधानों के कारण अटकी पड़ी थीं, जिन्हें अब मंजूरी मिलने की उम्मीद है.

इस शहर की सबसे बड़ी इमारत लीला संस बिल्डर्स कान्हा टावर के नाम से अरेरा कॉलोनी क्षेत्र में बना रहे हैं. इस इमारत में 15 मंजिलें हैं जिनमें तीन और चार रूम के 252 फ्लैट होंगे. भोपाल जैसे शहर में इस तरह की इतनी ऊंची इमारत पहली बार बन रही है. लीला संस बिल्डर्स अपनी इस इमारत में कई तरह की सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है जैसे बच्चों और बुजुर्गों को समय बिताने के लिए अलग-अलग स्थान. इस बिल्डिंग के बारे में दावा है कि यह तेज भूकंप के झटकों को भी सह सकती है. इस बहुमंजिला इमारत के साथ ही शहर में इसी तरह की और भी कई योजनाएं परवान चढऩे वाली हैं.

इससे पहले अब तक की सबसे ऊंची इमारत का निर्माण मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड ने प्लेटिनम प्लाजा के रूप में किया था, जिसमें 10 मंजिलों की आवासीय बिल्डिंग और सात मंजिल की व्यावसायिक इमारत है.

राज्य सरकार ने भूमि विकास नियम, 2012 को लागू कर दिया है. लेकिन भोपाल मास्टर प्लान 2005 के चलते बहुत से नियमों को यहां लागू नहीं किया गया था. इसलिए अब सरकार को कई प्रावधानों को मास्टर प्लान में शामिल करना पड़ा है. नए प्रावधान के मुताबिक अब बिल्डर्स को पार्किंग के लिए पहले के मुकाबले दोगुनी जगह उपलब्ध करवानी होगी. इसके साथ ही सड़कों की चौड़ाई भी कम-से-कम 7.5 मीटर रखनी होगी, जो पहले 6 मीटर ही थी.

भोपाल के रियल एस्टेट ग्रुप एजी8 आकृति ग्रुप भी शहर के मिसरोद में आकृति नींव के नाम से 35 एकड़ में कॉलोनी विकसित कर रहा है. इसमें भी 15 मंजिला रहवासी कॉम्पलेक्स का निर्माण किया जा रहा है. कंपनी के चेयरमैन हेमंत कुमार सोनी कहते हैं, ''भोपाल जैसे शहर में सरकारी नियम के चलते बड़ी इमारतें अभी तक नहीं बन पाई हैं. अब शहर के मध्य में 18 मीटर तक की इमारतों की अनुमति दी जा रही है. लेकिन फ्लोर एरिया रेशो (एफएआर) नहीं बढ़ाया जा रहा है. जिससे बिल्डरों और खरीदारों को कोई फायदा नहीं होगा.”

सोनी आगे कहते हैं, ''यदि एफएआर बढ़ाया जाता है तो यह सही मायने में जमीन की समस्या को काफी हद तक कम कर देगा. इसके साथ ही हम खरीदारों को भी फायदा पहुंचाने की स्थिति में होंगे. हम हर तबके के घर के सपने को साकार करना चाहते हैं.”

देश के बीचोबीच स्थित मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल आम तौर पर ऐसे लोगों के लिए एक बेहतर शहर माना जाता है जहां लोग रिटायर होने के बाद रहना चाहते हैं. यही वजह है कि आकृति ग्रुप ने ऐसे ही लोगों को ध्यान में रखकर 'द नेस्ट’ नाम से प्रोजेक्ट की शुरुआत की है जो 60 साल से अधिक आयु के लोगों के लिए है. यह स्थान उन लोगों के लिए है जिनके पास पैसा तो है लेकिन जगह नहीं है. उन्हें यहां हर तरह की सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी जैसे चिकित्सा और मनोरंजन. आमतौर पर इन जगहों पर बुकिंग कराने वाले लोग उच्च मध्यवर्ग से आ रहे हैं.

भोपाल की हाइराइज बिल्डिंगों में 30 लाख से 50 लाख रु. तक में फ्लैट उपलब्ध हैं. सरकार वर्टिकल विकास को बढ़ावा देने के मकसद से हाइराइज इमारतों की ऊंचाई बढ़ा रही है. लेकिन एफएआर नहीं बढ़ाए जाने की वजह से बिल्डर्स और डेवलपर्स अब भी खुश नजर नहीं आ रहे.

शहर में लगभग 4,000 मकान बना चुके शीतल समूह के सीएमडी मनोज प्रधान कहते हैं, ''इमारतों की ऊंचाई बढ़ाने से जगह की समस्या खत्म नहीं होगी. इसके लिए सरकार को एफएआर बढ़ाने का निर्णय लेना पड़ेगा. कृषि भूमि के व्यावसायिक और रहवासी उपयोग को रोकने के लिए सरकार को एफएआर बढ़ाना चाहिए. शहर का विकास अगर अन्य महानगरों की तर्ज पर करना है तो भी सरकार को एफएआर पर निर्णय लेना ही पड़ेगा वरना वर्टिकल विकास के बारे में सोचना बेमानी है.”

एफएआर किसी भी मकान की छत का कुल क्षेत्र और उस जमीन के कुल क्षेत्र का अनुपात होता है. एफएआर का प्रावधान मास्टर प्लान में क्षेत्रवार कर दिया जाता है और उसी आधार पर नगर निगम निर्माण की अनुमति देता है. इसके मुताबिक यदि आपके पास 5,000 वर्ग फुट क्षेत्र है और एफएआर 1.25 है तो आप 6,250 वर्ग फुट क्षेत्र पर निर्माण कर सकते हैं.

बिल्डर्स इस बात से भी नाखुश हैं कि हाइराइज बिल्डिंग बनाने के लिए सरकार ने 30 मीटर तक की जो हद तय की है वह भोपाल जैसे शहर में मुख्य इलाकों के लिए नहीं है. वहां सिर्फ 18 मीटर तक का ही निर्माण किया जा सकता है. शहर के एमपी नगर, न्यू मार्केट, अरेरा कॉलोनी, एयरपोर्ट रोड जैसे इलाकों में 18 मीटर निर्माण की ही अनुमति मिलेगी. 30 मीटर का प्रावधान बाहर के उन इलाकों में है जो अभी विकसित हो रहे हैं. बिल्डर चेतावनी देते हैं कि इससे अनियोजित विकास बढ़ेगा.

Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay