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चित्रकला- रंगों का जलसा

अतियथार्थवादी -रंगों का जलसा

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रिंकी कुमार 27 October 2017
चित्रकला- रंगों का जलसा अतियथार्थवादी -रंगों का जलसा

समकालीन भारतीय चित्रकला के प्रमुख हस्ताक्षरों में से एक शक्ति बर्मन भारतीय और यूरोपीय मिथकशास्त्र से प्रेरित पेंटिंग के लिए जाने जाते हैं. वे बिंदु चित्रण और संगमरमरी रेखांकनों की तकनीक का इस्तेमाल करते हैं और उनकी कलाकृतियों में यथार्थ को अतियथार्थ से अलग करना बेहद मुश्किल है. कवि और सांस्कृतिक सिद्धांतकार रंजीत होसकोटे यह सब इन द प्रेजेंस ऑफ अनदर स्काईः शक्ति बर्मन, अ रेट्रोस्पेक्ट के जरिए प्रदर्शित करना चाहते हैं, जिसमें बर्मन की 70 साल की तूफानी जिंदगी को समेटते हुए 250 कलाकृतियां पेश की जा रही हैं. यह प्रदर्शनी राष्ट्रीय कला संग्रहालय, मुंबई ने आर्ट म्यूजिंग्ज (शहर की एक कला दीर्घा) के साथ मिलकर प्रस्तुत की है जो एनजीएमए में 26 नवंबर तक खुली रहेगी. 

विद्याकुट (अब बांग्लादेश में) में 1935 में जन्मे बर्मन ने अपने शुरुआती साल डिब्रूगढ़ में बिताए और बाद में फ्रांस चले गए, जहां वे फिलहाल रहते हैं. उनकी कलाकृतियों पर उनकी यादों और चौतरफा यात्राओं की छाप दिखाई देती है. इनमें स्वप्न सरीखे सिलसिलों में इनसान, जानवर और शहरी जगहें उकेरी गई हैं. होसकोटे कहते हैं, ''शक्ति सभ्यता और काल में संस्कृतियों की सवारी करते हैं. उनका काम इतिहास के पार जाता है. यह सिंहावलोकन हमारे वक्त की भी जरूरत है, खासकर तब जब हर किसी की कल्पना संकरी और भोथरी होती जा रही है."

रेट्रोस्पेक्ट में बर्मन की 1950 की दो कलाकृतियां, बिल्कुल हाल की उनकी पेंटिंग और साथ ही ड्रॉइंग, लिथोग्राफ, टेक्सटाइल डिजाइन, स्केचबुक और चित्रांकन रखे गए हैं. प्रदर्शनी में रबींद्रनाथ टैगोर की गीतांजलि के फ्रांसीसी अनुवाद के सीमित संस्करण के लिए बनाए गए लिथोग्राफिक चित्रांकन भी इसमें प्रदर्शित किए गए हैं.

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