एडवांस्ड सर्च

इंटरनेट वुमनिया

गीता यादव जैसी महिलाएं अपने मुद्दों के लिए सोशल मीडिया को बना रही हैं मजबूत औजार

Advertisement
सरोज कुमारनई दिल्ली, 17 January 2018
इंटरनेट वुमनिया गीता यादव,सोशल मीडिया,इंडियन इन्फॉर्मेशन,वर्णिका कुंडू

बकौल गीता यादव, सोशल मीडिया का इस्तेमाल वे यूं ही नहीं करतीं बल्कि उनके पास इसकी वजह हैः खुद से और व्यापक तौर पर महिलाओं से जुड़े मसलों पर लोगों का ध्यान खींचना. इसके बाद वे बाकायदा कैंपेन चलाती हैं और उन्हें आभासी दुनिया के बाहर भी क्रियान्वित करती हैं. पेशे से इंडियन इन्फॉर्मेशन अफसर 31 वर्षीया गीता यादव ने हाल ही में अंगदान को लेकर मुहिम शुरू की है ताकि इस मुद्दे पर महिलाओं को जागरूक बनाया जा सके और उनके साथ इसमें होने वाले भेदभाव पर लगाम लग सके.

गीता बताती हैं, ''दरअसल, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और पीजीआइ जैसे संस्थानों के सर्वे में यह बात सामने आई है कि गुर्दा दान करने वालों में 85 फीसदी महिलाएं हैं, जबकि गुर्दा हासिल करने वालों में उनका हिस्सा सिर्फ 10 फीसदी है. यह दिखाता है कि किस तरह बोझ महिलाओं पर ही डाल दिया जाता है. उन पर कभी-कभी पितृसत्तात्मक पारिवारिक, सामाजिक दबाव काम करते हैं.'' इसको लेकर इन्होंने न केवल सोशल मीडिया पर कैंपेन शुरू किया बल्कि महिला सांसदों को चिट्ठी भी लिखी है. कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन से भेंट भी की.

उनकी मांग है, ''मानव अंग प्रत्यारोपण कानून में संशोधन करके परिजनों की अंगदान की स्थिति में भी स्क्रूटनी कमेटी एक बार जरूर देखे.'' हालांकि वे यह भी कहती हैं कि यह सामाजिक मसला ज्यादा है, सो इसको लेकर सामाजिक जागरूकता बढ़ाने की जरूरत ज्यादा है. गीता का खुद का सफर इतना आसान नहीं रहा है. ढाई साल पहले तलाक के बाद वे घरेलू हिंसा को लेकर अदालत में लड़ाई लड़ रही हैं. बेटे का लालन-पालन भी वे ही कर रही हैं.

इससे पहले अगस्त 2017 में गीता और उनकी दोस्तों ने 'मेरी रात मेरी सड़क' कैंपेन चलाया था. दरअसल उन दिनों चंडीगढ़ में आधी रात को वर्णिका कुंडू केस के दौरान कुछ लोग सवाल उठा रहे थे कि आखिर किसी लड़की को रात में बाहर निकलने की क्या जरूरत है. गीता कहती हैं, ''तब मैंने दोस्तों से बात करके तय किया कि हम रात में बाहर निकल कर ऐसी पुरुषवादी सोच का विरोध करेंगे.'' उस ऑनलाइन कैंपेन के तहत देशभर के 15 शहरों में ऐसे मार्च हुए थे. जून 2017 में गीता और उनकी दोस्त श्वेता यादव वगैरह के ऑनलाइन कैंपेन के कारण अमेजन को अपना एक प्रोडक्ट हटाना पड़ा था. इनके मुताबिक योनि आकार का वह ऐशट्रे यौन हिंसा को बढ़ावा देने वाला था.

इनकी कहानी बताती है कि किस तरह महिलाएं अपने मुद्दों के लिए सोशल मीडिया और इंटरनेट को मुहिम के तहत इस्तेमाल कर रही हैं. अक्तूबर 2017 में दुनियाभर में मीटू हैशटैग भी इसकी मिसाल है. कानून की छात्रा राया सरकार ने देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के ऐसे प्रोफेसरों का नाम उजागर करके हंगामा मचा दिया था जो कथित तौर पर यौन-उत्पीडऩ में शामिल रहे. जाहिर है, इंटरेनट और सोशल मीडिया ऐसे महिला मुद्दों का असरदार गवाह बन रहा है.

***

Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay