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गौरी लंकेशः एक साहसिक विचार की हत्या

मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने ''लोकतंत्र की हत्या'' बताया. लेकिन दो साल बाद भी कलबुर्गी हत्याकांड के सिलसिले में कोई गिरफ्तारी न होने से सिद्धरमैया की आलोचना भी हो रही है.

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Sahitya Aajtak 2018
अरविंद गौड़ानई दिल्ली, 12 September 2017
गौरी लंकेशः  एक साहसिक विचार की हत्या विरोध में उतरे लोग बेंगलूरू में लंकेश की हत्या के खिलाफ प्रदर्शन

कर्नाटक के बेंगलूरू में 5 सितंबर को साप्ताहिक पत्रिका लंकेश पत्रिके की संपादक 55 वर्षीय गौरी लंकेश की हत्या सुर्खियों में छा गई. हिंदुत्ववादी राजनीति की कटु आलोचक लंकेश को पिछले साल एक निचली अदालत ने 2008 में छपे एक लेख में भाजपा सांसद प्रह्लाद जोशी और पार्टी के एक अन्य नेता की मानहानि करने का दोषी पाया था. उन्होंने इस फैसले के खिलाफ अपील की मगर उससे भाजपा सूचना-प्रौद्योगिकी शाखा के प्रमुख अमित मालवीय को यह कहने से नहीं रोका जा सका कि यह दूसरे पत्रकारों के लिए 'सबक' है.

लंकेश की हत्या की घटना को एम.एम. कलबुर्गी, नरेंद्र दाभोलकर और गोविंद पनसारे की हत्या से जोड़कर देखा जा रहा है. ये सभी हिंदुत्व विरोधी रहे हैं. लंकेश के करीबी दोस्त मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने ''लोकतंत्र की हत्या'' बताया. लेकिन दो साल बाद भी कलबुर्गी हत्याकांड के सिलसिले में कोई गिरफ्तारी न होने से सिद्धरमैया की आलोचना भी हो रही है.

वैचारिक टकराव की अफवाहें इसलिए जोर पकड़ीं कि लंकेश की हत्या उसी दिन हुई, जब भाजपा ने राज्य के तटीय इलाके में कथित तौर पर एक हिंदुत्ववादी कार्यकर्ता की हत्या के खिलाफ 'मंगलूरू चलो' बाइक रैली निकाली थी.

इतिहासकार रामचंद्र गुहा जैसे लोग लंकेश की हत्या को कलबुर्गी और ऐसे दूसरे हत्याकांडों का ही विस्तार बताते हैं. कर्नाटक के धारवाड़ में रहने वाले विद्वान गणेश देवी कहते हैं, ''फासीवादी ताकतों का भयानक साया हम सबकी जिंदगियों पर मंडराता जा रहा है.'' देवी ने कलबुर्गी हत्याकांड पर साहित्य अकादमी की चुप्पी के खिलाफ आकादमी का अवार्ड लौटा दी थी.

जानी-मानी महिला कार्यकर्ता के.एस. विमला कहती हैं, ''गौरी आसान निशाना थीं. वे हिंदू कट्टरवादियों के खिलाफ मुखर थीं और कट्टरवादियों ने उन पर वार करके सभी आलोचकों को संदेश दिया है.'' ट्विटर पर हिंदुत्व ट्रॉल, जिनमें कुछ को प्रधानमंत्री भी फॉलो करते हैं, ने ऐसी प्रतिक्रियाएं दीं मानो लंकेश की हत्या बड़ी जीत है.

बहरहाल, लंकेश एक नई प्रतीक बन गई हैं. देश भर में हजारों लोग हत्या के विरोध में सड़क पर उतरे. बेंगलूरू के एक प्रदर्शन में पोस्टर पर लिखा था, ''आप किसी की हत्या कर सकते हैं, विचार की नहीं.'' इससे प्रतिगामी हवाओं के खिलाफ खड़े होने की उम्मीद जगती है. 

 

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