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केरलः बुरे फंसे चांडी

रिपोर्ट में आरोप है कि वरिष्ठ नेता चांडी ने न केवल 2.16 करोड़ रु. रिश्वत के तौर पर हासिल किए बल्कि नायर का यौन उत्पीडऩ भी किया.

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जीमोन जैकबनई दिल्ली, 30 November 2017
केरलः बुरे फंसे चांडी ओमान चांडी

अब पूर्व कांग्रेस मुख्यमंत्री उम्मन चांडी और केरल की पूर्व संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार में उनके कई सहयोगी मुसीबत में हैं. जस्टिस जी. शिवराजन आयोग ने अपनी रिपोर्ट में इन सबको गहरा लपेटा है. कुख्यात सोलर घोटाले की जांच के लिए 2013 में खुद चांडी के गठित किए गए आयोग ने सरिता एस. नायर और उनके पार्टनर बीजू राधाकृष्णन की गवाहियों पर ज्यादा भरोसा दिखाया है. मुख्य आरोपी के रूप में नामित सरिता पर धोखाधड़ी के 33 मामले दर्ज हैं. इन 'उद्यमियों' ने अपनी ऊर्जा कंपनी टीम सोलर के जरिए बड़ी संख्या में निवेशकों को चूना लगा दिया था. कुल 1,073 पन्नों में चार खंडों में फैले अपने फैसले में 75 वर्षीय पूर्व हाइकोर्ट जज ने चांडी सरकार की नाकामियों और राज्य पुलिस की लीपापोती का विस्तार से विवरण दिया है.

नायर की गवाही के अलावा शिवराजन ने अपने निष्कर्षों को 214 गवाहों के बयानों और 812 दस्तावेजों पर आधारित किया है. मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने तत्परता दिखाते हुए रिपोर्ट को 9 नवंबर को विधानसभा में रख दिया और अब सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा सरकार को उम्मीद है कि वह रिपोर्ट के बल पर विपक्षी यूडीएफ को चित कर देगी. कई विश्लेषक इसे पिनाराई विजयन के चांडी से बदला लेने के मौके के तौर पर भी देख रहे हैं. चांडी ने एसएनसी लवलीन मामले में 2006 में विजयन के खिलाफ सीबीआइ जांच की सिफारिश की थी.

शिवराजन आयोग ने  53 घंटे तक पूर्व मुख्यमंत्री से जिरह की और तमाम आरोपों को गलत बताया लेकिन रिपोर्ट में वरिष्ठ कांग्रेस नेता पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं और कहा गया है कि उन्होंने न केवल 2.16 करोड़ रु. रिश्वत के तौर पर हासिल किए बल्कि नायर का यौन उत्पीडऩ भी किया. जज ने इस बात की ओर इंगित किया कि चांडी ने केरल इंडस्ट्रियल इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के तहत सोलर परियोजनाएं लगाने के लिए नायर को सब्सिडी देने का भरोसा दिलाया था और बदले में टीम सोलर की ओर से होने वाले हर व्यवसाय में 10 फीसदी का कमीशन मांगा था.

कमीशन ने चांडी के अलावा उनके मंत्रिमंडलीय सहयोगियों अरयादन मोहम्मद, ए.पी. अनिल कुमार व अदूर प्रकाश, पूर्व केंद्रीय मंत्रियों के.सी. वेणुगोपाल व एस.एस. पलानीमणिकम, सांसद जोस के. मणि, दो विधायकों हाइबी ईडन और पी.सी. विष्णुनाथ और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के. पद्मकुमार और एम.टी. अजीत कुमार को भी दोषी ठहराया है. बताया जाता है कि नायर ने पेन ड्राइव व सीडी के रूप में सहयोगी साक्ष्य आयोग के हवाले कर दिए हैं. मुख्यमंत्री विजयन को इस बात का अंदाजा है कि उनके हाथ में कितना बड़ा राजनैतिक मौका लगा है. अब उन्होंने इस मामले में आगे की जांच कराने के लिए विशेष जांच टीम (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) गठित की है. इस एसआइटी ने सावधानी के साथ जांच शुरू कर दी है.

कांग्रेस इस मामले में पार्टी के भीतर भी विरोध को लेकर फंस गई है. हालांकि कुछ कांग्रेसियों का कहना है कि हर कोई जानता है कि मामले में राजनीति हो रही है. वी.एम. सुधीरन और रमेश चेन्निथला जैसे चांडी विरोधियों की बांछें फिलहाल उनकी मुश्किलों को देखकर खिली हुई हैं. उनका निजी तौर पर कहना है कि यह पूर्व मुख्यमंत्री के लिए राजनैतिक सफर का खात्मा है. बहरहाल, एलडीएफ कांग्रेस की इस बदनामी से खाली हुई राजनैतिक जगह को कब्जाने में जुटी हुई है. इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी भी इसे राज्य में अपने असर को बढ़ाने के मौके के रूप में देख रही है.

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