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भाजपा के लिए छोटी जीत बड़ी चिंता

जीत हासिल करने के लिए प्रचार के दौरान पार्टी जिस स्तर तक गई वह गुजरात में तो किसी तरह से काम आ गया लेकिन दूसरे प्रदेशों में इस तरह की उम्मीद बेनामी साबित हो सकती है. खासकर कुल जीत में 16 सीटों की कमी चिंता का सबब.

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सुजीत ठाकुर 19 December 2017
भाजपा के लिए छोटी जीत बड़ी चिंता चुनाव प्रचार के दौरान गुजरात में प्रधानमंत्री

भाजपा, गुजरात विधानसभा चुनाव में बेशक जीत गई लेकिन इस जीत ने 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी को आत्मचिंतन पर जरूर विवश किया है. 18 दिसंबर के नतीजों ने साफ किया है कि प्रधानमंत्री और भाजपा अध्यक्ष दोनों के लिए उनका गृह-राज्य तक 2014 के मुकाबले पार्टी के लिहाज से खस्ताहाल हो चुका है. जीत हासिल करने के लिए प्रचार के दौरान पार्टी जिस स्तर तक गई वह गुजरात में तो किसी तरह से काम आ गया लेकिन दूसरे प्रदेशों में इस तरह की उम्मीद बेमानी साबित हो सकती है.

अगले साल राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और कर्नाटक जैसे बड़े राज्यों में चुनाव होने हैं. कर्नाटक को छोड़ कर अन्य राज्यों में भाजपा की सरकार है. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में तो लगभग 15 वर्षों से है. 

इन राज्यों में भाजपा का मुख्य मुकाबला कांग्रेस से है जहां सत्ता विरोधी रुझान से राज्य सरकारें गुजर रही हैं. इन राज्यों में मोदी का क्रेज गुजरात जैसा होना मुश्किल है. हालांकि, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने गुजरात और हिमाचल प्रदेश जीतने के बाद कहा है कि 2019 में जीत पक्की हो गई है लेकिन कांग्रेस को जिस तरह से गुजरात से एक किक मिला है उसे देखते हुए अगले वर्ष चार राज्यों में होने वाले चुनाव में कांग्रेस एक मजबूत विकल्प के रूप में उभर सकती है यह भाजपा के नेता भी मान रहे हैं. 

विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद पार्टी के कई वरिष्ठ नेता परोक्ष रूप से यह मान रहे हैं कि गुजरात के नतीजों में भाजपा चुनाव जीती है तो कांग्रेस अपनी खोयी हिम्मत को पाने में सफल रही है.

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जीत का सबसे बड़ा फैक्टर मानते हैं जो काफी हद तक सही है. लेकिन 2014 में देश उनसे उम्मीद कर रहा था जबकि 2019 में वह उम्मीद पर कितने खरे उतरे, यह तौलेगा. 

सरकारी स्कीमें चल जरूर रही हैं लेकिन बहुत प्रभावी साबित नहीं हो पा रहीं. 

दूसरी बात यह भी है कि गुजरात से जहां कांग्रेस को ऑक्सीजन मिली है वहीं विपक्षी दलों को यह लगने लगा है कि मोदी का रथ रोकने के लिए मजबूती के साथ कांग्रेस के साथ आना होगा. गौरतलब है कि 2014 के नतीजों के चश्मे से यदि देखें तो गुजरात में भाजपा ने 182 में से 165 विधानसभा में जीत हासिल की थी. आज के नतीजे देखने के बाद कह सकते हैं कि तब से अब तक साबरमती में काफी पानी बह चुका है.

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