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शब्दशः: केले की लूट, आम की फजीहत

मिस्टर वाड्रा लैटिन अमेरिका के आर्थिक इतिहास से वाकिफ होंगे, जहां बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने खानदानी तानाशाही के जरिए शोषण किया और इसी से अंग्रेजी को 'बनाना रिपब्लिक’ शब्द मिला. शायद वे उसका मतलब जानते होंगे: ऐसा देश जिस पर बंदरों का राज हो और जो राष्ट्रीय संपदा को केले के भाव बेच रहे हैं.
शब्दशः: केले की लूट, आम की फजीहत बनाना रिपब्लिक
एम.जे. अकबरनई दिल्‍ली, 23 October 2012

माहिर चुटकुलेबाज और दिलचस्प कहानी सुनाने वाले रॉबर्ट वाड्रा का विचार है कि भारतीयों में हंसी-मजाक का शऊर नहीं है. इसमें सच्चाई हो या न हो लेकिन यह उससे तो बेहतर है जहां कोई शऊर ही न हो.

हास्य का मामला जरा पेचीदा है. किसी का मजाक ठहरा और किसी की इज्जत-आबरू पर बन आई. लोक साहित्य हो या आम बातचीत, दोनों ही मामलों में भारतीयों के पास बहुत कुछ है. उनके पास गंदे नस्ली चुटकुले से लेकर रसूखदारों पर हंसने की शरीफ आदत भी है. आप इस एसएमएस के बारे में क्या कहेंगे जो भारतीय इतिहास में रियल एस्टेट के सबसे मशहूर व्यापारी वाड्रा के उत्थान की बात सार्वजनिक होते ही मोबाइल से मोबाइल पर घूमने लगा.

राहुल गांधी ने मायूसी के साथ अपनी मम्मी से कहा: 'पहले सीडब्ल्यूजी, फिर टू-जी, फिर कोल-जी और अब जीजा जी.’ जीजा जी एक अच्छा कटाक्ष है जो उत्तरी भारत की चाय की दुकानों में आम तौर पर चर्चा का विषय बन जाता है.

फिलहाल भारतीय अपने हास्य बोध के बारे में बात नहीं कर रहे हैं बल्कि वे रॉबर्ट वाड्रा के हास्य बोध के बारे में बात कर रहे हैं. राजनीति निर्मम खेल है, संवेदनशील लोगों के लिए नहीं है. आधुनिक लोकतंत्र की पितृ-भूमि अमेरिका में एक कला के रूप में चुनाव के विकसित होने के समय से आक्षेप या उलाहना इसके अलिखित विधान में शामिल है. मैंने हाल ही में एक अमेरिकी अखबार में चुनाव के शुरुआती दौर में इस्तेमाल होने वाली भाषा के बारे में पढ़ा.

अमेरिकी संविधान निर्माता और प्रेस की आजादी के बड़े समर्थक थॉमस जेफरसन पर सन् 1800 में अपनी जागीर में ''कांगो हरम” चलाने का इल्जाम लगा. लेकिन अच्छे ईसाई की तरह जेफरसन ने अपना दूसरा गाल नहीं बढ़ाया. उनके समर्थकों ने उनके प्रतिद्वंद्वी जॉन ऐडम्स पर यह इल्जाम लगाया कि वे अपनी निजी जरूरतों के लिए 'ब्रिटिश वेश्याओं’ की तस्करी कर रहे हैं. यहां ब्रिटिश पर गौर करें. यह ऐसा ही है जैसे किसी भारतीय नेता पर यह इल्जाम लगे कि वह पाकिस्तानी हरम चला रहा है.

बेहतरीन हाजिर-जवाबी का नमूना 1884 में देखने में आया जब ग्रोवर क्लिवलैंड पर एक नाजायज बच्चे का बाप होने का आरोप लगा. इस बात से प्रभावित होकर एक गीत मां मां कहां है मेरा पा बन गया, जिसकी गूंज उनके प्रचार के दौरान भी सुनी गई. क्लिवलैंड ने चुनाव जीतने के बाद जवाब दिया: वह व्हाइट हाउस चला गया, हा हा हा!

अपने दुश्मनों को अपशब्द कहना एक बात है और उन लोगों पर व्यंग्य करना जिन्होंने आपको वोट देकर सत्ता में बिठाया, अलग बात है, यह बेहद घटिया किस्म का मजाक है. आम आदमी का मन इस बात से बदमजा हो जाएगा जब आप उसे कहें, ''अ मैंगो मैरीड टु अ बनाना रिपब्लिक” या अस्थिर गणराज्य से जुड़ा आम (आदमी). इस तरह के मजाक बहुत जल्द बदमजा कर देते हैं.

रॉबर्ट वाड्रा न केवल भारत के सबसे शक्तिशाली राजनैतिक परिवार के प्रतिष्ठित सदस्य हैं बल्कि वे अपने तरीके से ऊंचे पद का ख्वाब भी पालते हैं. ये आम और केले चुनावी प्रचार में उनके पीछे-पीछे होंगे. यह उनकी पत्नी प्रियंका गांधी की संभावनाओं को भी नुकसान पहुंचाएंगे, जिन्हें उनकी मां मिसेज सोनिया गांधी का चुनावी क्षेत्र रायबरेली विरासत में मिलने वाला है.

हम मिस्टर वाड्रा की शैक्षणिक सलाहियत के बारे में ज्यादा नहीं जानते. वे लैटिन अमेरिका की भू-राजनीति और आर्थिक इतिहास से वाकिफ होंगे, जहां बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने खानदानी तानाशाही के जरिए शोषण किया और जिससे अंग्रेजी में 'बनाना रिपब्लिक’ शब्दावली गढऩे का मौका मिला. शायद वे उसकी आम और बोलचाल वाली व्याख्या से परिचित हों, जिसका अर्थ है ऐसा देश जिस पर बंदरों का राज हो और जो राष्ट्रीय संपदा को केले के भाव बेच रहे हैं.

शायद यहां इसका प्रयोग अधिक बुद्धि वाली उपमा के तौर पर नहीं हो सकता, खासकर ऐसे में जब भारत में यह बहस चल रही हो कि बहुराष्ट्रीय कंपनियां विदेशी प्रत्यक्ष निवेश के जरिए यहां क्या कर सकती हैं. किसी ने वाड्रा को संभावना के खराब आयाम से अवगत करा दिया है क्योंकि उन्होंने अपने फेसबुक से वे बातें बहुत जल्दी हटा लीं. लेकिन वे इसे लोगों की स्मृति से इतना जल्दी नहीं मिटा पाएंगे क्योंकि उनके विरोधी किसी को यह बात इतनी जल्दी भूलने नहीं देंगे.

मिस्टर वाड्रा की पार्टी कांग्रेस अनिश्चितताओं से जूझ रही है. इसके प्रवक्ताओं ने पहले अरविंद केजरीवाल को धमकाना चाहा जिन्होंने कहानी को सार्वजनिक तथ्य बना दिया है; फिर उन्होंने वाड्रा को ऐसे मासूम के तौर पर पेश किया, जिन पर बदमाशों ने गलत इल्जाम लगाए. उन्हें जल्दी ही पता चल गया कि केजरीवाल डरने वालों में से नहीं हैं और उन्होंने अपने इल्जाम को दूसरे सबूतों से और पुख्ता करना शुरू कर दिया है.

चंद दिनों में ही सारे निहितार्थ समझ में आ गए. 1980 के दशक में बोफोर्स के बाद से यह पहला मौका है जब गांधी परिवार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा है और यह कीचड़ गोंद बनकर चिपकने लगा है. राष्ट्रमंडल खेल स्कैंडल में कांग्रेस के नेता लिप्त हैं लेकिन बड़े नेता नहीं. टेलीकॉम मामले में कांग्रेस अपने आपको अलग करने में सफल रही और इसने इल्जाम अपने गठबंधन के सहयोगी डीएमके की ओर सरका दिया. कोयला घोटाला जरा ज्यादा सख्त था और उसकी जिम्मेदारी सरकार और प्रधानमंत्री के सिर गई. रॉबर्ट वाड्रा तो फैमिली का हिस्सा हैं.

वाड्रा संकट ने बहस को भ्रष्टाचार से आर्थिक सुधार की ओर मोडऩे की कांग्रेस की कोशिश को नुकसान पहुंचाया है. सारा ध्यान एक घटिया मजाक पर लग गया है. 

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