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याद नहीं कब इतना नर्वस थीः दीपिका पादुकोण

मस्तानी का किरदार भी इतिहास से जुड़ा हुआ था और वे एक योद्धा राजकुमारी थीं. लेकिन पद्मावती की लड़ाई बहुत अलग थी, वे युद्ध के मैदान पर जाकर नहीं लड़ती थीं, कोई कवच या तलवार का इस्तेमाल नहीं करती थीं.

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aajtak.in
मंजीत ठाकुर नई दिल्ली, 07 November 2017
याद नहीं कब इतना नर्वस थीः दीपिका पादुकोण दीपिका पादुकोण

पद्मावती को लेकर नर्वस हैं?

मैं काफी नर्वस हूं. मुझे याद नहीं पिछली बार कब मैं इतना नर्वस थी. अब तक मैंने जितनी भी फिल्में की हैं उनमें से इस फिल्म में कुछ अलग बात है. यह फिल्म दिल से या दिमाग से नहीं बल्कि पूरे मन से बनाई गई है. हम सबके लिए यह एक भावनात्मक सफर रहा.

बाजीराव मस्तानी की मस्तानी और पद्मावती में से कौन ज्यादा चुनौतीपूर्ण किरदार रहा?

मस्तानी का किरदार भी इतिहास से जुड़ा हुआ था और वे एक योद्धा राजकुमारी थीं. लेकिन पद्मावती की लड़ाई बहुत अलग थी, वे युद्ध के मैदान पर जाकर नहीं लड़ती थीं, कोई कवच या तलवार का इस्तेमाल नहीं करती थीं. बावजूद इसके दोनों के साहस, पवित्रता, वैल्यूज और इंटेंसिटी में काफी समानता है. पद्मावती में बिना किसी टूल्स के अपनी परंपरा, अपने सम्मान और प्यार को सिर्फ ऐक्टिंग के जरिए पेश करना मेरे लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रहा.

पद्मावती के लुक को लेकर उठ रहे सवालों पर आप क्या कहेंगी?

कुछ लोगों ने इस फिल्म में पद्मावती के लुक पर सवाल उठाए हैं कि उनकी भवें जुड़ी हुई हैं, स्किनटोन भी अलग है. लेकिन जब आप फिल्म देखेंगे तो आप पाएंगे कि पद्मावती की सिर्फ शारीरिक खूबसूरती ही नहीं थी, बल्कि उनकी आंतरिक खूबसूरती ज्यादा मायने रखती थी. मेरे लिए वे बहुत प्रेरणादायी हैं. यह भी सच है कि हमारे देश में महिलाओं की खूबसूरती का एक अलग पैमाना है. लेकिन पद्मावती की खूबसूरती शारीरिक दायरे से काफी बड़ी थी.

पद्मावती को लेकर लगातार विरोध हो रहा है?

इतनी अड़चनों के बावजूद फिल्म का प्रमोशन और ट्रेलर लॉन्च करते हुए मुझे लग रहा है कि कोई तो है जो हर कदम पर हमारी मदद कर रहा है. मैं पद्मावती को अपने आस-पास महसूस कर रही हूं, उन्हें जी रही हूं.

गरबा, लावणी के बाद अब आप लोकनृत्य घूमर को लेकर चर्चा में हैं?

संजय लीला भंसाली के साथ काम करते समय आपको सिर्फ विश्वास रखना पड़ता है. मैंने घूमर के सार को समझने की कोशिश की. रिहर्सल नहीं की. शूटिंग के दौरान यह नहीं सोचते कि सिर पर कितना भारी बोरला है या लहंगा कितना भारी है या दुपट्टा कितना असुविधाजनक है. शूट के बाद यह समझ में आता है कि पीठ में दर्द है, चोट लगी है.

—नवीन कुमार

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