एडवांस्ड सर्च

अफगानिस्तान में कहीं चीन अपने सैन्य अड्डे तो नहीं बना रहा ?

शिनझियांग में प्रवेश का अन्य मुक्चय बिंदु पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर है, जो बड़े पैमाने पर चीन-पाकिस्तान आर्थिक आर्थिक कॉरिडोर (सीपीईसी) पहल का हिस्सा है. क्या यह वाखान पर आगे बढ़ेगा?

Advertisement
अनंत कृष्णननई दिल्ली, 14 February 2018
अफगानिस्तान में कहीं चीन अपने सैन्य अड्डे तो नहीं बना रहा ? चीनी ठिकाना अफगानिस्तान के बदख्शां प्रांत में वाखान गलियारे से निकलते खानाबदोशों के परिवार

अफगानिस्तान में क्या चीन अपने सैन्य अड्डे स्थापित करने की योजना बना रहा है? अफगान अधिकारियों के मुताबिक, दोनों देशों ने पहली बार संकरे वाखान कॉरिडोर में एक नए सैन्य अड्डे पर चीन की भागीदारी के बारे में चर्चा की, जो दोनों देशों और कश्मीर की सीमा को जोड़ेगा.

रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने 2 फरवरी को काबुल में जानकारी दी कि चीन बदख्शां प्रांत में सैन्य अड्डा बनाने के लिए वित्तीय सहायता देने की प्रतिबद्धता दिखा रहा है, जहां सुदूर पूर्व में यह कॉरिडोर स्थित है. इसके अलावा, चीन अफगान सैनिकों को भी प्रशिक्षित करेगा. दोनों देशों के बीच वार्ता उस समय हुई, जब अफगानी रक्षा मंत्री दिसंबर में बीजिंग की यात्रा पर गए थे.

रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद रादमनश ने एएफपी को बताया, '' हम यह बेस बनाने जा रहे हैं, लेकिन चीन की सरकार इसे वित्तीय मदद करने, उपकरण उपलब्ध करवाने और अफगान सैनिकों को प्रशिक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है.’’बीजिंग में अधिकारी इस योजना को लेकर बिल्कुल चुप हैं.

पीएलए प्रवक्ता वरिष्ठ कर्नल वु कुयान ने इस खबर को निराधार बताया. लेकिन उनके इस इनकार को चुटकी भर नमक की तरह लिया जा सकता है. चीन की लंबे समय से जारी गैर-हस्तक्षेप की नीति को लेकर इसी तरह के इनकार को बहुत महत्व नहीं दिया गया, जब पिछले वर्ष बीजिंग ने जिबूती में अपना पहला सैन्य अड्डा खोला था.

हिंद महासागर में सैन्य अड्डा स्थापित करने की चीन की योजना पर लंबे समय से काम हो रहा है, क्योंकि उसका उद्देश्य अपनी नौसेना की बढ़ती पहुंच को और सुविधाजनक बनाना है. योजनाकारों ने पहले ही सुझाया कि चीन उन कई बंदरगाहों में नए ठिकाने बना सकता है, जिनका वह तटीय हिंद महासागर देशों में वित्तपोषण कर रहा है. इसमें सेशेल्स और पाकिस्तान के ग्वादर का जिक्र संभावनाओं के रूप में किया गया.

हालांकि चीन की अफगान चाल के सफल होने की उम्मीद कम है. चाहे पूरी तरह चीनी अड्डा हो या एक अफगानी अड्डा, जिसे चीन वित्तपोषित करेगा और अपने कर्मचारी वहां तैनात करेगा, लेकिन जमीन पर चीनी सैनिकों की मौजूदगी वाकई गेमचेंजर है.

वास्तव में चीन ने पहले ही उइगुर आतंकवादियों पर निशाना साधने के उद्देश्य से चुपचाप वाखान में संयुक्त निगरानी शुरू कर दी है. चीन को आशंका है कि ये आतंकी अफगानिस्तान, पाकिस्तान और हाल ही में सीरिया से प्रशिक्षण लेकर अपने मूल शिनझियांग प्रांत में लौटने की कोशिश कर सकते हैं. हालांकि पीएलए संयुक्त निगरानी से इनकार करता है, लेकिन स्थानीय किर्गिज निवासी कहते हैं कि चीनी सैनिक वहां महीनों से मौजूद हैं. किर्गिज सरदार अब्दुल राशिद ने एएफपी से कहा, ‘‘चीनी सैनिक पहली बार यहां पिछली गर्मियों में आए और उनके साथ अफगान सैनिक भी थे.’’

वाखान गलियारे की सामरिक महत्ता को देखते हुए वहां चीन की सैन्य उपस्थिति भारत के लिए काफी मानीखेज है. बीजिंग के सामरिक विशेषज्ञ हु शिशेंग कहते हैं, ‘‘अफगानिस्तान में एक सैन्य अड्डे का निर्माण चीन के लिए बहुत दूर की बात है, लेकिन तथ्य यह है कि अफगानिस्तान और चीन के बीच आतंकवाद विरोधी गठजोड़ हुआ है.’’

वे कहते हैं कि सरकार बदख्शां में अधिक संसाधनों का निवेश करने के लिए उत्सुक है. ''पूर्वी तुर्किास्तान इस्लामिक आंदोलन और कुछ चीनी अतिवादी, विशेषकर 2009 से पहले, बदक्चशां के रास्ते अफगानिस्तान के कबायली इलाकों में प्रवेश करते थे. बदक्चशां में क्षमता बढ़ाने से चीन के साथ अफगानिस्तान के हितों की भी पूर्ति होती है.’’

शिनझियांग में प्रवेश का अन्य मुक्चय बिंदु पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर है, जो बड़े पैमाने पर चीन-पाकिस्तान आर्थिक आर्थिक कॉरिडोर (सीपीईसी) पहल का हिस्सा है. क्या यह वाखान पर आगे बढ़ेगा? वहां चीन की संयुक्त निगरानी भारत के लिए चेतावनी है, क्योंकि जिसे भारत अपने अधिकार का क्षेत्र मानता है, वहां चीनी सैनिकों की मौजूदगी होगी.

हू ने पीओके बेस की संभावनाओं से इनकार किया और कहा कि यह चीन, पाकिस्तान और भारत के हित में नहीं है. इससे केवल तीनों के संबंध बिगड़ेंगे और इस क्षेत्र में तनाव पैदा होगा. फिलहाल, चीन की जोखिम उठाने की नई भूख को देखते हुए कुछ कहना जल्दबाजी होगी.

***

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
पाएं आजतक की ताज़ा खबरें! news लिखकर 52424 पर SMS करें. एयरटेल, वोडाफ़ोन और आइडिया यूज़र्स. शर्तें लागू
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay