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यूपीः बंट गई हिंदू युवा वाहिनी

विधानसभा चुनाव से पहले सुनील सिंह न केवल हिंदू युवा वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष थे बल्कि जोशीले युवाओं के इस संगठन के संरक्षक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बेहद करीबी लोगों में से थे.

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Sahitya Aajtak 2018
आशीष मिश्रनई दिल्ली, 29 August 2018
यूपीः बंट गई हिंदू युवा वाहिनी शिकंजा तोडफ़ोड़ के आरोप में गोरखपुर में गिरफ्तार हिंदू युवा वाहिनी (भारत) के सुनील सिंह

हिंदू युवा वाहिनी में वर्चस्व की जंग अब कानून व्यवस्था को भी चुनौती देने लगी है. हिंदू युवा वाहिनी के एक नेता को जान से मारने की धमकी देने पर 31 जुलाई की दोपहर गोरखपुर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पार्षद के भाई चंदन को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. कार्रवाई के विरोध में सुनील सिंह अपने समर्थकों के साथ आ डटे. विधानसभा चुनाव से पहले सुनील सिंह न केवल हिंदू युवा वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष थे बल्कि जोशीले युवाओं के इस संगठन के संरक्षक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बेहद करीबी लोगों में से थे.

उनके समर्थकों ने राजघाट थाने के सामने जमकर हंगामा और तोड़-फोड़ की. पुलिस ने लाठियां भांजीं और सुनील सिंह को उनके समर्थकों के साथ गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. पिछले वर्ष विधानसभा चुनाव के पहले सुनील को हिंदू युवा वाहिनी से अलग कर दिया गया था. उन्होंने इसके बाद बागी तेवर अपनाकर भाजपा के उम्मीदवारों के खिलाफ प्रत्याशी उतारने का फैसला किया. सहजनवां में वे खुलकर सपा प्रत्याशी के समर्थन में आ गए थे.

यहीं से हिंदू युवा वाहिनी में बिखराव की पृष्ठभूमि बननी शुरू हुई. मौजूदा मुख्यमंत्री और तब गोरखपुर के सांसद रहे योगी आदित्यनाथ ने 2002 में रामनवमी के दिन जोशीले युवाओं को लेकर हिंदू युवा वाहिनी जैसा संगठन तैयार किया था.

2017 के विधानसभा चुनाव के बाद हिंदू युवा वाहिनी (यूपी) का गठन हुआ, गोरक्ष पीठाधीश्वर और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसके संरक्षक बने. भाजपा विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह को इस नए संगठन का प्रदेश प्रभारी और पी.के. मल्ल को इसका महामंत्री  बनाया गया.

इसके बाद सुनील सिंह ने भी योगी आदित्यनाथ से रिश्ते सुधारने की कोशिश भी लेकिन, इनकी दाल नहीं गली. मई में सुनील सिंह ने हिंदू युवा वाहिनी (भारत) नाम से एक अलग संगठन बना डाला. लखनऊ के वीवीआइपी गेस्ट हाउस में 13 मई की शाम हिंदू युवा वाहिनी (भारत) के पदाधिकारियों की राष्ट्रीय बैठक आयोजित की गई. इसमें सुनील सिंह को संगठन का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया. बैठक की जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय में पहुंचते ही सरकार सख्त हो गई.

वीवीआइपी गेस्ट हाउस के व्यवस्थाधिकारी को तुरंत निलंबित कर दिया गया. इसके बाद से सुनील सिंह अपने संगठन हिंदू युवा वाहिनी (भारत) को मजबूत करने में जुट गए. पिछले कुछ महीनों में जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर हिंदू युवा वाहिनी (भारत) ने उसी अंदाज में धरना प्रदर्शन और आंदोलन करने की कोशिश की है जैसा कि मूल वाहिनी किया करती थी. इसी के साथ हिंदू युवा वाहिनी (यूपी) और हिंदू युवा वाहिनी (भारत) के बीच वर्चस्व की जंग का आगाज हुआ.

गोरखपुर के वरिष्ठ एडवोकेट आर.एम. द्विवेदी बताते हैं, ''योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद स्थानीय स्तर पर भाजपा संगठन को तरजीह मिलने से हिंदू युवा वाहिनी से जुड़े उग्र हिंदुत्व के पैरोकार युवा अपने को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं.

इन्हीं वजहों ने युवा वाहिनी में बिखराव की स्थिति पैदा की है.'' हिंदू युवा वाहिनी से जुड़े रहे कुछ नेताओं ने इसी नाम से कुछ अन्य संगठन भी खड़े कर स्थानीय स्तर पर जड़ें जमाने की कोशिश शुरू की है. युवा हिंदू वाहिनी, राष्ट्रवादी हिंदू युवा वाहिनी, राष्ट्रवादी युवा वाहिनी नाम के संगठन बनाए गए हैं.

यही नहीं पश्चिमी यूपी में योगी सेना नाम से भी एक संगठन बना है. इससे जुड़े एक नेता राम सिंह बताते हैं, ''पश्चिम में मुस्लिम बाहुबल से निबटने के लिए हिंदू समाज को भी ताकत बढ़ानी होगी, योगी सेना का यही उद्देश्य है.''

हिंदू युवा वाहिनी का फर्जी संगठन मध्य प्रदेश और बिहार में भी चल रहा है. इसकी जानकारी संगठन के महामंत्री पी.के. मल्ल को मिलने पर उन्होंने राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है.

यूपी के महोबा और रामपुर जिलों में ऐसे छद्म संगठनों पर कार्रवाई भी की गई है. मल्ल बताते हैं, ''हिंदू युवा वाहिनी का कार्यक्षेत्र अभी यूपी है. यूपी के बाहर के राज्यों में भी बड़ी संख्या में संगठन से लोग जुड़े हैं लेकिन आंदोलन जैसे कार्य करने की इजाजत किसी को भी नहीं है.''

हिंदू युवा वाहिनी के समक्ष सबसे बड़ी समस्या अपने सदस्यों की पहचान को लेकर भी है. संगठन ने अब तक सदस्यों से जुड़े आंकड़ों का दस्तावेज तैयार ही नहीं किया है. मल्ल बताते हैं, ''जिला, प्रदेश स्तर पर कार्य कर रहे हिंदू युवा वाहिनी के सदस्यों की जानकारी जुटाई जा रही है.

इन सबका दस्तावेजीकरण किया जाएगा.'' हिंदू युवा वाहिनी धनाभाव की समस्या से भी गुजर रही है. संगठन के पास अपने सांस्कृतिक कार्यक्रमों को पुरजोर तरीके से चलाने के लिए धन नहीं है, इससे इसकी मौजूदगी भी सीमित हो रही है.  

गोरखनाथ मंदिर परिसर पर हिंदू युवा वाहिनी का प्रदेश कार्यालय तो है लेकिन जिलों में संगठन के पास कार्यालय खोलने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं. मल्ल बताते हैं, ''जिलों के वरिष्ठ पदाधिकारियों के घर पर संगठन का कार्यालय खोलकर गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है.''

योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद हिंदू युवा वाहिनी के तेवर में भी बदलाव आया है. उग्र हिंदुत्व का पैरोकार रहा यह संगठन अब ऐसी कोई गतिविधि संचालित नहीं करना चाहता, जिससे योगी को असहज स्थिति का सामना करना पड़े.

पिछले वर्ष गोरखपुर और आसपास के जिलों में बाढ़ के दौरान इसके कार्यकर्ताओं ने बड़े पैमाने पर बचाव-राहत कार्य किया था. उसके बाद से संगठन गांव स्तर पर पौधारोपण, स्वच्छ पेयजल जैसे सामाजिक अभियान का भी संचालन कर रहा है.

मल्ल बताते हैं, ''गांव-देहात में फैले हुए हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं से एक 'मॉनीटरिंग सिस्टम' तैयार किया गया है. इसके जरिए संगठन प्रदेश सरकार की योजनाओं के बारे में फीडबैक जुटा रहा है.'' इसके बावजूद हिंदू युवा वाहिनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती उग्र हिंदुत्व के पैरोकार युवा कार्यकर्ताओं को थामे रखने की है. क्योंकि उग्रता से संगठन की छवि बिगड़ रही है.

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