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मुहब्बत का वह अफसाना जिसकी हिफाजत जरूरी

साल 1960 तक ताज महलदिन-रात खुला रहता था और कोई प्रवेश शुल्क भी नहीं था. उस साल करीब चार लाख लोगों  शरद पूर्णिमा को ताज महल देखने आए थे. उस समय तक प्रदूषण भी नहीं था. ताज महल दूध की तरह सफेद था और वहां चारों ओर हरियाली थी.
मुहब्बत का वह अफसाना जिसकी हिफाजत जरूरी शमसुद्दीन
शमसुद्दी 24 July 2018

ताज महल महज एक स्मारक नहीं बल्कि क्चवाब है, जिसे बादशाह शाहजहां ने संगमरमर से तामीर करवाकर पूरी दुनिया को हैरत में डाल दिया था. 40,000 देशी- विदेशी कारीगरों के हाथों से संवारे गए इस अनूठे स्थापत्य शिल्प को देखना दुनिया के हर शख्स की क्चवाहिश होती है. ताज महल प्रेम का संदेश देता है.

शाहजहां ने अपनी दूसरी पत्नी मुमताज महल (आर्जुमंद बानो) की याद में इसको बनवाया था. 39 साल की उम्र में मुमताज की मृत्यु बुरहानपुर में हो गई थी.

इतिहासकारों के मुताबिक, शाहजहां इतने दुखी हुए कि एक सप्ताह के अंदर उनके सिर और दाढ़ी के बाल सफेद हो गए थे. बुरहानपुर के जैनाबाद बाग में मुमताज के पार्थिव शरीर को अस्थायी तौर पर दफना दिया गया. शाहजहां राजधानी आगरा आ गए और पत्नी की याद में एक भव्य मकबरा बनवाने की जगह तलाशने लगे.

वहां जयपुर के महाराज जय सिंह का बाग उनको पसंद आया और शाहजहां ने पांच हवेलियां देकर इस बाग को खरीद लिया. जय सिंह इस बाग को तोहफे में देना चाहते थे पर शाहजहां ने कहा दूसरे की जगह में इस्लामी कानून के तहत मकबरा नहीं बना सकते.

कहा जाता है कि शाहजहां ने इसको खुद डिजाइन किया था पर रिकॉर्ड के मुताबिक, अब्द अल-हमीद लाहौरी ने लकड़ी का मॉडल बनाकर शाहजहां के सामने पेश किया. शाहजहां ने उसमें कुछ चीजें बदलकर मॉडल पास कर दिया और ताज महल बनना शुरू हो गया. यह 22 साल में बनकर तैयार हुआ. इसे 39 तरह के कीमती पत्थरों से सजाया गया. 4,000 किलो सोना इसकी बुर्जियों को बनाने के लिए दिया गया और और इसके तैयार होने के बाद मुमताज के पार्थिव शरीर को इसमें दफना दिया गया.

यह इंडो-इस्लामिक वास्तुकला का नमूना है. इसमें एक ओर कमल का फूल है तो दूसरी ओर आयतें लिखी हुई हैं. इसके कलश पर इस्लामी चांद बनाया गया है, तो उसके ऊपर मंगल कलश रखा गया है जिस पर "अल्लाह'' लिखा गया है.

ताज महल दुनिया के सात अजूबों में एक है. इसे 1983 में विश्व धरोहर घोषित किया गया. इसकी खूबसूरती को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता. कोई चित्रकार लैंडस्केप बनाता है जिसमें वह तीन (पी) प्लानिंग, पोर्शन, प्रोसपेक्टिव का ध्यान रखता है. ताज महल भी एक लैंडस्केप की तरह है जिसमें आकाश भी है, निर्माण भी है और हरियाली भी. इसे संपूर्ण प्राकृतिक दृश्य की तरह संरक्षित किया गया है.

अमेरिकन उपन्यासकार बयार्ड टेलर ने लिखा है कि अगर भारत में कुछ भी नहीं होता तो अकेला ताज महल ही विश्व के पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए काफी है. यही वजह है कि ताज महल विदेशी हस्तियों का भी पसंदीदा रहा है. ब्रिटिश अफसर कर्नल विलियम हेनरी स्लीमन की पत्नी ने कहा था, "मेरे लिए कोई ताज महल जैसी बिल्डिंग बनाए तो मैं कल ही मरना पसंद करूंगी."

इसी साल जनवरी में इज्राएल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अपनी पत्नी सारा के साथ ताज महल के दीदार के लिए आगरा आए थे. 2014 में ब्रुनेई के सुल्तान ने कहा था कि उनके यहां तेल के कुएं हैं, अगर ताज महल भी होता तो कितना अच्छा होता! 2011 में न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री जॉन की ने कहा, "मैंने दुनिया के कई स्मारक देखें है पर ताज महल जैसा कोई नहीं है.''

वर्ष 2000 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन अपनी बेटी के साथ ताज का दीदार करने पहुंचे थे और इसके परिसर में करीब डेढ़ घंटे तक रहे.

साल 1960 तक ताज महल दिन-रात खुला रहता था और कोई प्रवेश टिकट भी नहीं था. उसके अहाते से होकर लोग आते-जाते थे. शरद पूर्णिमा में लाखों लोग ताज महल को चंद्रमा की रोशनी में देखने आते थे, जिसे लोग चमकी कहा करते थे. 1960 में करीब चार लाख लोगों ने चमकी का आनंद लिया था. पहले लोग उसके पूर्वी गेट से आया-जाया करते थे. 1988 से उसका पश्चिमी गेट खोल दिया गया.

उन दिनों यमुना पानी से लबालब रहती थी. पर्यटक नाव में बैठकर ताज महल के चित्र लिया करते थे. उस समय तक प्रदूषण नहीं था. ताज महल दूध की तरह सफेद था, चारों ओर हरियाली थी. ताज महल परिसर के अंदर काफी पेड़ थे, जिनमें काफी कट गए हैं. ताज महल से देश में पर्यटन को बढ़ावा मिला है.

इससे देश को विदेशी मुद्रा की आय भी हो रही है. ताज महल प्रेम का प्रतीक है. यह देश का गौरव है. इस धरोहर की हिफाजत करना हम सबका कर्तव्य है. सरकार ही नहीं आम जनता को भी इसकी खूबसूरती को कायम रखने के लिए आगे आना होगा.

अध्यक्ष, एप्रूव्ड गाइड एसोसिएशन शमसुद्दीन से सिराज कुरैशी से बातचीत पर आधारित

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