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कुमाउं के मंदिरों की सैर

इस किताब के जरिए कुमाऊं के मंदिरों की दिलचस्प ऐतिहासिक जानकारियां मिल जाती हैं तो वहां की सैर भी.

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चंद्रमोहन ज्योतिनई दिल्ली, 18 August 2014
कुमाउं के मंदिरों की सैर

बात कुछ दिन पहले की है. उमा भारती ने उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में पालाल भुवनेश्वर के संकरे मुख्य द्वार और जमीन के 30 फुट नीचे अंधेरी गुफा में जाने से मना कर दिया था. यह बात मंदिर के पुजारी और व्यवस्थापक बताते हैं. असल में यह गुफा है ही इतनी संकरी कि कई लोग अंदर जाने की हिम्मत नहीं कर पाते जबकि स्थानीय लोगों की मान्यता है कि मोटे से मोटा व्यक्ति भी इस गुफा में आसानी से प्रवेश कर जाता है. प्रवेश से मुख्य गुफा तक घुप अंधेरे में ऑक्सीजन की कमी भी श्रद्धालुओं की परेशानी का सबब बन जाती है.
 
हेमा उनियाल की यह पुस्तक कुछ ऐसी जगहों के साथ मध्य हिमालय के कुमाऊं संभाग के मठ-मंदिरों की विस्तृत जानकारी देती है. इसमें इतिहासविदों और विद्वानों से बातचीत तथा स्थानीय बुजुर्गों से संवाद है. यह सब यात्रा वृत्तांत-सा लगता है. लेकिन जब वेदों और इतिहास की परतें खंगाली गई हों तो किताब का महत्व बढ़ जाता है. यहां के मंदिरों, मूर्तियों और शिलालेखों के प्राचीन होने के प्रमाण ज्ञानवर्धक और दिलचस्प बन गए हैं. कुमाऊं अंचल के इतिहास, धर्म, संस्कृति, वास्तुशिल्प और पर्यटन से रू-ब-रू कराती यह कृति किसी दस्तावेज से कम नहीं है. तीन साल में 150 मंदिरों का भ्रमण और लगभग 600 धार्मिक स्थलों, पुरातात्विक और ऐतिहासिक स्थलों का विवरण जुटाकर हेमा ने इसे पर्यटकों और धार्मिक रुचि वाले लोगों के लिए बहुपयोगी बना दिया है. प्रख्यात इतिहासकार डॉ. शेखर पाठक और पुरातत्वविद् डॉ. यशवंत कठोच का ज्ञानदर्शन इस पुस्तक के बहुत काम आया है.

लेखिका ने अनेक यात्राएं करके सैकड़ों मंदिरों के चित्र और उनके तथ्य बारीकी से जुटाए हैं. वे बताती हैं, “नैनीताल में देवगुरु वृहस्पति मंदिर के लिए पांच किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई शरीर को चकनाचूर कर देती है.” तो गढ़वाल अंचल के मंदिरों और ऐतिहासिक स्थलों से जुड़ी अपनी यात्रा पुस्तक ‘केदारखंड’ के लिए तो उन्होंने 11,000 फुट तक की ऊंचाई वाले कई दुर्गम स्थलों की चढ़ाई की थी. वे किताब में बताती हैं, “मानव अनुपस्थिति इस यात्रा को रोमांचक और खौफनाक बना देती है. हर मोड़ पर बाघ और भालू जैसे खतरनाक जंगली जानवरों से आमना-सामना होने का डर हमेशा बना रहता है.”

लगभग 550 पृष्ठों की इस पुस्तक में जिस प्रकार रमणीय और पौराणिक स्थलों के चित्र जुटाए गए हैं अगर ये सभी रंगीन छपाई में होते या पुस्तक का कॉफी टेबल बुक साइज में छपवाया जाता तो यह उच्च व्यावसायिक और पर्यटन केंद्रों के लिए संग्रहणीय बन सकती थी. वैसे, यह गंभीर और सराहनीय प्रयास है.

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