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उभरता टाइगर भारत का

18 साल बाद, आसपास पीजीए टुअर कैमरा क्रू की मौजूदगी में उन्होंने ठीक वह जगह खोज निकाली और टाइगर के ऐतिहासिक खेल को दोहराने की कोशिश की.

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मेराज शाहनई दिल्ली, 14 August 2018
उभरता टाइगर भारत का अल्फ्रेडो एस्ट्रेला

यह ओहायो (अमेरिका) के अकरॉन में फायरस्टोन कंट्री क्लब के साउथ कोर्स पर शाम के झुटपुटे का वक्त है. खिलाड़ियों का आखिरी ग्रुप प्रैक्टिस खत्म कर चुका है. उन सबसे बेखबर एक खिलाड़ी अभी भी गोल्फ कोर्स पर है. शायद इसी लम्हे का इंतजार था उसे. शुभंकर शर्मा 18वें फेयरवे (सपाट ग्राउंड) पर 168 कदम दूर हैं. क्लबहाउस से वे हरियाली के बीच कहीं खोते दिखते हैं. हाथ में गोल्फ स्टिक लिए वे हरे-भरे कटावदार ग्राउंड के पूरे दायरे को बमुश्किल देख पाते हैं. पर वे इतना जानते हैं कि उन्हें शॉट किस तरह से लेना है. सैकड़ों बार मार ही चुके हैं.

अब 22 साल के हो चुके शर्मा उस वक्त महज तीन बरस के थे, जब टाइगर वुड्स ने उसी जगह से वह ऐतिहासिक एट आयरन (बल्ले की तरफ गोल्फस्टिक का एक प्रकार) हिट किया था, जहां आज शर्मा खड़े हैं. वुड भी ग्रीन (होल के आसपास की जगह) को देख नहीं पा रहे थे, फिर भी उनका शॉट होल के 2 फुट दायरे में आकर गिरा और वे वर्ष 2000 की डब्ल्यूजीसी-एनईसी चैंपियनशिप जीते.

शर्मा के इस खेल में आने के लिए यही वह निर्णायक क्षण था. 18 साल बाद, आसपास पीजीए टुअर कैमरा क्रू की मौजूदगी में उन्होंने ठीक वह जगह खोज निकाली और टाइगर के ऐतिहासिक खेल को दोहराने की कोशिश की. अपनी चौथी कोशिश में होल के छह फुट करीब पहुंचने वाले शर्मा कहते हैं, "मैंने जितना सोचा था, उससे कहीं ज्यादा कठिन है यह सब. वहां न तो कोई टूर्नामेंट है और न ही दर्शक. इन हालात में टाइगर के लिए हिट करना और भी मुश्किल रहा होगा.''

खांटी प्रशंसकों जैसा शर्मा का यह यशगान आपको निरुपाय कर देता है. डब्ल्यूजीसी ब्रिजस्टोन चैंपियनशिप में उनकी सबसे बड़ी महत्वाकांक्षा तो "आगे बढऩे का साहस जुटाने और टाइगर वुड्स से अपना परिचय कराने का है. सोच रहा हूं कि जाऊंगा और उन्हें "हाय'' बोलूंगा, पर थोड़ा नर्वस भी हूं.''

पिछली दफा उनके इस तरह हिम्मत दिखाने का अच्छा नतीजा नहीं निकला था. मेक्सिको में अपने पहले डब्ल्यूजीसी इवेंट में प्रैक्टिस पर अपना परिचय देने के लिए जब वे फिल माइकल्सन की तरफ  बढ़े तो उन्होंने शर्मा को पत्रकार समझ लिया और बाहर भगा दिया. लेकिन शर्मा ने प्रतिष्ठा वापस हासिल की जब वे टूर्नामेंट लीड करने लगे.

गोल्फ  जगत में शर्मा की उठान को समझ पाना आसान नहीं क्योंकि जिस तरह के खिलाडिय़ों के बराबर वे पहुंच गए हैं, वहां ऐसा कोई दूसरा मॉडल नहीं. खेल की ऊंची रैंकिंग में यह युवा सितारा—पांच महीने में 450 स्थान की छलांग—गोल्फ जगत की सबसे ऊंची रैंक वाला भारतीय है. वे कहते हैं, "आपको इस पहलू पर तो गौर करना होगा कि जब मैं 16 साल की उम्र में पेशेवर खिलाड़ी बना था.''

अपने नायकों के साथ एक बड़ा टूर्नामेंट खेलते हुए भी यह युवक ब्रिजस्टोन में पहले राउंड की पूर्व संध्या पर खासा शांत दिखता है. "मेरा करियर ढर्रे वाले अंदाज का नहीं रहा है. ऑल इंडिया ऐमच्योर जीतने के बाद ही मैं पेशेवर हो गया था, हालांकि तब हर कोई कह रहा था कि यह कोई समझदारी वाला कदम नहीं.''

अब कोई उस निर्णय पर सवाल नहीं उठाता. शर्मा ने एशियन टुअर की रैंकिंग में लीड किया, वे यूरोपियन टुअर में 20वें स्थान पर रहे और वर्ल्ड रैकिंग में 88वें स्थान पर पहुंच गए हैं. वे कहते हैं कि एशिया का ऑर्डर ऑफ मेरिट जीतना उनके लिए सम्मान की बात होगी, लेकिन यह उनका बहुत बड़ा लक्ष्य नहीं है. "वैश्विक मंच पर आगे बढ़ते हुए मैं अपना बेस्ट शॉट लगाने की कोशिश करूंगा और अगर एशिया का टॉप रैंक का खिलाड़ी बनना एक लक्ष्य हुआ तो भी मैं इसमें अपना बेस्ट शॉट दूंगा.''

कॉर्पोरेट से मिलने वाले सहयोग की बात करें तो 2018 में उनकी सफलता ने इस तरह के अवसरों के दरवाजे खोल दिए, लेकिन वे चर्चा उन लोगों की करते हैं, जो ऐसे मौकों पर हमेशा उनके साथ खड़े रहे, जब उनको सबसे ज्यादा जरूरत थी.

उन्हीं के शब्दों में, "मैं किस्मत वाला हूं खासकर प्रायोजकों के मामले में. डीएलएफ के राजीव सिंह उस वक्त से मेरा सहयोग कर रहे हैं, जब मैं एमच्योर था. इसमें दो राय नहीं कि डीएलएफ  का सपोर्ट न होता तो आज मैं जहां हूं, वहां तक पहुंचना बहुत कठिन होता.''

डीएलएफ के अलावा शर्मा इंडोरामा के आलोक लोहिया और टेक सॉल्युशंस के एच.आर. श्रीनिवासन की भी काफी तारीफ  करते हैं. इंडोरामा थाईलैंड केंद्रित बहुराष्ट्रीय कंपनी है जो 2015 से उनकी प्रायोजक है. वे कहते हैं, "मैं ही क्यों, श्रीनिवासन ने कई गोल्फरों की काफी मदद की है.''

कुछ सोचने के बाद वे नाइकी के साथ हुई अब तक की सबसे बड़ी डील की भी चर्चा करते हैं, हालांकि और ब्योरा नहीं देते. "मैंने लांग टर्म के आधार पर नाइकी के साथ कॉन्ट्रैक्ट किया है. मुझे लगता है, मैं सही रास्ते पर हूं.''

इस पेशेवर खेल की गलाकाट प्रतिस्पर्धा वाली दुनिया में आगे बढ़ते हुए वे पूरी तरह से अपने खेल पर ही फोकस करते हैं और लॉजिस्टिक तथा प्रायोजक आदि से जुड़ा काम उन्होंने अपने पापा को सौंप रखा है. वे कई तरह के क्लब के साथ खेलते हैं, इसलिए इक्विपमेंट स्पांसर हासिल करने जैसे काफी आकर्षक माने जाने विकल्पों से परहेज करते  रहे हैं.

शर्मा कहते हैं, "आपको अपने खेल के लिए प्रायोजकों की जरूरत होती है, लेकिन अगर आपके खेल में व्यवधान आ रहा हो तो इसका क्या मतलब है?'' इसके बावजूद वे खुशी से यूरोप में उसी तरह से खेल रहे हैं जैसे कि ज्यादातर पेशेवर अमेरिका में खेलते हैं. वे कहते हैं, निश्चित रूप से अब भी एक लक्ष्य है कि इस साल अपना पीजीए टुअर कार्ड हासिल करूं.''

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