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स्टीरियोटाइप पर चोट

केरल की चैंपियन बॉडी बिल्डर और पावर लिफ्टर मजीजीया भानु तुर्की में वर्ल्ड आर्मरेसलिंग चैंपियनशिप में हिस्सा ले रही हैं

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aajtak.in
संध्या द्विवेदी/ मंजीत ठाकुर केरल, 22 October 2018
स्टीरियोटाइप पर चोट अजीब कोमाची

दो साल पहले मजीजिया भानु कॉलेज की छुट्टी पर अपने घर वडकारा आईं तो अचानक उन्होंने बॉक्सिंग सीखने का फैसला किया. ट्रेनिंग सेंटर वडकारा से 50 किमी दूर कोझिकोड में था. वहां ट्रेनर ने उन्हें बॉक्सिंग की बजाए पावर लिफ्टिंग करने का सुझाव दिया, क्योंकि उनके दांतों पर ब्रेसेज लगे थे. यहीं से उनकी जिंदगी ने नया मोड़ ले लिया.

जल्द ही यह लड़की राज्य स्तर पर एक मशहूर शख्सियत बन गई. उन्होंने तीन बार "केरल की सबसे ताकतवर महिला'' का खिताब जीता, साथ ही, 2017 में इंडोनेशिया में आयोजित एशियाई पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप में रजत पदक भी हासिल किया. उनकी शख्सियत की एक और चीज ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया—उनका हिजाब. इस हफ्ते, वे तुर्की की एंटाल्या में वर्ल्ड आर्म रेसलिंग चैंपियनशिप की ओपन कैटेगरी में प्रतिस्पर्धा के लिए उतरने वाली अकेली महिला हैं.

इस्लामी स्कूल में हिजाब पहनकर प्रतिस्पर्धाओं में भाग लेने और जीतने की आदत रखने वाली मजीजिया कहती हैं, "अगर मैं तेज धूप में हिजाब पहनकर मैदान में दौड़ सकती हूं, तो मैं इसे पहनकर पावर लिफ्टिंग या कुश्ती भी लड़ सकती हूं.'' लेकिन उनका हिजाब अब भी लोगों का ध्यान ज्यादा खींचता है. "जब मैं इंडोनेशिया में थी, तो लोग यह देखकर हैरान हो जाते थे कि भारत से आई एक प्रतियोगी हिजाब पहनती है, जबकि कई इंडोनेशियाई प्रतियोगी हिजाब नहीं पहनती थीं'', वे चेहरे पर मुस्कान बिखरते हुए कहती हैं.

अपने पति के मशवरे पर उन्होंने इस साल की शुरुआत में कोच्चि में मि. केरल प्रतियोगिता के महिला वर्ग को जीतने के बाद बॉडी बिल्डिंग की ओर कदम बढ़ाया और आज वे वडकारा में एक मिसाल बन चुकी हैं. उनका सपना एक दिन अपना जिम खोलना है. "जब मैंने पहली बार जिम जाना शुरू किया था, तो लोग हैरानी से देखते थे. लेकिन, आज जिम आने वाली महिलाओं की झिझक खत्म होने लगी है और वे महिलाओं के लिए तय समय के अलावा आम समय पर भी जिम आने लगी हैं.''

तुर्की में अपने जीतने की संभावनाओं के जवाब में वे कहती हैं कि इसके बारे में पहले कहना मुश्किल होगा. "आप जानते हैं कि आपको कितना भार उठाना है. लेकिन कुश्ती में प्रतिद्वंद्वी की मानसिक क्षमता और दृढ़संकल्प का अनुमान पहले नहीं लगा सकते. नतीजा शारीरिक और मानसिक, दोनों ही शक्ति के मेल से सामने आता है.''

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