एडवांस्ड सर्च

एम.सी. मैरीकॉम: मैं सबसे पहले देश के लिए खेलती हूं

''सबसे पहले मैं अपने देश के लिए, फिर अपने परिवार के लिए और आखिर में खुद की खातिर जीतना चाहती हूं. मेरे पति मेरे साथ चट्टान की तरह खड़े हैं. हमारे बच्चों की देखभाल वही करते हैं.''

Advertisement
आजतक वेब टीमनई दिल्‍ली, 03 August 2012
एम.सी. मैरीकॉम: मैं सबसे पहले देश के लिए खेलती हूं एम.सी. मैरीकॉम

एम.सी. मैरीकॉम, 29 वर्ष
बॉक्सिंग, 51 किलो; इंफाल, मणिपुर
उनकी कहानी इंटरनेशनल बॉक्सिंग फेडरेशन जब महिला बॉक्सिंग को इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी में बतौर कैटगरी शामिल करने पर विचार कर रहा था तब उन्होंने पांच बार विश्व चैंपियन रह चुकी एम.सी. मैरीकॉम की मिसाल को सामने रखा. अपने माता-पिता के साथ खेतों में काम करने वाली मणिपुर की इस लड़की को लेकर आलोचकों ने संदेह जताया था. जब मैरीकॉम की शादी हो गई तो आलोचकों ने उनकी एकाग्रता को लेकर सवाल खड़े किए थे.

जब मैरीकॉम ने जुड़वा बेटों को जन्म दिया तब भी आलोचकों को लगा था कि हाल ही में मां बनी यह बॉक्सर अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के लिए प्रशिक्षण नहीं ले पाएगी. अब उनके जुड़वा बेटे पांच साल के हो गए हैं और मैरीकॉम आलोचकों को मुंह तोड़ जवाब देने की तैयारी कर चुकी हैं. पिछले सात साल से ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट (ओजीक्यू) उनकी तैयारी करवा रहा है. ओजीक्यू की स्थापना बिलियर्ड्स के मास्टर गीत सेठी और बैडमिंटन के दिग्गज प्रकाश पादुकोण ने की थी.

ओजीक्यू के सीईओ वीरेन रसकिन्हा ने मैरीकॉम के करियर का काफी करीब से आकलन किया है. वे कहते हैं, ''वे कर्ई दशकों से रिकॉर्ड बना रही हैं. लेकिन इस साल की शुरुआत में वे ओलंपिक क्वालिफायर के पहले राउंड में ही हार गई थीं. इस झटके ने उन्हें लंदन के लिए तैयारी करने की खातिर सही समय पर जगा दिया.''

खास है मैरीकॉम किसी भी प्रतिद्वंद्वी से दूसरी बार नहीं हारी हैं. वे प्रतिद्वंद्वी की रणनीति और कमजोरी ताड़ लेती हैं फिर उसी के मुताबिक खेलती हैं.

चुनौती मैरीकॉम का 48 किलो कैटगरी से 51 किलो में जाना, जहां उन्हें अपने से भारी बॉक्सर्स से मुकाबला करना होगा.

मिशन ओलंपिक मंगोलिया में इस साल हुई एशियाई मुक्केबाजी प्र्रतियोगिता में मैरीकॉम ने मंगोलिया की एलिस केट एपरी और चीन की रेन कैनकन को 51 किलो कैटगरी में हराया था. इस प्रतियोगिता में वे गोल्ड मेडल विजेता रही थीं. मैरीकॉम अपनी जबरदस्त फॉर्म का श्रेय अपने ब्रिटिश कोच चार्ल्स एटकिंसन को देती हैं. एटकिंसन ने ही पुणे के बालेवड़ी स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स में उन्हें बॉक्सिंग के अभ्यास के लिए अच्छे पार्टनर दिलवाए थे, जिनके साथ मिलकर वे बॉक्सिंग की अच्छी प्रैक्टिस कर सकीं.

Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay