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फुरसत- छोटे स्क्रीन पर बड़ा मनोरंजन

सिनेमा की सीमाओं से आजादी लेते हुए वेब सिरीज ने दर्शकों के लिए एक बड़ा और ज्यादा लोकतांत्रिक प्लेटफॉर्म खोला. कम समय में ही कई सिरीज ने चर्चित होकर बनाया माहौल

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aajtak.in
संध्या द्विवेदी/ मंजीत ठाकुर 06 March 2019
फुरसत-  छोटे स्क्रीन पर बड़ा मनोरंजन वेब सिरीज

मुंबई का झोंपड़पट्टी वाला इलाका हो या हाउसिंग सोसाइटियों का पार्किंग एरिया, वहां पर अगर कुछ बच्चे किसी स्मार्टफोन के छोटे-से स्क्रीन पर आंखें गड़ाए दिखें तो ज्यादा संभावना इसी की है कि वे किसी न किसी वेब सिरीज में खोए हुए हों. वेब सिरीज की इस लत के शिकार छोटे शहरों में भी नजर आते हैं. नए जमाने में डिजिटल क्रांति के चलते वेब सिरीज ने मोबाइल स्क्रीन पर मनोरंजन की एक नई दुनिया का रूप ले लिया है. इंटरनेट और डेटापैक सस्ता होते जाने से बच्चे-बूढ़े, शहरी-ग्रामीण सब अपनी सहूलियत सेमन की खुराक पूरी कर रहे हैं. फिल्मों और सीरियलों के बावजूद वेब सिरीज का कारोबार बढ़ रहा है. इनसाइड एज और मिर्जापुर के क्रिएटर करण अंशुमन कहते हैं, ''पांच साल में वेब सिरीज का बिजनेस टीवी के बराबर हो जाएगा.'' करण ने 2015 में कॉमिक फिल्म बैंगिस्तान बनाई थी लेकिन कुछ विवादास्पद कंटेंट के कारण इसके प्रदर्शन पर 11 देशों ने बैन लगा दिया था. अब उन्होंने इस माध्यम में छिपी संभावनाएं तलाशनी शुरू की हैं.

नेटफ्लिक्स और अमेजॉन सरीखे बड़े खिलाडिय़ों के उतरने से वेब सिरीज का यह बाजार तेजी से बड़ा हो रहा है. और उस वक्त तो तहलका ही मच गया जब अमेजॉन ने मिर्जापुर की पब्लिसिटी बड़े बजट की फिल्म से भी ज्यादा कर दी. इसमें 'सेक्स और हिंसा' के अतिरेक के चलते इस पर सेंसरशिप लागू करने की मांग भी होने लगी. वैसे अल्ट बालाजी ओरिजनल की वेब सिरीज में भी इस तरह के तड़के थे. करण मानते हैं कि अचानक लोगों को फ्रीडम मिल गया है. ''मैंने भी किया है. पर अब और नहीं. अब मैं राजनीति करने जा रहा हूं जो सिनेमा में नहीं कर पाया था. कश्मीर पर वेब सिरीज लिख रहा हूं, जो मेरी किताब कश्मीरनामा पर आधारित है. इसमें कश्मीर की समस्या और आतंकवाद के बढऩे के कारणों को उजागर किया जाएगा.'' वैसे सेक्स और हिंसा को लेकर वे वेब सिरीज की दुनिया का बचाव भी करते है. ''ओमकारा और गैंग्स आफ वासेपुर की तरह ही है मिर्जापुर.''

अपनी पहली वेब सिरीज ये क्रेजी दिल बना रहे युवा क्रिएटर अदीब रईस (27) इसे थोड़ा और साफ करते हैं, ''सेक्स और हिंसा हमेशा से सिनेप्रेमियों को आकर्षित करते रहे हैं. आप दिखाएंगे तो वे देखेंगे. लेकिन मैं अपनी वेब सिरीज में सेक्स और हिंसा को जगह नहीं दूंगा क्योंकि मेरा फोकस युवा हैं और युवाओं के जीवन में और भी कई बातें हैं.'' ये क्रेजी दिल एमएक्स प्लेयर पर आने वाली है. इससे पहले उन्होंने शबाना आजमी के साथ शॉर्ट फिल्म आंटी जी बनाई थी जिसे खूब पसंद किया गया. दूसरी ओर टीवीएफ के चीफ क्रिएटर समीर सक्सेना भी कहते हैं, ''हमने परमानेंट रूममेट्स के रूप में ऐसी वेब सिरीज बनाई, जिसे परिवार के साथ देखा जा सके और उसे आज भी लोग देख रहे हैं.''

सेक्स और हिंसा के मसले पर भी इन क्रिएटर्स की राय साफ है. उनका मानना है कि सिनेमा और टीवी से अलग चीजें परोसने के लिए आजादी चाहिए. वेब सिरीज की दुनिया के दर्शक अलग हैं. वहां सेक्स और हिंसा ही क्यों, हॉरर, कॉमेडी हर जॉनर की सिरीज बन रही है. सेंसरशिप इसमें रोड़ा ही अटकाएगी. इंडस्ट्री के सूत्रों की मानें तो  वेब सिरीज वालों ने सेल्फ सेंसरशिप में यकीन करते हुए तिरंगे का अपमान, चाइल्ड पोर्न, बाल शोषण और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले कंटेंट किसी भी सूरत में नहीं दिखाने पर आम राय बना ली है.

वेब सिरीज के लिए देश में लगभग 36 प्लेटफार्म हैं जिसमें नेटफ्लिक्स ओरिजनल, अमेजॉन प्राइम ओरिजनल, अल्ट बालाजी ओरिजनल, वूट, हॉट स्टार, टीवीएफ वगैरह शामिल हैं. नेटफ्लिक्स और अमेजॉन के आने से इस बाजार में प्रतियोगिता बढ़ गई है. बड़े स्टार वेब सिरीज में आने लगे हैं, जिससे यह आशंका जाहिर की जा रही है कि पहले से काम करने वाले छोटे ऐक्टर्स का क्या होगा? अदीब कहते हैं, ''बड़े ऐक्टर्स की वजह से ट्रेंड तो बदलेगा लेकिन छोटे ऐक्टर पर कम पैसे खर्च करने पड़ते हैं, इस पहलू पर भी सोचना पड़ेगा.'' समीर के शद्ब्रदों में, ''बड़े ऐक्टर दर्शक खींचने को लिए जाएंगे. वेब सिरीज में आज भी सुमीत व्यास बड़े स्टार हैं.'' और करण की राय में, ''स्टार आने से लागत तो बढ़ेगी पर मजा आएगा.''

लेकिन अभी तक तो वेब सिरीज की कामयाबी में स्टोरी और कंटेंट का ही मोल ज्यादा रहा है. कल तक वीडियो पॉर्लर जाकर और डीवीडी घर लाकर जो लोग फिल्में देखते थे, आज वेब सिरीज के दीवाने हैं. जानकार भी मानते हैं कि फिल्म में कमर्शियल फैक्टर ज्यादा होते हैं जबकि वेब सिरीज में कंटेंट मायने रखता है. इसलिए स्टोरी टेलिंग पर फोकस करना पड़ता है. सैफ अली खान, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, सौरभ शुक्ला, पंकज त्रिपाठी, ऋचा चड्ढा, भूमि पेडणेकर, विकी कौशल जैसे कलाकार वेब सिरीज से नए दर्शक भी बना रहे हैं.

वेब सिरीज के लिए स्टोरी पर खूब काम किया जा रहा है. यहां कहानी सुनने-चुनने में काफी समय लगता है. 15-20 लोगों की कोर टीमें होती हैं. ऑफिस में 50 लोगों के बीच उस पर चर्चा होती है. कहानी दर्शकों को पसंद आने का भरोसा हो जाने पर वेब सिरीज बनाई जाती है. कंटेंट की अहमियत ज्यादा होने से यहां अच्छे लेखकों को मौका मिल रहा है. समीर बताते हैं, ''मेरे पास 50 लेखकों की टीम है. इनमें यूपी, बिहार और साउथ के भी हैं. सभी टैलेंटेड हैं और ऐसी कहानी तैयार करते हैं जो वेब सिरीज के दर्शकों को पसंद आए. इन्हें पहले मौका नहीं मिला, जिस वजह से उनसे हमें अच्छी कहानी मिल पा रही है.'' अदीब भी जोड़ते हैं, ''इस समय वेब सिरीज में ही नहीं, सिनेमा में भी अलग तरह की कहानियां दर्शकों को खींचकर ला रही हैं. ऐसे में यह चुनौती वाला काम है. हम स्टोरी पर जमकर मेहनत करते हैं.'' और बकौल करण, ''लेखकों के लिए यहां इतना काम है, उनके लिए पैसे भी हैं जो सिनेमा में नहीं मिलते थे. फिल्मों में तो पहले से ही कम लेखक थे, क्योंकि फिल्में बनती कम हैं. पर वेब सिरीज के लिए कई लेखक काम करते हैं. हर महीने 50-100 वेब सिरीज बन रही हैं. टेक्नीशियंस के लिए भी बड़ा काम आ गया है. 30 से ज्यादा प्लेटफार्म हैं जहां काम और पैसे हैं.''

नेटफ्लिक्स और अमेजॉन सरीखे बड़े खिलाडिय़ों से इतर प्लेटफार्म दर्शकों को बनाए रखने के लिए वेब सिरीज के साथ फिल्मों और गानों से भी मनोरंजन करते रहते हैं. ओटीटी प्लेटफार्म पर भी अब फिल्में पहले रिलीज होने लगी हैं और सैटेलाइट चैनलों पर बाद में. अल्ट्रा मीडिया ऐंड एंटरटेनमेंट ग्रुप के पास सैकड़ों फिल्मों के राइट्स हैं. इसके सीईओ सुशील कुमार अग्रवाल के मुताबिक उनकी कंपनी ने नेटफ्लिक्स, अमेजोन प्राइम और हॉट स्टार जैसे ओटीटी पर अंदाज अपना अपना, तेजाब, दामिनी, राजाबाबू, आंखें और गुरुदत्त की क्लासिक फिल्मों के अलावा मालगुडी डेज, शक्तिमान जैसे सीरियल और आइएम कलाम जैसी बाल फिल्म भी दी है.

इसके अलावा यूट्यूब और ओटीटी पर 1,000 से ज्यादा टाइटल्स हैं. वेब सिरीज का बाजार देखते हुए अल्ट्रा अब वेब सिरीज बनाकर ओटीटी पर बेचने वाली है. इस साल कंपनी की पहली वेब सिरीज किसी ओटीटी पर ही आएगी. इंडस्ट्री के सूत्रों के मुताबिक पहले साल में नेटफ्लिक्स का शुद्ध मुनाफा 20 लाख रु. रहा. इसे बड़ी उपल्बधि के रूप में देखा जा रहा है. अब तो प्रकाश झा जैसे बड़े फिल्मकार ने भी वेब सिरीज बनाने का फैसला किया है. वे कहते हैं, वेब सिरीज दर्शकों की मांग है और फिल्मकार के नाते उनके लिए वेब सिरीज बनाना उनका फर्ज है. यहां अपनी बात रखने की आजादी है.

वेब सिरीज के धंधे में कमाई के दो रास्ते हैं: एक तो ब्रांड और दूसरा सब्सक्रिप्शन. आजकल ब्रांड बहुत हैं और वो अपने बाजार के लिए जागरूक भी हैं. टीवी होने के बावजूद ब्रांड प्रोमोशन के लिए वेब सिरीज का सहारा लिया जाता है. दूसरे, दर्शकों से भी अब पैसे मिलने लगे हैं. कई ओटीटी तो अभी भी दर्शकों से पैसे नहीं लेते पर कुछ सब्स्क्रिप्शन के रूप में पैसे लेते हैं. रेट कम होने से दर्शक भी पैसे देने से नहीं हिचकते. मोबाइल उपभोक्ता करोड़ों में होने से कम पैसे लेने पर भी ओटीटी को करोड़ों रु. मिल सकते हैं. न भी लिये तो ब्रांड से तो अच्छे पैसे मिलते ही हैं. करण बताते हैं, ''टीवी को विज्ञापन से कमाई होती है लेकिन अमेजॉन का सब्सक्रिप्शन बेस है. इसका पैकेज लेकर आप सुविधानुसार कुछ भी देख सकते हैं.''

वेब सिरीज के भारतीय बाजार में नेटफ्लिक्स, अमेजोन और हॉट स्टार के बीच कड़ा मुकाबला है. अगले पांच साल में 5 अरब डॉलर से ज्यादा की कमाई की बात कही जा रही है. भाषायी विस्तार भी एक पहलू है, तभी कन्नड़, तमिल, तेलुगू, मराठी, बंगाली और भोजपुरी लेखक बुलाए जा रहे हैं ताकि क्षेत्रीय बाजार पर कब्जा किया जा सके. अल्ट बालाजी ने तो भोजपुरी में कदम भी रख दिया है. निरहुआ की हीरो वर्दीवाला से भोजपुरिया लोगों की प्यास बुझाई जाएगी. अल्ट की आने वाली सिरीज में पंचबीट, कहने को हमसफर हैं-2, कारटेल, बारिश, कोल्ड लस्सी और चिकेन मसाला हैं. पिछले साल की सिरीज में अपहरण, ब्रोकेन बट ब्यूटीफुल, द ग्रेट इंडियन डिस्फंक्शनल फैमिली, होम थीं. टीवीएफ की पिछले साल की हिट सिरीज कॉलेज रोमांस, ये मेरी फैमिली, फ्लैम्स/पढ़ाई और प्यार, इंजीनियर गल्र्स वगैरह थीं.

नेटफ्लिक्स ने भारतीय दर्शकों के लिए 11 ओरिजनल सिरीज का ऐलान किया है, जिनमें बार्ड ऑफ ब्लड, बाहुबली-बिफोर द बिगनिंग, लैला आदि हैं. पिछले साल सैक्रेड गेम्स, घोउल, सेलेक्शन डे, लव पर स्क्रवायर फुट, लस्ट स्टोरीज वगैरह खासी चर्चा में रहीं. गैंगस्टर ड्रामा वाला दूसरा शो मिर्जापुर था. अमेजॉन ओरिजनल पर आने वाली सिरीज में फोर मोर शॉट्स प्लीज, मेड इन हेवेन, जेस्टिनेशन अननॉन वगैरह हैं. इनसाइड एज और मिर्जापुर के नए सीजन से भी दर्शकों का मनोरंजन करने की तैयारी है. इसमें सेंसरशिप का झंझट न होने और बेहतर कमाई होने से अब सिनेमा की दुनिया छोटी हो सकती है. पर जानकार कहते हैं कमाई पर सरकार की नजर है, बिग बॉस इज वाचिंग.

''सेक्स और हिंसा हमेशा से सिनेप्रेमियों को आकर्षित करते रहे हैं. लेकिन मैं अपनी वेब सिरीज में इन्हें जगह नहीं दूंगा. युवाओं के जीवन में और भी कई बातें हैं.''

अदीब रईस,

वेब सिरीज क्रिएटर

''हमारी कंपनी ने नेटफ्लिक्स, अमेजॉन प्राइम और हॉट

स्टार जैसे ओटीटी को कई क्लासिक फिल्में और टीवी सीरियल दिए हैं.''

सुशील कुमार अग्रवाल,

सीईओ, अल्ट्रा मीडिया ऐंड एंटरटेनमेंट

''जो सिनेमा में नहीं कर पाया, वह यहां करूंगा. कश्मीर पर वेब सीरीज तैयार कर रहा हूं, जिसमें आतंकवाद के बढ़ते कारणों को उजागर

किया गया है.''

करण अंशुमान,

क्रिएटर, मिर्जापुर सिरीज

''मेरे पास 50 लेखकों की टीम है, जिसमें यूपी, बिहार और साउथ के भी हैं. सिनेमा में इन्हें मौका नहीं मिला. इनकी अच्छी कहानियां हमारे काम आ रही हैं.''

समीर सक्सेना,

वेब सिरीज क्रिएटर

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