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सिनेमा-लाइट्स कैमरा, जंग!

सैनिकों के शौर्य और बलिदान का बखान करने वाली पटकथाओं की अचानक बाढ़ को मुख्य रूप से उड़ी: दि सर्जिकल स्ट्राइक को मिली भारी सफलता से जोड़ कर देखा जा सकता है

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aajtak.in
सुहानी सिंह मुंबई, 21 October 2019
सिनेमा-लाइट्स कैमरा, जंग! फिल्म सैम में सैम मानेकशॉ के किरदार में विक्की कौशल

बहुत से दूसरे लोगों की ही तरह फिल्म निर्माता अभिषेक दुधैया के बचपन का बड़ा हिस्सा दादी से किस्से सुनते बीता था. उनके मामले में बस इतना अंतर था कि उन कहानियों में से एक ऐसी थी जो सच थी और उसमें उनकी दादी लक्ष्मी भी शामिल थीं. लक्ष्मी गुजरात के माधपार की उन 300 निडर महिलाओं में से एक थीं, जिन्होंने शिद्दत से चल रहे भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान 8 दिसंबर, 1971 को रात भर की मेहनत से भारतीय वायु सेना (आइएएफ) के लिए भुज में एक रनवे बनाया था.

यह कहानी अभिषेक के मन में बनी रही. दुधैया कहते हैं कि इस कहानी का सौंदर्य यही है कि एक सफल प्रयास के लिए नागरिक और वायु सेना एक साथ कैसे आए. अभिषेक भुज: प्राइड ऑफ इंडिया का निर्देशन कर रहे हैं जिसमें अजय देवगन प्रभारी आइएएफ कमांडर विजय कार्णिक की भूमिका निभा रहे हैं. फिल्म के अगस्त 2020 में रिलीज होने की उम्मीद है.

भुज सुरक्षा बलों से जुड़े स्त्री-पुरुषों के जीवन पर बन रही कई फिल्मों में से एक है. मेघना गुलजार सैम नाम से सैम मानेकशॉ की बायोपिक बना रही हैं, जिसमें विक्की कौशल भारत के पहले फील्ड मार्शल की भूमिका में हैं; गुंजन सक्सेना: दि करगिल गर्ल में जान्हवी कपूर युद्ध में सक्रिय भागीदारी करने वाली पहली भारतीय फ्लाइट लेफ्टिनेंट की भूमिका निभा रही हैं; शेरशाह में सिद्धार्थ मल्होत्रा करगिल जंग में अपने जूनियर को बचाने के लिए कुर्बानी देने वाले कैप्टन विक्रम बत्रा की भूमिका निभा रहे हैं; और, बालाकोट हमले पर विवेक ओबेरॉय को लेकर फिल्म बन रही है जिसका नाम अभी तय नहीं हुआ है.

दो वेब सिरीज भी हैं—एक 26 नवंबर, 2008 को मुंबई पर आतंकवादी हमले पर और दूसरी उड़ी हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक पर. और, इनसे पहले राष्ट्रगौरव को विषय-वस्तु बनाने वाली कम से कम दो अन्य फिल्में इस वर्ष सामने आ चुकी हैं. मार्च में अक्षय कुमार की केसरी जिसके आधे से ज्यादा हिस्से में वे 20 सिख सैनिकों की अपनी रेजिमेंट को अपनी गढ़ी पर हमला करने वाले अफगानों से आखिरी सांस तक लडऩे के लिए प्रेरित करने को चीखते रहते हैं. यह फिल्म मिशन मंगल के आने तक इस साल अक्षय कुमार की सबसे बड़ी हिट थी.

सैनिकों के शौर्य का जश्न मनाने वाली पटकथाओं में अचानक बढ़ोतरी के पीछे उड़ी: दि सॢजकल स्ट्राइक की सफलता है. घरेलू बाजार से 244 करोड़ रुपए के संग्रह और लगभग चार महीने तक थिएटरों में बने रह कर इस फिल्म ने निर्माताओं को आश्वस्त किया कि सशस्त्र बलों के बारे में फिल्मों को लेकर लोगों में जोश है. अप्लॉज एंटरटेनमेंट के समीर नायर कहते हैं, ''सेना, राष्ट्रीय सुरक्षा, राष्ट्रीय भावना तथा गौरव जैसे विषयों में लोगों की बहुत रुचि है.''

अप्लॉज की आगामी फिल्मों में से एक है अवरोध—द सीज. नायर का वादा है कि पत्रकारद्वय राहुल सिंह और शिव अरूर की बेस्टसेलर इंडिया'ज मोस्ट फीयरलेस के एक अध्याय पर आधारित इस फिल्म के माध्यम से वह 'सर्जिकल स्ट्राइक' के बारे में कई राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाली फिल्म उड़ी की तुलना में अधिक स्पष्ट और निश्चित जानकारी देंगे. (अरूर इंडिया टुडे टीवी पर ऐंकर-एडिटर हैं.) नायर कहते हैं, ''इस कहानी में कई (अब तक अनसुने) पहलू हैं, जैसे तैयारी, हमला, मीडिया का अंतर्प्रवाह और राजनीति.''  फिल्म की शूटिंग जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती गांव भदरवाह में हुई है और इसके कलाकारों में अमित साध, विक्रम गोखले और नीरज कबी शामिल हैं. अपनी फिल्म की सफलता के प्रति नायर को इतना विश्वास है कि उन्होंने अरूर और राहुल सिंह की इस किताब की अगली कड़ी, इंडियाज मोस्ट फियरलेस 2 के भी कई अध्यायों के अधिकार खरीद लिए हैं.

एक अन्य स्टुडियो-कॉण्टिलो प्रोडक्शंस, ने भी एक किताब— 2008 के मुंबई हमलों और उसके बाद की विद्रोह-रोधी कार्रवाइयों के बारे में पत्रकार संदीप उन्नीथन की पुस्तक ब्लैक टॉर्नेडो—को एक वेब शृंखला में रूपांतरित किया है. (उन्नीथन इंडिया टुडे पत्रिका के कार्यकारी संपादक हैं.) ''कॉण्टिलो के संस्थापक और मुख्य अधिशासी अभिमन्यु सिंह कहते हैं कि यह पुस्तक पाठकों को इस विषय पर जैसी संपूर्ण जानकारी देती है, वह वास्तव में 26/11 घटनाक्रम पर सामने आई किसी भी अन्य रचना से नहीं मिलती.

मुझे नहीं लगता कि किसी अन्य रचना ने इस बारे में मास्टरमाइंड हाफिज सईद और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड कमांडो की कहानियां बताई हैं.'' स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म का लंबा प्रारूप भी अभिमन्यु को ऐसी कहानियां लेने में सक्षम बनाता है जो टीवी पर बहुत कम देखने को मिलती हैं. वे इसमें कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं कि जी 5 पर उपलब्ध होने जा रहा उनका शो बहुत से दर्शकों को आकर्षित कर सके.

पुस्तक को वेब शृंखला में ढालने के लिए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा—लॉस एंजेलिस के लेखक जोशुआ काल्डवेल—की सेवाएं ली हैं जबकि निर्देशक मैथ्यू स्टीवन ल्यूटवाइलर एक घंटे लंबे आठ एपिसोडों के प्रभारी होंगे.

दरअसल, निर्माता अब असल जिंदगी के नायकों को दर्शकों तक पहुंचाने के महत्व का एहसास कर रहे हैं. सेना के लोग—जैसे हाल ही में सेवानिवृत्त हुए एयर चीफ मार्शल बी.एस. धनोआ—भी युद्ध से जुड़े विषयों पर फिल्मों को लेकर बॉलीवुड के मौजूदा रुझान से खुश हैं. धनोआ कहते हैं, ''मैं बहुत खुश हूं कि भारतीय फिल्म उद्योग ने मानवीय प्रयासों पर फिल्में करना शुरू किया है.'' पहले उनका प्रयास ज्यादातर 'लड़की मिल गई' तक सीमित रहता था. आज वे जिन लड़कियों की बात कर रहे हैं, वे योद्धाओं की श्रेणी में शामिल हैं.

धर्मा प्रोडक्शंस की 2020 में रिलीज होने वाली दो बायोपिक में से पहली गुंजन सक्सेना वायु सेना की उस चीता हेलिकॉप्टर पायलट की कहानी है जिसने करगिल में पाकिस्तानी सेना की लगातार गोलीबारी के बीच उड़ान भरी थी. धनोआ बताते हैं ''वे और उसके साथी चालक हमारे गिराए बमों का स्थान चिन्हित करने और मुख्यालय को यह सूचित करने के जिम्मेदार थे कि क्या वे निशाने पर गिरे थे.'' वे यह भी बताते हैं, ''बम से हुई क्षति का आकलन बहुत महत्वपूर्ण होता है—अगर ये लक्ष्य पर नहीं गिरे हैं तो आपको एक और बार हमला करना होता है.'' सेवानिवृत्त हो चुकीं सक्सेना घायल सैनिकों के बचाव सहित अपनी सेवाओं के लिए शौर्य चक्र पाने वाली पहली महिला अधिकारी थीं.

इसी फिल्म के साथ निर्देशकीय पारी शुरू कर रही फिल्म की लेखक जोड़ी निखिल मेहरोत्रा और शरत शर्मा ने इसमें गुंजन सक्सेना के परिवार पर भी ध्यान केंद्रित किया है. पंकज त्रिपाठी ने बेटी को प्रोत्साहित करने वाले पिता की भूमिका निभाई है तो अंगद बेदी करगिल युद्ध में सक्रिय रहे सैन्य अधिकारी के भाई के किरदार में हैं. सुपरहिट फिल्मों दंगल, छिछोरे और हाल ही में कंगना रनौत की आगामी फिल्म पंगा का लेखन करने वाले मेहरोत्रा का कहना है कि कि यह उड़ी की तरह नहीं है, जिसमें आप शुरू से ही जानते हैं कि यह युद्ध पर केंद्रित फिल्म है. ''यह वास्तविक जीवन के हिस्से जैसी फिल्म है जो संबंधों से निकलती है और धीरे-धीरे आगे बढ़ती है.''

युद्ध फिल्मों के शौकीन संग्रहकर्ता धनोआ के मुताबिक, यह जरूरी है कि फिल्म की कथा युद्ध के मैदान से आगे जाए. वे कहते हैं, ''बहुत सारी विधवाएं हैं जिन्होंने प्रशिक्षण या युद्ध के दौरान हुई क्षतियों के बावजूद बच्चों को वायु सेना में भेजा है. बहादुरी बस इस बात में नहीं है कि कोई बंदूक का घोड़ा दबा दे.'' कुछ लोगों के लिए, यह देशभक्ति की भावनाएं दिखाने का अवसर भी है. विवेक ओबेरॉय ने फिल्म की घोषणा करने के बाद एक बयान में कहा, ''एक भारतीय के रूप में सशस्त्र बलों की क्षमताओं को लोगों के सामने लाना मेरा कर्तव्य है. इस बारे में जो भी अटकलें हैं, यह फिल्म उन पर विराम लगा देगी.'' ऐसा करने के लिए, फिल्म निर्माताओं को स्क्रिप्ट और तकनीकी विवरण के बारे में सेना और इस कहानी में शामिल लोगों से मंजूरी हासिल करने की जरूरत होगी. दुधैया बताते हैं कि उन्होंने भुज में लोगों से जुड़ी कहानियों का उपयोग करने के लिए लगभग 450 लोगों से मंजूरी ली थी.

दुधैया कहते हैं, ''अगर लोग बलिदान देने के लिए तैयार नहीं हैं, तो कोई भी सभ्यता जीवित नहीं रह सकती.'' इस फिल्म में संजय दत्त ने सेना का मार्गदर्शन करने वाले रणछोड़दास पागी की भूमिका निभाई है. यह बताती है कि अच्छी तरह से बनाई गई युद्ध फिल्म का मतलब केवल जीत, सीना ठोकना और दुस्साहस दिखाना नहीं होता. महत्वपूर्ण बात है—संघर्ष की इनसानी कीमत.

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