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सूत्रधार और रणनीतिकार- चुनावी रणनीति के माहिर खिलाड़ी और कर्णधार

निर्णायक, लक्ष्य पर नजर गड़ाए और विरोधियों को साधने का कौशल, ये हर चुनावी दांव-पेच में महारत रखते हैं. जानिए राजनैतिक दलों के सूत्रधारों और कर्णधारों के बारे में...

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कौशिक डेका और उदय माहूरकर 07 March 2019
सूत्रधार और रणनीतिकार- चुनावी रणनीति के माहिर खिलाड़ी और कर्णधार इलेस्ट्रेशन-सिद्धांत जुमड़े

दिसंबर 2016 की एक सुबह, समाजवादी पार्टी (सपा) की सांसद और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी, डिंपल यादव को रायबरेली से कांग्रेस विधायक अदिति सिंह का फोन आया. अदिति ने अपनी दोस्त डिंपल से अनुरोध किया—प्रियंका गांधी वाड्रा आपसे मिलना चाहती हैं. डिंपल ने खुशी-खुशी प्रियंका को न केवल अखिलेश बल्कि सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव से भी मिलवाया. एक महीने बाद सपा और कांग्रेस ने 2017 के विधानसभा चुनाव के लिए अपने गठबंधन की घोषणा की—एक ऐसा सौदा जो मुख्य रूप से प्रियंका और डिंपल के प्रयासों से आकार ले सका.

अब आपको 2019 के लोकसभा चुनावों की ओर लिए चलते हैं.

हालांकि कांग्रेस की अनदेखी करते हुए सपा ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के साथ आधिकारिक तौर पर गठबंधन कर लिया है फिर भी डिंपल और प्रियंका, जो अब पूर्वी यूपी की प्रभारी कांग्रेस महासचिव हैं, इस महीने की शुरुआत में लखनऊ में फिर से मिलीं. दोनों अपने-अपने दलों को संभावित चुनावी नुक्सान कम से कम करने के लिए एक दूसरे के साथ रणनीतिक तैयारी और आपसी समझौते पर काम कर रही हैं.

हालांकि लोकसभा चुनावों में महज चंद हफ्तों का समय ही बाकी है, भारतीय राजनीति के इन सूत्रधारों और कर्णधारों के पास सांस लेने की भी फुर्सत नहीं है. उन्हें रणनीति बनाने के लिए ओवरटाइम काम करना पड़ रहा है, जनता का मिजाज भांपना है, उनके केंद्रीय नेतृत्व को महत्वपूर्ण डेटा व सूचनाएं भेजनी हैं और 'करो या मरो' जैसी सीटों के लिए लड़ाई को धार देनी है. वे अपनी-अपनी पार्टियों या धुर समर्थकों या खामोशी के साथ नेपथ्य में रहकर काम करने वाली चुनावी फौज के बीच सबसे अधिक खोजे जाने वाले चेहरे हो सकते हैं. लेकिन उन सभी में कुछ समानताएं भी हैं. वे सभी बड़ी बाधाओं के बीच रास्ते बनाते हुए हर दल के साथ संबंध साधने की कुव्वत रखने वाले, कड़ी सौदेबाजी के बीच आगे बढ़कर प्रयास करते हुए अपने दल के लिए भी फायदे के मौके बनाने का माद्दा रखने वाले और लक्ष्य को पूरा करने के लिए पारंपरिक रास्ते को छोड़कर कोई नया रास्ता अपनाने का साहस दिखाने वाले लोग हैं.

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावेडकर भाजपा के लिए एक ऐसे ही भरोसेमंद सेनापति हैं.

हालांकि शिवसेना और भाजपा के बीच तालमेल की घोषणा के दौरान मुख्य चेहरों के तौर पर पार्टी अध्यक्ष अमित शाह, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडऩवीस और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ही सामने नजर आए हैं, लेकिन वे जावडेकर ही थे जिन्होंने परदे के पीछे से सारा काम किया और गठबंधन को अंजाम तक पहुंचाया.

उन्हें शिवसेना के साथ भाजपा का वार्ताकार नियुक्त किया गया क्योंकि उनके पास दिवंगत भाजपा नेता प्रमोद महाजन के दाहिने हाथ के रूप में कार्य के अपने दिनों से ही शिवसेना नेताओं से बातचीत का पुराना अनुभव था.

जावडेकर ने फडऩवीस के वार्ता में शामिल होने से तीन महीने पहले, ठाकरे और महाराष्ट्र में शिवसेना के एक वरिष्ठ मंत्री सुभाष देसाई के साथ पांच बैठकें कीं. मीडिया की निगाह से बचने के लिए जावडेकर एक निजी वाहन से ठाकरे के मुंबई स्थित घर मातोश्री गए.

ठाकरे की एक मुख्य शिकायत यह थी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह तक उनकी पहुंच आसान नहीं रह गई है.

शिवसेना नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया था कि वह गठबंधन की बात भाजपा के राज्य नेतृत्व के साथ नहीं करेगा तो फडऩवीस ने पिछले साल जून में शाह को इस बात के लिए मनाया कि वे ठाकरे से उनके मुंबई स्थित घर पर जाकर मिलें.

शाह को समझ में आ गया कि ठाकरे 48 वर्षीय फडऩवीस के साथ बातचीत की बजाए भाजपा के किसी वरिष्ठ नेता के साथ ही बातचीत जारी रख सकते हैं तो उन्होंने जावडेकर को काम पर लगाया. भाजपा के एक नेता कहते हैं, ''जावडेकर खुद को बहुत लो प्रोफाइल रखते हैं. शिवसेना के नेताओं के साथ उनका पुराना मेल-जोल रहा है. साथ ही, वे सहज स्वभाव के व्यक्ति हैं जो दूसरे की बात भी सुनते-समझते हैं. यह सब काम आया.''

हालांकि, जावडेकर की बड़ी चुनौती कर्नाटक में भाजपा की बढ़त को अधिकतम करना है, जहां पार्टी पिछले साल सबसे बड़े दल के रूप में उभरने के बावजूद सरकार बनाने में विफल रही. भाजपा कतई नहीं चाहेगी कि कर्नाटक में कांग्रेस और जनता दल (सेकुलर) के बीच चुनाव पूर्व गठबंधन हो, क्योंकि इससे भाजपा को नुक्सान हो सकता है. भाजपा ने 2014 के लोकसभा चुनावों की प्रदेश में 17 सीटें जीती थीं. कर्नाटक में पार्टी के चुनाव प्रभारी के रूप में जावडेकर की चुनौती जद (एस) के संरक्षक एच.डी. देवेगौड़ा और मुख्यमंत्री  एच.डी. कुमारस्वामी का भरोसा जीतने की होगी.

हालांकि भाजपा ने दक्षिण में कुछ अदृश्य सेंध भी लगाई है. पार्टी के राष्ट्रीय सचिव राम माधव ने आंध्र प्रदेश में वाइएसआर कांग्रेस (वाइएसआरसी) प्रमुख जगनमोहन रेड्डी और तेलंगाना में तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) प्रमुख के. चंद्रशेखर राव से संवाद के चैनल खोले हैं. भाजपा दोनों राज्यों में छोटी खिलाड़ी है. रेड्डी और राव ने स्पष्ट रूप से किसी भी चुनाव पूर्व गठबंधन के लिए मना नहीं किया है लेकिन ऐसा माना जाता है कि भाजपा को लोकसभा चुनाव के बाद बहुमत से पीछे रह जाने पर दोनों दलों से उनके समर्थन का आश्वासन लगभग मिल गया है.

कुछ परिस्थितिजन्य घटनाक्रमों ने भाजपा की मदद की. चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर, जिन्होंने 2014 में मोदी की लोकसभा चुनाव की रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और बाद में अलग हो गए और फिर जनता दल (यूनाइटेड) में शामिल होकर एक तरह से उसके नंबर-2 बन गए, की भी भूमिका रही है. किशोर का संगठन इंडियन पॉलिटिकल ऐक्शन कमेटी या आइ-पैक ही पिछले तीन वर्षों से वाइएसआरसी की चुनावी रणनीति तैयार कर रहा है और हाल ही में शिवसेना ने भी उसे ही चुना था.

यह माना जाता है कि 5 फरवरी को ठाकरे के साथ किशोर की बैठक ने भाजपा-शिवसेना गठबंधन में भी बड़ी भूमिका निभाई थी. ठाकरे के बेटे आदित्य ने मुलाकात करवाई और किशोर ने पिता-पुत्र की जोड़ी को समझाया कि कैसे दोनों दलों के बीच गठबंधन का गणित फायदेमंद रहेगा.

तमिलनाडु में अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कडग़म (अन्नाद्रमुक) को चुनाव पूर्व गठबंधन के लिए भाजपा की झोली में लाने वाले रेल मंत्री पीयूष गोयल हैं. राज्य में पार्टी के चुनाव प्रभारी के रूप में गोयल के सामने शुरुआत में कई बड़ी बाधाएं आईं. अन्नाद्रमुक नेताओं के साथ उनका कोई पुराना समीकरण नहीं था. भाषा भी एक बड़ी बाधा थी.

केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पोन राधाकृष्णन ने भाषाई अवरोध को दूर करने में गोयल की मदद की. दोनों ने मिलकर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री  ई.के. पलानीस्वामी और उनके डिप्टी ओ. पन्नीरसेल्वम को समझाया कि 2021 में तमिलनाडु की सत्ता में अन्नाद्रमुक की वापसी के लिए आवश्यक चुनाव-पूर्व लोक-लुभावन घोषणाओं के लिए केंद्र सरकार बजटीय आवंटन के जरिए पूरा सहयोग करेगी.

सके अलावा, उन्होंने यह भी समझाया कि कांग्रेस-द्रमुक द्रविड़ मुनेत्र कडग़म (द्रमुक) गठबंधन मजबूत हो गया है और अगर केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार बनती है तो उसमें अन्नाद्रमुक के लिए कोई जगह नहीं होगी. गोयल ने महागठबंधन में पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) और देसिया मुरपोक्कु द्रविड़ कझगम (डीएमडीके) को भी शामिल कराके इस सौदे को और दमदार बना दिया है. इन दोनों दलों के आने से उत्तरी तमिलनाडु और पश्चिमी व दक्षिणी जिलों के कुछ हिस्सों में गठबंधन की संभावनाओं को और मजबूती मिलने की उम्मीद है.

हालांकि सबसे महत्वपूर्ण राज्य यूपी (80 लोकसभा सीटें) और पश्चिम बंगाल (42 सीटें) में भाजपा के सामने कई चिंताएं हैं. यूपी में सपा-बसपा गठबंधन, पिछड़ी जातियों और दलित वोट के साथ और कांग्रेस के उच्च जाति के मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने के कारण भाजपा को 2014 के मुकाबले इस बार भारी नुक्सान की आशंका है. 2014 में भाजपा ने 71 सीटें जीती थीं. यहां पार्टी के प्रमुख व्यक्ति संगठन सचिव सुनील बंसल हैं, जो जिताऊ उम्मीदवारों के चयन के लिए प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र की मैपिंग में व्यस्त हैं. पिछले दरवाजे की बातचीत भी जारी है. केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली बसपा में दूसरे नंबर की हैसियत रखने वाले सतीश मिश्र के साथ संपर्क में बने हुए हैं. इस बात की कोशिशें चल रही हैं कि मिश्रा मायावती को गठबंधन से बाहर आने को राजी कर लें. कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि मायावती को अपने खिलाफ 'सीबीआइ जांच के खतरे' का डर था जिसके कारण उन्होंने सपा-बसपा गठबंधन में कांग्रेस को शामिल किए जाने का विरोध किया.

पश्चिम बंगाल में भाजपा को दो मोर्चों तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और कांग्रेस-माकपा गठबंधन से चुनौतियां हैं. शाह ने प्रदेश से 23 लोकसभा सीटों का लक्ष्य रखा है जबकि आंतरिक सर्वेक्षण में भाजपा के लिए ज्यादा से ज्यादा 8-15 सीटों के संकेत मिले हैं. मोदी और शाह के नेतृत्व में एक जोरदार अभियान चलाने के अलावा, भाजपा प्रतिद्वंद्वी दलों के मजबूत उम्मीदवारों को साधने की कोशिश कर रही है. ममता बनर्जी के पूर्व भरोसेमंद सिपहसालार मुकुल रॉय पश्चिम बंगाल में भाजपा के गेम प्लान के एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में उभरे हैं तो केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद प्रधान ने टीएमसी सांसद सौमित्र खान को जनवरी में टीएमसी से झपटकर भाजपा में शामिल करा लिया.

कांग्रेस में अहमद पटेल सचमुच रणनीतियां बनाने में अपनी रात काली कर रहे हैं. कांग्रेस के कोषाध्यक्ष देर रात तक या तो फोन पर अपने काम में जुटे रहते हैं या फिर पार्टी के नेताओं के साथ नई दिल्ली के अपने आवास 23, विलिंगडन क्रीसेंट रोड पर बैठकें करते हैं. कई विपक्षी नेताओं के लिए कांग्रेस में संपर्क के पसंदीदा बिंदु पटेल ही हैं. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की भले ही सोनिया गांधी तक सीधी पहुंच हो, पर वे नियमित रूप से पटेल के संपर्क में रहती हैं. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ बेहतर समीकरण के बावजूद आंध्र प्रदेश के मुख्मंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू पटेल के साथ अधिक सहज हैं.

हालांकि गांधी परिवार के अनुभवी वफादार पटेल को दो संभावित सहयोगियों से निराशा हाथ लगी है. मायावती के साथ बढिय़ा तालमेल बनाए रखने के बावजूद वे हालिया चुनावों में उन्हें कांग्रेस के साथ मिलकर लडऩे के लिए राजी करने में विफल रहे हैं. दिसंबर के विधानसभा चुनाव में मायावती ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में पार्टी के साथ तालमेल से इनकार कर दिया था. लोकसभा चुनावों के लिए उत्तर प्रदेश में सपा के साथ गठबंधन से भी मायावती ने कांग्रेस को बाहर ही रखा है. मायावती का मानना है कि कांग्रेस के वोट बसपा को ट्रांसफर नहीं होते.

पटेल को दूसरी नाकामी मेघालय में मिली जहां वे भाजपा की सहयोगी पार्टी नेशनल पीपल्स पार्टी (एनपीपी) को नहीं मना सके थे. जब मेघालय के मुख्यमंत्री और एनपीपी प्रमुख कॉनराड संगमा ने अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए गैर-मुस्लिम अवैध प्रवासियों को नागरिकता प्रदान करने के प्रावधान वाले नागरिकता संशोधन विधेयक, 2016 को पारित करने के केंद्र के प्रयासों का मुखर विरोध किया, तो पटेल उनके पास पहुंचे. कॉनराड के पिता और पूर्व कांग्रेसी नेता पी.ए. संगमा, पटेल के करीबी थे और उनकी बहन अगाथा संगमा यूपीए सरकार का हिस्सा थीं. फिर भी, कॉनराड ने कांग्रेस के साथ लोकसभा चुनाव पूर्व गठबंधन से इनकार कर दिया.

कॉनराड के इस इनकार के पीछे बड़ा कारण, पूर्वोत्तर के लगभग सभी गैर-कांग्रेसी दलों पर असम के वित्त मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की मजबूत पकड़ को माना जाता है. पटेल के पूर्व वफादार सरमा ने 2015 में कांग्रेस का हाथ छोड़ा और भाजपा में शामिल हो गए. उत्तर-पूर्व के आठ प्रमुख राज्यों में से छह पर भाजपा का दबदबा कायम होने के पीछे उनकी ही प्रमुख भूमिका मानी जाती है. सरमा के लिए इस क्षेत्र के सभी दलों के नेता बस फोन कॉल की दूरी पर हैं. अगर अरुणाचल प्रदेश में कांग्रेस के टेकाम संजॉय सरमा के करीबी दोस्त हैं, तो नागालैंड के मुख्यमंत्री  नीफिउ रियो और रियो के पूर्ववर्ती व प्रतिद्वंद्वी टी.आर. जेलियांग के साथ भी सरमा की गहरी छनती है. भाजपा ने सरमा को पूर्वोत्तर की 25 सीटों में से कम-से-कम 15 सीटें जीतने की जिम्मेदारी सौंपी है.

इन्हीं 25 सीटों की वजह से पटेल, ममता की सलाह पर मार्च में गुवाहाटी में विपक्षी दलों की रैली करने का मंसूबा बना रहे हैं ताकि इस इलाके के संभावित सहयोगी दलों को आकर्षित किया जा सके. एक बड़े कांग्रेसी नेता कहते हैं, ''ममता बनर्जी मानती हैं कि विपक्षी पार्टियों को देश के तमाम हिस्सों में ऐसी रैलियां करनी चाहिए ताकि न सिर्फ माहौल बनाया जा सके बल्कि पसोपेश में पड़ी पार्टियों में भरोसा पैदा किया जा सके.'' पटेल के अलावा इस माथापच्ची के साथ जुड़े कांग्रेस के दूसरे नेता हैं के. राजू, अशोक गहलोत, रणदीप सिंह सुरजेवाला और के.सी. वेणुगोपाल. आंध्र प्रदेश के पूर्व नौकरशाह और अभी राहुल गांधी के दफ्तर के प्रभारी राजू अपने को चकाचैंध से दूर रखते हैं, बावजूद इसके कि वे राहुल को मुद्दों पर अहम जानकारियां मुहैया करवाते हैं. उनकी भूमिका को अक्सर सोनिया गांधी के राजनैतिक सचिव के तौर पर अहमद पटेल की भूमिका की तरह माना जाता है. मगर राजू अपना काम ज्यादा औपचारिक और पारदर्शी तरीके से और पटेल के साथ तालमेल बिठाकर करते हैं. कांग्रेस के एक महासचिव कहते हैं, ''राजू-पटेल के समीकरण ने कांग्रेस में पुराने बनाम नए की चर्चा पर तकरीबन लगाम लगा दी है.''

पटेल के करीबी विश्वासपात्र अशोक गहलोत राहुल के मुख्य राजनैतिक सलाहकार के तौर पर उभरे हैं. गहलोत के रसूख में तब इजाफा हुआ जब गुजरात के प्रभारी महासचिव के तौर पर उन्होंने मोदी और शाह के घरेलू मैदान में भाजपा को तगड़ी टक्कर देने में कांग्रेस की मदद की. कर्नाटक में, जहां भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, गहलोत ने सत्ता छोडऩे वाले मुख्यमंत्री सिद्धरामैया को मुख्यमंत्री  का ओहदा जूनियर पार्टनर जद (एस) को देने की कांग्रेस की पेशकश के लिए राजी करने में अहम भूमिका अदा की थी. साथ ही, कर्नाटक में पटेल के शिष्य डी.के. शिवकुमार ने यह पक्का किया कि कांग्रेस के विधायकों में भाजपा सेंध नहीं लगा पाए. शिवकुमार को उन विधायकों पर नजर रखने का काम सौंपा गया था जो असंतुष्ट थे और भाजपा जिन्हें रिझा रही थी. उन्होंने पिछले साल संसदीय उपचुनावों में भी कर्नाटक में अहम भूमिका अदा की थी और बेल्लारी सीट 14 साल बाद भाजपा के शिकंजे से छुड़ा ली थी. उन्होंने रामनगर विधानसभा सीट के उपचुनाव में, जिसमें दोनों पार्टियों के बीच चुनाव पूर्व गठबंधन था, कांग्रेस के वोट जद (एस) के उम्मीदवार को मिलना भी पक्का किया था. शिवकुमार को लोकसभा के मुकाबले के लिए भी कांग्रेस-जद (एस) के बीच गठबंधन कायम कर पाने का भरोसा है. उन्होंने इंडिया टुडे से कहा, ''यह गठबंधन कामयाब होगा और हम कम से कम 20-22 सीटें जीतेंगे.''

कांग्रेस में पार्टी के कम्युनिकेशन प्रभारी सुरजेवाला के रसूख की थाह इस बात से ली जा सकती है कि उन्होंने पार्टी को विभिन्न मुद्दों पर अक्सर स्वीकृत विमर्श से अलहदा रुख अख्तियार करने के लिए राजी किया है. पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर आत्मघाती हमले के बाद सुरजेवाला ने कुछ ही घंटों के भीतर कश्मीर में मोदी सरकार के सुरक्षा इंतजामों पर सवाल उठाए थे. अगले दिन बड़े नेताओं के कहने पर राहुल ने पार्टी का रुख बदल दिया और ऐलान किया कि इस हमले के खिलाफ सरकार जो भी फैसला लेती है, कांग्रेस उसके साथ खड़ी होगी. मगर एक हफ्ते से भी कम वक्त के भीतर सुरजेवाला ने कश्मीर में सुरक्षा खामियों को लेकर मोदी सरकार को कठघरे में खड़ा करने के लिए राजी कर लिया. जब सरकार ने 26 फरवरी को सुबह तड़के पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में चल रहे आतंकी शिविरों पर भारतीय वायु सेना की बमबारी का ऐलान किया, तब राहुल और सुरजेवाला दोनों ने ट्वीट करके पायलटों को सलाम किया.

मगर जिस नेता ने कांग्रेस के भीतर ऊंची छलांग लगाई है, वह केरल से लोकसभा सांसद के.सी. वेणुगोपाल हैं. वेणुगोपाल को न केवल पार्टी के सर्वोच्च निर्णय लेने वाले निकाय कांग्रेस कार्यसमिति में शामिल किया गया है, बल्कि संगठन का प्रभारी महासचिव भी बनाया गया है, यानी उन्हें वह ओहदा दिया गया है जो हाल ही तक गहलोत के पास था. उन्होंने कर्नाटक में देवेगौड़ा और कुमारस्वामी के साथ अपनी निजी केमिस्ट्री की वजह से कांग्रेस-जद (एस) की सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाई थी. इसने कई मौकों पर कुमारस्वामी के खुलेआम फट पडऩे और कांग्रेस के विधायकों में दलबदल करवाने की भाजपा की कथित कोशिशों के बावजूद गठबंधन को कायम रखने में मदद की है.

दिलचस्प बात यह है कि दिग्विजय सिंह की जगह कर्नाटक के कांग्रेस महासचिव बनाए गए वेणुगोपाल 2017 में गोवा में एआइसीसी के पर्यवेक्षक थे. उस वक्त दिग्विजय सिंह गोवा के प्रभारी महासचिव थे और ये दोनों नेता राज्य में पार्टी के सबसे ज्यादा सीटें जीतने के बावजूद गोवा में कांग्रेस की सरकार बनवाने में नाकाम रहे थे. अब लोकसभा चुनाव की तैयारी में वेणुगोपाल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख शरद पवार और कांग्रेस के महाराष्ट्र प्रमुख अशोक चव्हाण के बीच तालमेल का काम कर रहे हैं. महाराष्ट्र में हालांकि कांग्रेस-एनसीपी के बीच चुनाव पूर्व गठबंधन को अंतिम रूप दिया जा चुका है, फिर भी सीटों के बंटवारे और उम्मीदवारों के चयन को लेकर मतभेद उभरते रहे हैं. पवार के साथ राहुल के रिश्तों में खासी गर्मजोशी की वजह से वेणुगोपाल का काम आसान हो गया है. हालांकि सर्द रिश्तों में गर्मी पैदा करने का काम चव्हाण की उस पहल ने किया था, जिसमें उन्होंने पवार के साथ अतीत के झगड़ों को तिलांजलि देते हुए पिछले साल 12 दिसंबर को उनकी 77वीं सालगिरह पर मुबारकबाद दी थी.

पश्चिम बंगाल में काम करने की पूरी आजादी दिए जाने के बाद कांग्रेस के राज्य प्रमुख सोमेन मित्रा ने माकपा की अगुआई में काम कर रहे वाम मोर्चे के साथ पार्टी के प्रस्तावित गठबंधन के लिए कड़ी मेहनत की है. उन्हें जिस बात से मदद मिली, वह यह कि राहुल माकपा के नेता सीताराम येचुरी की सियासी सलाह को खासी अहमियत देते हैं और यहां तक कि उन्हें 'बॉस' कहकर संबोधित करते हैं. मित्रा और कांग्रेस के दिग्गज नेता अब्दुल मन्नान गठबंधन को आगे ले जाने के लिए सूर्य मिश्रा और राबिन देब सरीखे वाम नेताओं के साथ लगातार संपर्क में हैं. देब वाम मोर्चे की दूसरी पार्टियों—भाकपा, फॉरवर्ड ब्लॉक और आरएसपी—को गठबंधन में लाने की कोशिशें कर रहे हैं, बावजूद इसके कि इन पार्टियों ने इस पर एतराज जाहिर किए हैं. कांग्रेस ने 20 सीटें मांगी हैं जबकि वाम मोर्चा मानता है कि 26 से कम सीटें मोर्चे के भागीदारों को मंजूर नहीं होंगी.

भाजपा और कांग्रेस के उलट क्षेत्रीय पार्टियों के कर्ताधर्ताओं के सामने अक्सर कई तरह की बाध्यताएं होती हैं क्योंकि उनके बॉस पूरा नियंत्रण रखने के आदी होते हैं. इस हद तक कि समूची चुनावी रणनीति और दूसरी पार्टियों के साथ बातचीत की तमाम बड़ी बातें वे खुद तय करते हैं. टीएमसी के डेरेक ओब्रायन और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के मनोज झा जहां पारंपरिक और सोशल मीडिया में अपनी-अपनी पार्टी के चेहरे बनकर उभरे हैं, वहीं वे ज्यादातर अपने नेतृत्व के फरमानों पर अमल करते हैं. दूसरी पार्टियों के शीर्ष नेता तक भी उनकी सीधी पहुंच नहीं होती.

मिसाल के लिए, अगर ओब्रायन को पवार से कोई बात करनी है, तो उन्हें प्रफुल्ल पटेल के मार्फत जाना पड़ता है. अगर उन्हें द्रमुक के एम.के. स्तालिन से बात करनी है, तो उन्हें कनिमोझी से संपर्क करना पड़ता है. एक अपवाद अलबत्ता राजद के संजय यादव हैं. हरियाणा के रहने वाले ये 35 वर्षीय एमबीए नेता दिल्ली में क्रिकेट खेलने के दिनों से ही तेजस्वी यादव के करीबी दोस्त हैं. अब वे राजद में प्रशांत किशोर के बराबर उभरकर आए हैं. निर्वाचन क्षेत्रों का खाका बनाने से लेकर तेजस्वी को बोलचाल के टिप्स देने तक और लालू प्रसाद के ट्विटर अकाउंट को संभालने तक संजय ने राजद की चुनाव रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभाई है. अहम बात यह भी है कि ये वही थे जो 2015 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत का आरक्षण विरोधी बयान लालू के ध्यान में लाए और उन्होंने राजद के बॉस को भाजपा पर आक्रामक ढंग से हमला बोलने की सलाह दी थी.

जहां पार्टियां इन गर्मियों में सबसे बड़ी सियासी लड़ाई के लिए कमर कस रही हैं, वहीं उनके सिपहसालार सही गणित बिठाने के लिए पसीना बहा रहे हैं. यह तो आखिरकार मतदाता ही तय करेंगे कि उनके गणित चुनावी मैदान में सही बैठे या नहीं.

पीयूष गोयल

रेल मंत्री

सौदेबाजी में माहिर

मौजूदा कार्यभारः तमिलनाडु के चुनाव प्रभारी

बुनियादी ताकतः भाजपा के अनौपचारिक कोषाध्यक्ष, वे उद्योगपतियों और व्यापारियों के बीच पार्टी के सेतु का काम करते हैं और अरुण जेटली के निकट सहयोगी के तौर पर शाह और मोदी से सीधा संपर्क रखते हैं.

सौदे के सूत्रधारः तमिलनाडु में लोकसभा की 39 सीटों में से अन्नाद्रमुक को 22, भाजपा को पांच और बाकी पर एनडीए सहयोगियों को देने के लिए मनाया.

सोशल मीडिया की समझः ट्विटर पर पचास लाख फॉलोवर

देवेंद्र फडनवीस, मुख्यमंत्री , महाराष्ट्र

मराठा मैनेजर

मुखिया के वफादारः नरेंद्र मोदी के प्रिय फडऩवीस ने प्रधानमंत्री को कई राजनैतिक सुधार करने के लिए राजी किया है जिनमें शिवसेना के साथ नए सिरे से गठबंधन करना शामिल है.

सौदे के सूत्रधारः शिवसेना के साथ सीटों के बंटवारे को अंतिम रूप देने में प्रमुख भूमिका, पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को पिछले साल मुंबई में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के निवास पर उनसे मिलने के लिए राजी किया, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री  के रूप में शिवसेना नेतृत्व की इच्छाओं को पूरा करते हुए कई प्रशासनिक फैसले लिए.

सोशल मीडिया की समझः ट्विटर पर तीस लाख फॉलोवर हैं. वे खुद ही ट्वीट लिखते और पोस्ट करते हैं.

संवाद में सक्षमः जरूरी समझे जाने वाले संदेशों

का जवाब देते हैं

सुनील बंसल

भाजपा महासचिव (संगठन, यूपी)

लखनऊ का चाणक्य

मौजूदा कार्यभारः उत्तर प्रदेश में जीत सकने वाले उम्मीदवारों की सूची तैयार करना, सपा और बसपा गठबंधन को तोड़ने के लिए दोनों पार्टियों में अपने संपर्कों के साथ काम करना

बुनियादी ताकतः संगठन पर पूरा नियंत्रण, योजना पर तेजी से काम करते हैं

कमजोर बिंदुः उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ संबंध अच्छे नहीं हैं

सोशल मीडिया की समझः ट्विटर पर 6,00,000 फॉलोवर, यूपी में मजबूत सोशल मीडिया टीम बनाई

प्रकाश जावड़ेकर

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री

सहज सौदागर

मौजूदा कार्यभारः राजस्थान और कर्नाटक के चुनाव प्रभारी

सौदे के सूत्रधारः भाजपा और शिवसेना के बीच नए गठबंधन के मुख्य सूत्रधार रहे थे, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के साथ कई बार बातचीत की

हार से बेअसरः राजस्थान में भाजपा सत्ता से बाहर हो गई. कर्नाटक में भाजपा सबसे ज्यादा सीटें पाने के बाद भी सरकार नहीं बना पाई, फिर भी जावड़ेकर पर आंच नहीं आई

सोशल मीडिया पर भागीदारीः ट्विटर पर 15 लाख फॉलोवर हैं, जनता की शिकायतों का अक्सर जवाब देते हैं

क्या आप जानते हैं

जब मोदी ने पहले उन्हें मंत्री बनाया और फिर कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया तो बहुत सारे लोगों को आश्चर्य हुआ. वे दिवंगत प्रमोद महाजन के सहयोगी थे. महाजन चाहते थे कि 2002 के दंगों के कारण मोदी को गुजरात के मुख्यमंत्री पद से हटा दिया जाए

राम माधव

भाजपा के राष्ट्रीय

महासचिव

हेमंत बिस्व सरमा

कैबिनेट मंत्री, असम

नॉर्थ-ईस्ट डेमोक्रेटिक एलायंस के संयोजक

भाजपा नेता हिमंत बिस्व सरमा का उत्तर-पूर्व में प्रभाव और सहयोगी दलों को जोड़े रखना कांग्रेस के लिए चुनौती है

पूर्वोत्तर के पुरोधा

मौजूदा कार्यभारः राम माधव पूर्वोत्तर में पार्टी के प्रभारी हैं तो सरमा जमीन पर काम करते हैं. वे गठबंधन तैयार करते हैं और स्थानीय रणनीति बनाते हैं. एनईडीए के संयोजक के तौर पर सरमा ने नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2016 पर विरोध के बावजूद गैर-कांग्रेसी राजनैतिक पार्टियों को एनडीए के पाले में एकजुट बनाए रखा है. माधव एनपीपी प्रमुख और मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा की मदद से नाराज सहयोगी एजीपी को वापस एनडीए में लाने की कोशिश कर रहे हैं. ये दोनों नेता एनडीए के लिए पूर्वोत्तर की 25 सीटों में से 20 सीटें जीतने की उम्मीद कर रहे हैं.

सभी पार्टियों में दोस्तः सरमा की फोन सूची में पूर्वोत्तर में सक्रिय सभी पार्टी प्रमुखों के नाम हैं, कांग्रेस के सीडब्ल्यू के कुछ सदस्य भी उनमें शामिल हैं.

संवाद में सक्षमः माधव कुछ चुनिंदा लोगों के लिए ही फोन पर उपलब्ध होते हैं, सरमा बड़े नेताओं से लेकर जमीनी कार्यकर्ताओं तक सभी के फोन का जवाब देते हैं और जरूरत पडऩे पर सड़क के किनारे ढाबों पर भी राजनैतिक मुलाकातें कर लेते हैं.

प्रियंका गांधी वाड्रा

कांग्रेस महासचिव

पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी

सुप्रीम सलाहकार

मौजूदा कार्यभारः उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को अधिकतम सीटें जिताना. वे पहले ही सपा प्रमुख अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव से मुलाकात कर चुकी हैं

प्रधान सलाहकारः कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की सबसे प्रमुख सलाहकार, दिसंबर 2018 में कांग्रेस के खाते में जाने वाले तीन राज्यों के मुख्यमंत्रियों के

नाम का फैसला करने में राहुल की मदद की थी. पुलवामा हमले के बाद मोदी सरकार पर निशाना

साधने के लिए कहा

व्यावहारिकः कार्यशैली के मामले में वे राहुल के बिल्कुल विपरीत हैं. स्वतरूस्फूर्त हैं, तुरंत फैसला लेती हैं, प्रक्रिया में विश्वास नहीं रखतीं, लेकिन इस बात का ध्यान रखती हैं कि राहुल की प्रतिद्वंद्वी न दिखाई दें

सोशल मीडिया की समझः ट्विटर पर उनके 2,00,000 फॅलोवर हैं, अभी तक कोई ट्वीट नहीं किया

अहमद पटेल

कांग्रेस के कोषाध्यक्ष

विघ्न विनाशक

मौजूदा कार्यभारः 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए पैसों का इंतजाम करना, संभावित सहयोगी दलों के साथ बातचीत का रास्ता खुला रखना, देश में विभिन्न जगहों पर सभी विपक्षी दलों की कई संभावित रैलियों पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ काम कर रहे हैं

भरोसे के आदमीः वे पार्टी में पुराने नेताओं के साथ-साथ नए नेताओं की भी बात सुनते हैं. दूसरी पार्टियों के नेता जैसे ममता बनर्जी, मायावती, एन. चंद्रबाबू नायडू, एम.के. स्तालिन और फारूक अब्दुल्ला उनसे बात करना पसंद करते हैं

हाथ में कमानः लगभग हर राज्य में उनके वफादार साथी और सहयोगी हैं—मध्य प्रदेश में कमलनाथ, राजस्थान में अशोक गहलोत, महाराष्ट्र में अशोक चव्हाण, कर्नाटक में डी.के. शिवकुमार

सोशल मीडिया की समझः शुरू में हिचक, लेकिन अब ट्विटर पर सक्रिय, उनके 6,00,000 फॉलोवर हैं

भरोसेमंद जोड़ी

के. राजू

राहुल गांधी के कार्यालय

के प्रमुख

वे राहुल गांधी को लगभग सभी विषयों पर सलाह देते हैं, दलितों से जुड़े मुद्दों पर उनकी सलाह अंतिम होती है, अहमद पटेल के साथ तालमेल बनाकर काम करते हैं

अशोक गहलोत

राजस्थान के

मुख्यमंत्री

राहुल उनकी राजनैतिक सलाह को महत्व देते हैं. उदाहरण के लिए के.सी. वेणुगोपाल भले ही कर्नाटक के प्रभारी महासचिव हैं लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरामैया के साथ उनके समीकरण को देखते हुए राज्य में गहलोत की राय बहुत मायने रखती है

नए नायक

रणदीप सिंह सुरजेवाला

कांग्रेस के कम्युनिकेशन प्रभारी

वे प्रमुख मुद्दों पर पार्टी की सार्वजनिक राय तय करते हैं. पुलवामा मुद्दे पर वे पहले दिन से ही मोदी सरकार पर हमलावर होने के पक्षधर रहे, हालांकि राहुल गांधी इसके पक्ष में नहीं थे, बाद में राहुल को अपना मन बदलने के लिए प्रियंका गांधी को भी राजी कर लिया

के.सी. वेणुगोपाल

कांग्रेस महासचिव (संगठन)

राहुल के नए करीबी, एच.डी. देवेगौड़ा, उनके बेटे और मुख्यमंत्री  एच.डी. कुमारस्वामी के साथ बहुत अच्छे समीकरण, कांग्रेस-जद (एस) गठबंधन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका, महाराष्ट्र में एनसीपी के साथ सीटों का बंटवारा कराया, द्रमुक के साथ बातचीत में प्रमुख भूमिका

अन्य

प्रशांत किशोर

उपाध्यक्ष, जनता दल (यू)

सर्विस प्रोवाइडर

मौजूदा जिम्मेदारीः हालांकि वे जद (यू) के नेता हैं, पर उनका संगठन आइ-पैक वाइ.एस. जगमोहन रेड्डी की पार्टी वाइएसआरसी की चुनाव रणनीति का काम भी देख रहा है. शिवसेना ने भी उनकी मदद मांगी है. मोदी और शाह के साथ चुनाव रणनीति पर कई दौर की बातचीत कर चुके हैं; किशोर 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी के प्रमुख रणनीतिकारों में से एक थे

दूसरी पार्टियों में दोस्तः तमाम पार्टियों में दोस्त हैं—कांग्रेस में प्रियंका गांधी और अमरिंदर सिंह से लेकर भारतीय जनता पार्टी में अमित शाह तक और शिवसेना में आदित्य ठाकरे से लेकर राजद में लालू यादव तक

संवाद की खूबीः व्हाट्सऐप पर मौजूद, सामान्य कॉल के बजाए व्हाट्सऐप कॉल को तरजीह देते हैं

क्या आप जानते हैं?: किशोर ने नीतीश कुमार को सलाह दी थी कि वे जीतन राम मांझी से अपनी कुर्सी वापस ले लें

संजय यादव

राजद नेता तेजस्वी यादव के राजनैतिक सलाहकार; समाज और राजनीति विज्ञानी

बेहतर सहयोगी

मौजूदा जिम्मेदारीः पूरे बिहार का दौरा कर रहे हैं ताकि 'राज्य की सियासत की क्षेत्रवार, वृहत स्तर पर चाल-ढाल' समझ सकें और 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए राजद को तैयार कर सकें; गठबंधन के उम्मीदवारों की ताकत और कमजोरियों का आकलन भी कर रहे हैं

पिछला प्रदर्शनः 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव की दौड़ में उन्होंने मोहन भागवत का आरक्षण की समीक्षा करने की मांग करने वाला बयान खोज निकाला था और इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने में राजद के नेताओं की मदद की थी; भागवत के इस इंटरव्यू पर किसी का ध्यान नहीं था

बचाव में आंकड़ेः जब भाजपा ने राजद की पिछली हुकूमत को 'जंगल राज्य कहकर उस पर हमला किया, जिससे राजद के लोग बचाव की मुद्रा में आ गए, तब संजय ने 1961 से लेकर तब तक जीडीपी और अपराध के आंकड़े खोज निकाले और साबित किया कि लालू प्रसाद यादव का कार्यकाल बुरा नहीं था

सतीश चंद्र मिश्र

बसपा के राज्यसभा सदस्य

काम जिसे अंजाम दियाः लोकसभा चुनाव के लिए सपा-बसपा गठबंधन में वे बसपा के मुख्य वार्ताकार थे

इंतजामों की कमानः मायावती के हरेक सार्वजनिक कार्यक्रम से पहले मिश्र भाषण तैयार करते हैं, सुरक्षा की देखरेख करते हैं और तय करते हैं कि मंच पर कौन-कौन बैठेगा

दूसरी पार्टियों में दोस्तः अरुण जेटली के साथ अच्छा मेलजोल है

आज्ञाकारी पत्नी

डिंपल यादव

समाजवादी पार्टी की सांसद और पार्टी मुखिया अखिलेश यादव की पत्नी

मौजूदा जिम्मेदारीः 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और सपा के बीच अनौपचारिक रणनीतिक समझ के लिए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी से समन्वय कर रही हैं

काम जिसे अंजाम दियाः प्रियंका के साथ अपनी मुलाकात के बाद उन्होंने 2017 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश को कांग्रेस के साथ हाथ मिलाने के लिए राजी किया

संवाद की खूबीः कॉमर्स ग्रेजुएट डिंपल धड़ल्ले से अंग्रेजी और हिंदी बोलती हैं, जो सपा के ज्यादातर नेता नहीं कर पाते; पार्टी के स्टार प्रचारकों में से एक हैं

दूसरी पार्टियों में दोस्तः यूपी की महिला कांग्रेस नेताओं—मसलन रामपुर खास की विधायक आराधना मिश्रा और रायबरेली की विधायक अदिति सिंह—के साथ अच्छा मेलजोल है

सोशल मीडिया की समझः ट्विटर पर 2,00,000 फॉलोवर हैं;

अपने ट्वीट खुद करती हैं

राबिन देब

माकपा की सेंट्रल कमेटी के सदस्य

साझा दोस्त

मौजूदा जिम्मेदारीः पश्चिम बंगाल में दोनों पार्टियों के बीच सीटों के बंटवारे पर कांग्रेस के नेताओं के साथ तालमेल का काम कर रहे हैं

मिस्टर विकीपीडियाः तारीखों और घटनाओं का ब्योरा हमेशा तैयार रखते हैं

दूसरी पार्टियों में दोस्तः कांग्रेस, टीएमसी, भाजपा में कई दोस्त हैं

क्या आप जानते थे? पॉकेट ट्रांजिस्टर रेडियो रखते हैं

—साथ में जीमॉन जैकब, किरण डी. तारे, राहुल नरोन्हा, रोमिता दत्ता, आशीष मिश्रा और अमरनाथ के. मेनन

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