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देवयानी की गिरफ्तारी पर क्या भारत कुछ ज्यादा प्रतिक्रिया दिखा रहा है

भारतीय राजनयिक की अमेरिका में हुई गिरफ्तारी पर क्या भारत कुछ ज्यादा प्रतिक्रिया दिखा रहा है? आखिर कौन है पीड़ित नौकरानी या देवयानी?

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aajtak.in
गौरव सी. सावंतनई दिल्ली, 30 December 2013
देवयानी की गिरफ्तारी पर क्या भारत कुछ ज्यादा प्रतिक्रिया दिखा रहा है

बात 13 दिसंबर की है. सर्द हवा चल रही थी. तभी विदेश सचिव सुजाता सिंह ने भारत में अमेरिका की राजदूत नैंसी पॉवेल को साउथ ब्लॉक में मिलने के लिए बुलावा भेजा. दोनों महिलाओं की मुलाकात में गर्मजोशी नजर नहीं आई. विदेश सचिव आगबबूला थीं.

ठीक एक दिन पहले न्यूयॉर्क में भारत की 39 वर्षीया डिप्टी कौंसल जनरल देवयानी खोबरागड़े को उस समय सरेआम हथकड़ी पहना दी गई जब वे अपनी बेटी को स्कूल छोडऩे गई हुई थीं.  

सुजाता सिंह का चेहरा गुस्से से लाल था. खोबरागड़े को छह घंटे तक 'आम अपराधियों और नशेडिय़ों’ के साथ नजरबंद रखने की खबर दिल्ली तक पहुंच चुकी थी. यह बात अपनी रिहाई के बाद खुद देवयानी ने विदेश सेवा के अपने सहकर्मियों को दो पैराग्राफ के ई-मेल में बताई थी.

सुजाता सिंह अभी-अभी अमेरिका से लौटी थीं और अब तक उन्हें अपना दौरा सफल दिख रहा था. विदेश मंत्री जॉन केरी भी विदेश विभाग की बैठक में शामिल हुए थे. लेकिन साफ  नजर आने लगा था कि विदेश विभाग ने शायद पहले ही राजनयिक की गिरफ्तारी को मंजूरी दे रखी होगी, जबकि सुजाता सिंह को कोई जानकारी नहीं दी गई थी.

विदेश सचिव ने पॉवेल को बताया कि अमेरिका ने जो किया उसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. पॉवेल ने वादा किया कि वे इस मामले में और अधिक जानकारी हासिल करने की कोशिश करेंगी. दिल्ली में ठंड बढऩे लगी थी, इधर दोनों देशों के बीच के रिश्तों पर भी बर्फ  जमती दिख रही थी.  

संसद में सभी दलों के सांसदों ने अमेरिका के 'अहंकारी’ और 'कठोर बर्ताव’ की एक सुर में निंदा की. विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने खोबरागड़े की गिरफ्तारी को 'साजिश’ बताया और आश्वासन दिया कि जब तक खोबरागड़े की वापसी नहीं होती, वे सदन में वापस नहीं आएंगे.

राजनयिकों का कहना है कि भारत के 1998 में पोकरण परमाणु परीक्षणों के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में आई गर्मजोशी के लंबे समय बाद इस घटना ने बहुत ज्यादा खटास पैदा कर दी है.

इस मामले पर उमड़ा रोष काफी हद तक दिशा से भटका हुआ नजर आता है. खोबरागड़े मामले में अभियोजक के तौर पर नियुक्त अमेरिकी सरकारी वकील प्रीत भरारा ने लगाए गए आरोपों और गिरफ्तारी के तरीके पर अमेरिका का बचाव किया है. भरारा ने मामले के तथ्यों की ओर ध्यान खींचा है.

न्यूयॉर्क के अधिकारियों ने 12 दिसंबर को खोबरागड़े पर वीजा धोखाधड़ी और गलत बयानी का आरोप लगाया था. उन्होंने नई दिल्ली में अपनी नौकरानी संगीता रिचर्ड के वीजा के लिए नवंबर, 2012 में अमेरिकी दूतावास में पेश हलफनामे में अमेरिकी श्रम कानून के अनुसार उसे 4,500 डॉलर का वेतन देने की हामी भरी  थी. लेकिन आरोप है कि उन्होंने अपनी नौकरानी को बहुत कम रकम दी.

अमेरिकी सरकार रिचर्ड को औपचारिक रूप से मानव तस्करी का शिकार मान रही है. वह फिलहाल अमेरिका में कांटिन्यूड प्रेजेंस के तहत रह रही है जो मानव तस्करी के पीड़ितों को दिया गया अस्थायी इमिग्रेशन स्टेटस है. सेफ होराइजन की स्टाफ अटॉर्नी डाना ससमैन ने इंडिया टुडे को बताया, ''यह एक ऐसे व्यक्ति से जुड़ा मामला है जिसने अमेरिकी फेडरल लॉ तोड़ा, फेडरल सरकार से झूठ बोला और अपनी घरेलू कर्मचारी, अपनी नौकरानी को कम पैसे दिए.

यह ऐसी महिला के बारे में नहीं है जिसके कपड़े उतरवा कर तलाशी ली गई. यह एक ऐसे इंसान के बारे में है जो अब एक अपराधी है. एक ऐसे आपराधिक मामले का प्रतिवादी जिसमें उस पर कथित तौर पर फेडरल कानून का उल्लंघन करने का आरोप लगा है.” सेफ होराइजन न्यूयॉर्क स्थित एजेंसी है जो अपराध और शोषण के शिकार लोगों की मदद करती है.

भरारा जोर देकर कहते हैं कि खोबरागड़े के साथ पूरी शिष्टता बरती गई थी और उन्हें उनके बच्चों के सामने गिरफ्तार नहीं किया या हथकड़ी नहीं लगाई गई, क्योंकि बाहर काफी ठंड थी, इसलिए अधिकारियों ने उन्हें अपनी कार से फोन करने की अनुमति दी और कॉफी और नाश्ते के लिए भी पूछा था.

यह सच है कि हिरासत में लेने के बाद एक महिला मार्शल ने एक निजी सेटिंग में उनकी पूरी तलाशी ली थी, लेकिन भरारा के वक्तव्य के मुताबिक यह सामान्य प्रक्रिया है जिससे हर आरोपी को गुजरना पड़ता है, अमीर हो या गरीब, अमेरिकी हो या गैर-अमेरिकी.
अपने पति के साथ संगीता
(अपने पति के साथ संगीता रिचर्ड)
अमेरिका पर बड़ा आरोप लगाया गया है कि उसने देवयानी की गिरफ्तारी से पहले रिचर्ड के परिवार को वहां बुलाने की साजिश रची थी जिसके जवाब में भरारा कहते हैं, ''परिवार को लाने से जुड़े सवाल पर यहां बेहिसाब अटकलें फैली हुई हैं जो गलत है. थोड़ा ध्यान इस बात पर देना चाहिए कि परिवार को क्यों लाने की जरूरत पड़ी और भारत में उनके लिए क्या कदम उठाए गए. न्याय विभाग इस बात के लिए प्रतिबद्ध है कि जब तक मामला चल रहा है पीडि़तों, गवाहों और उनके परिवारों को पूरी सुरक्षा मिले.”  

भारत अपने कड़े रुख पर बरकरार है, लिहाजा अमेरिका ने नुक्सान की भरपाई के लिए कूटनीतिक कवायद तेज कर दी है. खोबरागड़े की गिरफ्तारी के करीब हफ्ते बाद 18 दिसंबर को जॉन केरी ने राष्ट्रीय सुरह्ना सलाहकार शिवशंकर मेनन के साथ बात की. अमेरिकी विदेश विभाग की प्रवक्ता मैरी हार्फ ने लिखित बयान में कहा, ''देवयानी खोबरागड़े की उम्र के बराबर की दो बेटियों के पिता विदेश मंत्री ने खोबरागड़े की गिरफ्तारी के बाद भारत में बने माहौल के बारे में सुनकर संवेदना जताई.

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मेनन के साथ अपनी बातचीत के दौरान खेद जताया. यही नहीं, उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण सार्वजनिक मामला भारत के साथ हमारे घनिष्ठ और महत्वपूर्ण रिश्ते को आहत न करे.” लेकिन भारतीय अधिकारियों की मांग है कि अमेरिका को माफी मांगनी चाहिए. 

खोबरागड़े की गिरफ्तारी ने 2011 के उस सनसनीखेज मामले की याद ताजा कर दी है जब एक भारतीय नौकरानी ने न्यूयॉर्क में नियुक्त कौंसल जनरल प्रभु दयाल पर बुरे बर्ताव का आरोप लगाते हुए मुकदमा दायर कर दिया था. दयाल को पिछले साल उस नौकरानी के साथ अदालत के बाहर हुए समझौते के बाद मामले से छुटकारा मिला.

एक वरिष्ठ भारतीय राजनयिक के मुताबिक, ''यह एक सोची-समझी योजना होती है और अमेरिका विदेश विभाग की जानकारी में बड़ी चालाकी से पूरी की जाती है और इस मामले में अमेरिका भी अब तक बहुत साफ नजर नहीं आता.” अमेरिका ने फरार नौकरानी के परिवार को खोबरागड़े की गिरफ्तारी से दो दिन पहले बुला लिया था.

दक्षिण एशिया के लिए अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री निशा देसाई बिस्वाल ने कहा कि अमेरिका ने खोबरागड़े के खिलाफ वीजा धोखाधड़ी आरोपों के बारे में भारत को सितंबर में लिखित रूप से आगाह कर दिया था, लेकिन उसका कोई जवाब नहीं आया. सरकारी सूत्र इससे इनकार करते हैं और कहते हैं कि विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी विदेश विभाग और दूतावास के साथ 24 जून से संपर्क साध रखा है.

यह वही समय था जब न्यूयॉर्क में खोबरागड़े के घर में करीब छह माह तक काम करने के बाद नौकरानी गायब हो गई थी. पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने खोबरागड़े की गिरफ्तारी को मंजूरी देने के लिए अमेरिकी विदेश विभाग को दोषी ठहराया है, ''यह सिर्फ  एक आदमी, प्रीत भरारा, की कारगुजारी नहीं है, इस गिरफ्तारी के लिए विदेश विभाग ने मंजूरी दी थी.”

पूर्व राजनयिकों ने जोर देकर कहा है कि भारत का अमेरिकी दूतावास से बैरिकेड हटाना या राजनयिक विशेषाधिकार वापस लेना या कौंसलुर स्टाफ को दी जाने वाली छूट रद्द करना अतिरेकपूर्ण कदम नहीं है. अमेरिका में भारत के पूर्व राजदूत रहे रोनन सेन ने कहा, ''ये सब एकतरफा विशेषाधिकार थे जो एक सामरिक साझीदार को दिए गए थे. अब सारे कदम पारस्परिक आधार पर सख्ती से उठाए जाएंगे.”

भारत ने खोबरागड़े को न्यूयॉर्क के अपने स्थायी संयुक्त राष्ट्र मिशन में नियुक्त कर दिया है जिससे उन्हें पूर्ण राजनयिक आजादी मिल सके. भारत अमेरिका के जवाब का इंतजार कर रहा है और साथ ही एक लंबे पलटवार की तैयारी में है जिसके तहत इस बात पर खास ध्यान दिया जाएगा कि अमेरिकी राजनयिक और दूतावास के अधिकारी सभी भारतीय कानूनों का सही से पालन करें. अब आगे आनी वाली राह आसान नहीं दिख रही.
 (—इंदिरा कन्नन के साथ)

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