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आस्था और परंपरा का विराट संगम

इंडिया टुडे कुंभ राउंड टेबल में इस विराट आयोजन पर विचार मंथन हुआ जो कि धर्मपरायण हिंदुओं के लिए वैचारिक तत्व और भारत की एकता का प्रतीक है.

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अजीत कुमार झा 23 January 2019
आस्था और परंपरा का विराट संगम यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ

लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में कुंभ पर आयोजित इंडिया टुडे की राउंड टेबल 'कॉन्फ्लुएंस ऑफ माइंड्स' का उद्घाटन करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कुंभ ''तीन नदियों—पवित्र गंगा जो भारत की प्राचीन परंपरा और धरोहर को निरूपित करती हैं, यमुना जो आधुनिकता को दर्शाती है और अदृश्य सरस्वती जो बुद्धिमता का उदाहरण है—के संगम का प्रतीक है.'' समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने जिस दिन यहां अपने गठबंधन का औपचारिक ऐलान किया, उसके अगले दिन आदित्यनाथ ने सपा के अंदरूनी मतभेदों का जिक्र छेड़ा और कहा, ''छोटे भाई शिवपाल सिंह यादव ने (पार्टी के पितृपुरुष) मुलायम सिंह यादव को अपनी नई पार्टी (प्रगतिशील समाजवादी पार्टी-लोहिया) से टिकट देने की पेशकश पहले ही कर दी है. बेटे अखिलेश यादव को जनता को यह भी बताना चाहिए कि क्या वे प्रधानमंत्री पद के लिए मुलायम सिंह की उम्मीदवारी का समर्थन करेंगे या फिर बसपा की अध्यक्ष मायावती का समर्थन करेंगे.''

गोरखपुर सीट पर गठबंधन के हाथों भाजपा उम्मीदवार की पराजय पर योगी ने कहा, ''राजनीति में दस कदम आगे और दो कदम पीछे कभी-कभी होता है. इससे पहले नगर निगम के चुनाव हुए थे. 16 सीटों में से 14 में भाजपा और 2 में बसपा जीती थी. समाजवादी पार्टी का पूरा सफाया हो गया था. मैं तो कहता हूं बराबरी का हिस्सेदारी कर मायावती जी ने अखिलेश यादव पर कृपा कर दी है क्योंकि समाजवादी पार्टी के लिए कन्नौज की सीट बचाना भी मुश्किल है.''

यह पूछे जाने पर कि कन्नौज की सीट समाजवादी पार्टी नहीं जीतेगी, यह भरोसा शिवपाल यादव की वजह से है या भाजपा की वजह से, योगी ने कहा, ''नहीं हम भरोसा खुद पर करते हैं, किसी और पर नहीं.''

यूपी सरकार के मंत्री ओमप्रकाश राजभर की मुख्यमंत्री के खिलाफ बयानबाजी और उन पर कोई कार्रवाई न होने पर योगी ने कहा, ''ओमप्रकाश राजभर भाजपा के नहीं हैं, सहयोगी दल के हैं. इसलिए उन्हें इतनी तो छूट देनी होगी कि वे अपनी बात रख सकें. वे अपनी सीमा पर रहकर बयान देते हैं.''

भाजपा के राष्ट्रीय अधिवेशन में मोदी की जगह योगी-योगी के नारे लगने को लेकर भविष्य की संभावनाओं के मुद्दे पर योगी ने कहा, ''नहीं मैं कोई चेहरा नहीं हूं. यह चुनाव मोदी जी के नेतृत्व में लड़ा भी जाएगा और जीता भी जाएगा.'' (देखें इंटरव्यू)

इस बीच इंडिया टुडे की राउंड टेबल में जुटे अध्येताओं ने कुंभ के क्या, कहां, कब और क्यों पर चर्चा की. उन्होंने बताया कि व्युत्पत्ति के लिहाज से कुंभ मूल शब्द 'कुंभक' (अमृत से भरा पवित्र कलश) से आया है.

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आइजीएनसीए) के प्रोफेसर भरत गुप्त ने कुंभ को तीन नदियों के संगम से जोड़ा और कहा कि यह उस बौद्धिक मंथन और बुद्धिमता का प्रतीक है, जो चिरकाल से देश की यात्रा का हिस्सा रहा है. जेएनयू के संस्कृत और भारत अध्ययन विभाग के डॉ. संतोष कुमार शुक्ला ने वेदों के मौलिक प्रमाण का उल्लेख करते हुए बताया कि किस तरह ''देवताओं और दानवों के बीच उस अमृत के कुंभ (पवित्र कलश) को लेकर लड़ाई हुई थी, जिसे समुद्र मंथन से निकला रत्न कहा जाता है.''

इसी विभाग के प्रोफेसर रामनाथ झा ने कहा कि ''कुंभ मेले के मूल स्वरूप का लिखित वर्णन 8वीं सदी के दार्शनिक आदि शंकराचार्य ने किया है, जो मानते थे कि कुंभ चेतना और एकता का सार है जबकि बाहरी दुनिया अपने तमाम रूपों में भी विविधता से भरी नजर आती है.'' इलाहाबाद विश्वविद्यालय के इतिहासकार और कुंभ मेलाः पिल्ग्रिमेज टू द ग्रेटेस्ट कॉस्मिक फेयर के लेखक प्रोफेसर डी.पी. दुबे ने कहा कि ''कुंभ भारतीय सभ्यता का लघु रूप है और भारत की सांस्कृतिक परंपराओं की पूर्णता की नुमाइंदगी करता है. आनुष्ठानिक स्नान की भारतीय अवधारणा की तरह कुंभ अब जल के प्रवाह के समान ही जीवन के प्रवाह को दर्शाता है.''

कुंभ से मिलने वाले 'प्रबंधन के सबक' पर डीजीपी ओ.पी. सिंह ने कहा कि सुरक्षा का एक विशाल स्थापत्य खड़ा किया गया है, जिसमें पैरामिलिटरी रैपिड ऐक्शन फोर्स, प्रोविंशियल आम्र्ड कॉन्स्टेबुलरी (पीएसी), रेडियो कम्युनिकेशन, नेशनल सिक्योरिटी गार्ड के तकरीबन 22,000 पुलिसकर्मियों और 80 कंपनियों के साथ-साथ पर्याप्त आपात अग्निशमन सेवा और (पहली बार) हवाई स्नाइपरों के साथ आतंकवाद-रोधी जत्थे तैनात किए गए हैं, ताकि आगंतुकों को पक्की सुरक्षा मुहैया की जा सके.

भीड़ में भगदड़ सरीखी अप्रिय घटनाओं को रोकने के लिए, जैसा कि 2013 के महाकुंभ के दौरान इलाहाबाद रेलवे स्टेशन पर हुई भगदड़ में हुआ था जिसमें 42 लोगों की जानें गई थीं, पुलिस यह पक्का कर रही है कि हरेक तीर्थयात्री पानी में ज्यादा से ज्यादा महज 45 सेकंड ही रहे, क्योंकि डुबकी लगाने में कमोबेश इतना ही वक्त लगता है.

ओ.पी. सिंह ने कहा कि यातायात की व्यवस्थाएं चाक-चौबंद की गई हैं और एक साथ 6,00,00 वाहनों के लिए पार्किंग का इंतजाम किया गया है. यह पहली बार है जब पार्किंग के इलाके को सैटेलाइट सिटी के तौर पर डिजाइन किया गया है जहां फूड कोर्ट, हेल्थ कियोस्क, सामान के क्लॉक रूम और दूसरी सुविधाएं मौजूद हैं. करोड़ों की तादाद में श्रद्धालुओं की मौजूदगी को देखते हुए अगर कोई हादसा, आपात स्थिति या ट्रैफिक जाम होता है, तो उससे निपटने के लिए 11 से 13 के बीच आपात डायवर्जन मार्गों की योजना बनाई गई है.

ओ.पी. सिंह के मुताबिक, पुलिस को ''महज एक सुरक्षाकर्मी होने के बजाए दोस्त, मददगार और रोल मॉडल के तौर पर'' काम करने के लिए प्रशिक्षित किया गया है.

शहरी विकास विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी और कुंभ मेले के कामों का समन्वय करने वाली नोडल इकाई के मुख्य कर्ताधर्ता मनोज कुमार सिंह ने कहा, ''हम अगले 50 दिनों में 12 से 14 करोड़ लोगों के और पहले ही दिन तकरीबन 2.5 करोड़ लोगों के आने की उम्मीद कर रहे हैं.'' प्रयागराज में जिस जगह कुंभ मेला लगता है, वहां एक नया अस्थायी शहर बना दिया गया है.

कुंभ की छाप कायम करने के लिए दो शब्द 'दिव्य' और 'भव्य' का इस्तेमाल किया गया है. कुंभ के लिए मुकर्रर की गई जगह पहले की बनिस्बत 150 फीसदी ज्यादा हैः 2019 में यह 3,200 हेक्टेयर है, जबकि पहले तकरीबन 2,000 हेक्टेयर होती थी.

2013 के महाकुंभ के बाद प्रोफेसर डायना इक और तरुण खन्ना की अगुआई में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की एक स्टडी टीम अपनी रिपोर्ट में इस नतीजे पर पहुंची थी कि सबसे बड़ी परेशानी अपर्याप्त साफ-सफाई और स्वच्छता को लेकर थी.

मनोज कुमार सिंह ने कहा कि लिहाजा इस बार प्रशासन का पूरा जोर साफ-सफाई पर है और 100 फीसदी नालियों तथा जल निकासी की व्यवस्था और खुले में शौच बिल्कुल न होने देने के पक्के इंतजाम किए गए हैं. कुंभ के कुल 4,300 करोड़ रुपए के बजट में से साफ-सफाई के लिए 150 करोड़ रुपए रखे गए हैं. सैनिटेशन टैंक के साथ तकरीबन 1,22,000 शौचालय बनाए गए हैं और इन्हें पिछली बार के सोक पिट शौचालयों की जगह लाया गया है. शुद्धता बनाए रखने के लिए इस बार टिहरी बांध से तकरीबन 10,000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है जबकि पहले 4,000 क्यूसेक छोड़ा जाता था.

मनोज कुमार सिंह ने कहा, ''प्रदूषण को काबू करने के लिए प्रशासन ने यह पक्का किया है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बिजनौर से लेकर पूर्वी उत्तर प्रदेश के बलिया तक गंगा और यमुना में गिरने वाले तमाम 227 नालों में से हरेक का पानी पूरी तरह शोधित और उपचारित हो. तीर्थयात्रियों और सैलानियों को दूध, पेयजल, खाने-पीने की वस्तुओं सहित तमाम दूसरी जरूरी चीजें मुहैया करवाने के लिए समानांतर सार्वजनिक वितरण प्रणाली बनाई गई है.''

कुंभ को दुनिया भर के सैलानियों की अव्वल मंजिल के तौर पर प्रचारित करने और बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 72 राजदूतों और राजनयिक मिशनों को प्रमुखों को प्रयागराज आने का न्यौता दिया है ताकि वे इंतजामों के हर पहलू का खुद जायजा ले सकें.

उत्तर प्रदेश के पूर्व गृह सचिव और 2013 के कुंभ मेले के प्रभारी मणि प्रसाद मिश्र कहते हैं कि सबसे अहम चुनौती है ''भीड़ का प्रबंधन जो संगम से ही शुरू हो जाता है और प्रयागराज शहर से भी आगे 70 से 80 किमी तक जाता है. इसमें यातायात का प्रबंधन और 'इवेंट फ्लो' भी शामिल है जो कुंभ के आरंभ होने से कुछ महीने पहले ही शुरू होकर कुंभ के खत्म के होने के महीनों बाद तक चलता रहता है.'' कुंभ 2019 की सबसे बड़ी उपलब्धि प्रयागराज मेला निगम का बनाया जाना है.

यह आयोजन के पहले और बाद में कुंभ की तमाम चुनौतियों से निपटने का स्थायी तंत्र है. यही नहीं, पहली बार ज्यादातर अस्थायी प्रबंधन व्यवस्थाओं को स्थायी ढांचे में बदलने का काम शुरू किया गया है. मिसाल के तौर पर प्रधानमंत्री ने जो एकीकृत कमांड और नियंत्रण ट्रैफिक प्रणाली लॉन्च की थी और जिसने इसी कुंभ से काम करना शुरू किया है, उसे उत्तर प्रदेश के 10 सबसे बड़े शहरों के यातायात प्रवाह की परेशानियों से निपटने वाली राज्य की एकीकृत ट्रैफिक प्रबंधन प्रणाली के साथ जोड़ा और मिलाया जा रहा है.

उत्तर प्रदेश के शहरी विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने अपने प्रमुख समापन भाषण में कहा कि मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने अर्ध कुंभ को कुंभ के रूप में नए सिरे से परिभाषित किया है, क्योंकि वे मानते हैं कि ''कुंभ सरीखा शुभ और मांगलिक उत्सव अर्ध या अधूरा नहीं बल्कि परिपूर्ण, संपूर्ण और पूर्ण ही हो सकता है.''

खन्ना ने कहा कि उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार ने कुंभ के लिए 2,900 करोड़ रुपए का बजट मुहैया किया था, जबकि केंद्र ने इसके लिए अलग से 1,200 करोड़ रुपए का योगदान दिया. इससे दिव्य और भव्य के दोहरे इरादे के साथ समूचे शहर और कुंभ का कायापलट करने में खासी मदद मिली. खन्ना ने कहा कि कुंभ के तीन उद्देश्य हैं: स्नान, ध्यान और दान (पवित्र संगम में नहाना, ध्यान लगाना और परोपकार के काम करना). परोपकार के ऐतिहासिक प्रमाण राजा हर्षवर्धन के साथ ही शुरू हो जाते हैं, जो अपनी पांच साला सभाएं प्रयाग में पवित्र संगम की रेत पर किया करते थे और परोपकार की शानदार मिसाल कायम करते हुए पहने हुए वस्त्रों सहित अपना तमाम माल-असबाव और संपत्ति दान कर दिया करते थे.

लोगों का हुजूम मकर संक्रांति के स्नान से ही प्रयागराज में पहुंचना शुरू हो गया है. साधु-संन्यासियों और अखाड़ों के तंबू कुंभ की शोभा बढ़ा रहे हैं. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी 17 जनवरी को कुंभ में पहुंचे और उन्होंने बेहतर इंतजामों के लिए योगी सरकार की सराहना भी की. इस मौके पर मौजूद योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ''हम स्वच्छ कुंभ और पर्यावरण अनुकूल आयोजन का संदेश देना चाहते हैं. सारे इंतजाम इसी दिशा में किए गए हैं.''

केंद्रीय मंत्री उमा भारती और स्मृति ईरानी ने भी कुंभ में पहुंचकर आस्था की डुबकी लगाई है. अभी और भी नामचीन लोग कुंभ में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने जाने वाले हैं. प्रमुख स्नान वाले दिनों में प्रयागराज में भारी भीड़ आएगी. निस्संदेह इस बार इंतजाम पहले से कहीं ज्यादा हैं लेकिन इनकी असली परीक्षा श्रद्धालुओं का उत्साह ही लेगा.

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