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सेहतः कसरत का कारोबार

जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से बचने और युवाओं में अच्छी देह बनाने की चाहत के बल पर देश में फल-फूल रही फिटनेस इंडस्ट्री

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शुभम शंखधर 08 January 2019
सेहतः कसरत का कारोबार जिम करते लोग

अपने सुडौल औरगठीले बदन की नुमाइश करते बॉडीबिल्डरों के पोस्टर, कोच की ओर से हाल में जीती गईं चैंपियनशिप की तस्वीरों औरअत्याधुनिक उपकरणों से सजा जिम तथा वहां ट्रेनर के साथ अभ्यास का सही मूवमेंटसमझते लोग. गाजियाबाद के इंदिरापुरम स्थित जिम कोर एनरजाइजर का यह दृश्य युवाओंमें देह बनाने के बढ़ते क्रेज का उदाहरण है. जिम के मालिक और मिस्टर इंडिया रह चुकेउमेश कहते हैं, "जब 2008 में जिम शुरू किया था तब करीब 80 से 100 लोग ही आते थे, जिनमें बहुत सेलोग सीरियस नहीं होते थे. उसका एक बड़ा कारण यह भी था कि करियर और रोजगार के कोईखास अवसर नजर नहीं आते थे. लेकिन 2014 के बाद जिम इंडस्ट्री में बड़े बदलाव आए हैं. जिम में आने वालों की संख्यातेजी से बढ़ी है, साथ ही वे एक तयलक्ष्य के साथ आने लगे हैं.

इस ट्रेंड की एकबड़ी वजह बॉडीबिल्डिंग, वेट लिफ्टिंग,मॉडलिंग और ट्रेनिंग के क्षेत्र में बढऩे वालेरोजगार के अवसर हैं. साथ ही फिल्म देखकर बॉडी या जीरो फिगर बनाने के शौक ने भीयुवाओं को जिम की ओर मोड़ा है. इसी क्रेज के बल पर फिटनेस इंडस्ट्री का आकार 21,000 करोड़ रु. के बराबर हो गया और यह हर साल 16 से 18 फीसदी की दर से बढ़ रहा है. शहरों के जिम में उन लोगों की संक्चया भी तेजी सेबढ़ रही है, जिनकी जीवनशैली ऑफिस मेंघंटों काम करने के कारण गतिहीन हो गई है और डॉक्टर ने उन्हें वर्कआउट की सलाह दीहै. जाहिर है, फिट रहने के लिएउन्होंने जिम का रुख किया है.

 

फिटनेस का बढ़ताबाजार

फिटनेस के बाजारके मुख्यतः तीन बड़े हिस्से हैं. पहला जिम में लगने वाली मशीनें, दूसरा फूड सप्लीमेंट और तीसरा इससे जुड़े सामान(एक्सेसरीज) का. फिटनेट क्षेत्र में देश की दिग्गज कंपनी तलवलकर्स लाइफस्टाइल केनिदेशक अनंत रत्नाकर गवांडे कहते हैं, "भारत में फिटनेसका बाजार 16 से 18 फीसदी की रफ्तार से हर साल बढ़ रहा है. फिटनेसके साथ वेलनेस को जोड़ देने पर इस बाजार का आकार 95,000 करोड़ रु. का हो जाता है.'' त्वचा, सौंदर्य और बालोंसे जुड़ी चीजों का बाजार वेलनेस के अंतर्गत आता है, जबकि बॉडीबिल्डिंग, योग, जुमका, पिलेट्स जैसी शारीरिक गतिविधियों के लिए जरूरीउत्पादों का बाजार फिटनेस इंडस्ट्री के तहत रखा जाता है.

 

बात मशीनों की

बढ़ती जागरूकता औरबदलते ट्रेंड के साथ कसरत करने के लिए मशीनों का कल्चर इस तरह बढ़ा है कि जिम केसाथ साथ अब ये घरों में भी जगह लेने लगी हैं. बेंच, रॉड और डम्बल्स वाले जिम भी धीरे-धीरे खुद को मल्टीजिम कीमदद से बदलने लगे हैं. देश में 90 फीसदी जिम इक्विटमेंटआयात होते हैं.

ये इक्विपमेंट मुख्यतः चीन, ताइवान, अमेरिका, कोरिया और स्पेन से आते हैं. कई भारतीयकंपनियां चीन की मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के साथ मिलकर अपनी ब्रांडिंग के साथमशीनें आयात कर रही हैं.

अमेरिका और यूरोप की बड़ी कंपनियों में सायबैक्स, ट्रू फिटनेस, लेस्को, नॉर्टलेस,लाइफ फिटनेस, स्टार ट्रैक, फ्री मोशन आदि शामिल हैं. इक्विटमेंट बाजार को समझने के लिए इनको मुख्य तौर परतीन हिस्सों में बांटा जा सकता है.

पहला कार्डियो, दूसरा स्ट्रेंथ और तीसरा फ्री वेट. फ्री वेट और डम्बल चीनऔर ताइवान से ही आते हैं. वहीं, कार्डियो औरस्ट्रेंथ की मशीनों में अमेरिका और यूरोपीय देशों का दबदबा है.

देश में जिम इक्विपमेंटआयात करने वाली दिग्गज कंपनी एक्मे फिटनेस के नॉर्थ इंडिया हेड पंकज लालवानी कहतेहैं, "चीन और ताइवान से आनेवाली मशीनें सस्ती होती हैं. लेकिन क्वालिटी और फीचर्स के मामले में ये अमेरिका औरयूरोपीय देशों से आने वाली मशीनों के मुकाबले नहीं होती.'' उदाहरण के लिए ट्रेडमिल की कुशनिंग और फोमिंग क्वालिटीमें बड़ा अंतर होता है. 

 प्रोटीन है अहम

फिटनेस से जुड़ेकिसी भी अभ्यास में ट्रेनर के मार्गदर्शन के साथ-साथ सही डाइट बहुत अहम होती है.वहीं बॉडीबिल्डिंग के क्षेत्र में सप्लीमेंट्स की भूमिका अहम होती है. हर व्यक्तिके शरीर की जरूरत के हिसाब से उसे सप्लीमेंट दिए जाते हैं.

देश में कई भारतीय औरविदेशी कंपनियां सप्लीमेंट बाजार में अपने उत्पाद बेच रही हैं. द न्यूट्रिशनप्लैनेट के फाउंडर राहुल गुप्ता कहते हैं, "भारतीय कंपनियोंमें मसल ब्रेज, बिग मसल, हेल्थ फॉर्म जैसी कंपनियों के प्रोटीन प्रोडक्टडिमांड में हैं, वहीं ऑप्टीममन्यूट्रिशन, जीएनसी, बीएसएन, नेचर बेस्ट, क्यूएनटी जैसीविदेशी कंपनियों के प्रोडक्ट ट्रेनर्स इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं.

भारतीयकंपनियों के प्रोटीन प्रोडक्ट 1,200 रु. प्रति किलोसे शुरू होकर 7,000 रु. प्रति किलोतक आते हैं. विदेशी कंपनियों के प्रोडक्ट की रेंज 1,500 रु. से 10,000 रु. प्रति किलो तक है.'' इसी कंपनी केनिदेशक मनीष गुप्ता कहते हैं, "शरीर की जरूरत केहिसाब से प्रोटीन के अलावा अमीनो, फिश ऑयल, मल्टीविटामिन आदि कई तरह के सप्लीमेंट काइस्तेमाल किया जाता है.'' मसलन, वजन घटाने के लिए फैट बर्नर कैप्सूल लेने कीसलाह दी जाती है तो वजन बढ़ाने के लिए वेट गेनर की. फिश ऑयल, अमीनो जैसी चीजों का इस्तेमाल हेवी वर्कआउट करने वाले लोगही करते हैं.

 

मजबूत संभावनाएं

फिटनेस क्षेत्रकी संगठित कंपनियों में तलवलकर्स, फिटनेस फर्स्ट,गोल्ड जिम जैसे गिने-चुने नाम हैं, जिनकी पहुंच अभी बड़े शहरों और मेट्रो तक हीसीमित है. लेकिन छोटे शहरों में देह बनाने के जुनून ने वहां के मोहल्लों में भी असंगठितजिम खड़े कर दिए हैं.

यही कारण है कि देश में फिटनेस के बाजार का बड़ा हिस्सा अभी भीअसंगठित है. तलवलकर्स लाइफस्टाइल की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, 2017 तक अमेरिका में फिटनेस क्लब की संख्या 38,477 थी, जबकि भारत में तीन गुना ज्यादा आबादी के बाद भी यह संख्या 3,800 क्लब की है.

20 करोड़ की आबादी वाले ब्राजील में कुल 34,509 क्लब हैं. क्लब की यह संख्या केवल पब्लिक जिमकी है. होटल, सोसाइटी में होनेवाले जिम को इसमें शामिल नहीं किया गया है. जाहिर है, देश में अब भी इस क्षेत्र में बहुत संभावनाएं हैं. भारत मेंजिम और वेलनेस सेंटर को नियंत्रित करने के लिए कोई कानून भी नहीं है. पिछले दोवर्षों में इससे जुड़ा प्राइवेट मेंबर बिल दो बार पेश किया जा चुका है.

132 करोड़ से ज्यादाकी आबादी वाला भारत 27 वर्ष औसत आयु केसाथ दुनिया का सबसे जवान देश है. गोल्ड जिम के सीनियर रीजनल मैनेजर (नॉर्थ) रंजनघोष कहते हैं, "भारत में फिटनेसके प्रति लोगों की जागरूकता धीरे-धीरे बढ़ रही है.

ऐसे में 1 फीसदी लोग भी अगर जिम का रुख करते हैं तो सोचिए, हम कितने बड़े बाजार को आकर्षित करते हैं.''

जाहिर है, इस युवा देशजहां फिटनेस के बढ़ते बाजार का बहुत बड़ा हिस्सा अब भीअसंगठित हैमें इस क्षेत्रमें अपार संभावनाएं हैं. ठ्ठ

देसी जिम -विदेशी मशीने

चीन और ताइवान सेआयात होने वाली मशीनें सस्ती होती हैं. वहीं अमेरिका, यूरोपीय देश, कोरिया से आने वाली मशीनें महंगी होती हैं. पंकज लालवानी कहते हैं, महंगी होने के पीछे मुख्य वजह इनमें क्वालिटीऔर फीचर्स का अंतर होता है.

मसलन नॉर्मल ट्रेड मिल में अगर वाइ-फाइ कनेक्टिविटी,म्युजिक के लिए पैन ड्राइव लगाने की सुविधा,डिस्प्ले मॉनीटर जैसे फीचर्स बढ़ते हैं तो इसकेसाथ -साथ इसकी कीमत भी बढ़ जाती है.

वहीं दूसरी ओर सस्ती मशीनों में तीन ट्रेडमिलको एक ही मॉनीटर से अटैच कर दिया जाता है. फीचर्स के इतर अगर क्वालिटी की बात करेंतो ट्रेडमिल की कुशनिंग और फोमिंग में बड़ा अंतर होता है.

क्वालिटी की वजह सेमशीनों पर कसरत करते समय मूवमेंट में अंतर आता है.

मूवमेंट का बड़ा अहम रोल होताहै. लालवानी यह भी कहते हैं कि गलत मशीन पर या गलत तरह से किसी अभ्यास को लंबे समयतक कर लिया जाए तो यह कई तरह की बीमारियों का कारण बन जाता है. मल्टीजिम जैसे उपकरणोंका इस्तेमाल कम जगह की वजह से किया जाता है.

 

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