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बेबाक युवाओं का उत्सव

इंडिया टुडे माइंड रॉक्स यूथ समिट 2019 में यह बात साफ तौर उभर कर आई कि देश का युवा राजनैतिक मुद्दों पर बेबाक बात करने के साथ-साथ अपने नजरिए को बेहिचक जाहिर भी करना चाहता है

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रोमिता दत्ता 23 January 2019
बेबाक युवाओं  का उत्सव कांग्रेस की सुष्मिता देव, बीजद के कलिकेश नारायण सिंह देव, बाजपा के निशिकांत दुबे

जनवरी की 10 तारीख को भुवनेश्वर में इंडिया टुडे माइंड रॉक्स यूथ समिट 2019 में 'आज का भारत' और 'भविष्य का भारत' का आमना-सामना हुआ. यहां कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी का सभागार युवाओं की ऊर्जा से सराबोर था. उनकी अभिभूत नजरें मंच पर मौजूद मनोरंजन, खेल और राजनीति की दुनिया की मशहूर हस्तियों पर टिकी थीं. वे उन हस्तियों की जुबानी उनके निजी जीवन के संघर्ष और सफलता की कहानियों को सुन रहे थे तथा जीवन में मजबूत और जुझारू बनने के मंत्र भी ले रहे थे. जानी-मानी हस्तियों को समिट में बोलने के लिए आमंत्रित किया गया था.

दिन भर के रंगारंग कार्यक्रमों की छटा में सराबोर कुछ सितारों के पैर खुद-ब-खुद थिरक उठे थे जिससे माहौल और सतरंगी हो गया था. इन सब के बीच इस आयोजन में यह बात स्पष्ट रूप से उभरी कि आज का युवा भारत क्या सोचता है और किन मान्यताओं में विश्वास करता है.

चाहे इमरान हाशमी और तापसी पन्नू जैसे बॉलीवुड सितारे हों या ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक जैसे राजनेता या भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के सदस्य, सबकी मौजूदगी सभागार में अलग ही ऊर्जा प्रवाहित कर रही थी. पन्नू ने अपने रिश्तों में ब्रेक-अप और फिल्म इंडस्ट्री में रिजेक्ट होने से उपजी पीड़ा की बात साझा की. उन्होंने कहा, ''गिरने में कोई बुराई नहीं, लेकिन वापस अपने पैरों पर खड़े न होना बुरी बात है.'' हाशमी ने मंच पर कुछ लड़कियों के साथ डांस करके उन्हें सक्वमोहित कर दिया था.

उन्होंने समिट में अपनी नई फिल्म व्हाइ चीट इंडिया के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि कैसे नकल संगठित अपराध बन चुकी है जो अयोग्य लोगों को मेडिकल और इंजीनियरिंग की अहम परीक्षाओं में नकल के जरिए पास कराने में मदद करती है. हालांकि, दर्शकों को उनके पहले चुंबन, पहले क्रश और साथ काम करने वाली हीरोइन के साथ उनकी केमिस्ट्री की कहानी में ज्यादा दिलचस्पी थी.

यही नहीं, माइंड रॉक्स 2019 में शामिल लोगों की दिलचस्पी का दायरा बॉलीवुड के कलाकारों की निजी कहानियों से बढ़कर राजनैतिक मुद्दों से संबंधित बहस में भी वैसा ही व्यापक दिखा.

इंडिया टुडे के ग्रुप एडिटोरियल डायरेक्टर (पब्लिशिंग) राज चेंगप्पा ने बहुत सही टिप्पणी की कि ''आज और आने वाले कल का भारत'' राजनीति में दिलचस्पी लेने लगा है और विभिन्न मुद्दों पर अपनी राय भी बना रहा है—चाहे बात आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लिए 10 फीसदी आरक्षण की हो, या भारत के अगले प्रधानमंत्री के लिए संभावित उम्मीदवारों की. पटनायक ने स्टुडेंट्स को वोट देने के लिए पार्टी का चुनाव करने से पहले अपने मुद्दों को प्राथमिकता देने की अहमियत के बारे में बताया. लोकलुभावन चुनावी नारों और धर्म के नाम पर इस्तेमाल होने से इनकार कर रही युवा पीढ़ी को मुख्यमंत्री ने सलाह दी, ''अपनी प्राथमिकताओं पर गौर करें और उसके बाद पार्टी के राजनैतिक घोषणापत्र को देखें कि आप किस पर सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं और तब ही अपना कीमती वोट डालें.''

सांसदों के साथ सत्र में कांग्रेस की सुष्मिता देव, बीजू जनता दल (बीजद) के अध्यक्ष कलिकेश नारायण सिंह देव और भाजपा के निशिकांत दुबे के बीच नरेंद्र मोदी बनाम राहुल गांधी विषय पर गर्मागर्म बहस हुई.

लेकिन, हाल ही में सामान्य श्रेणी में 10 प्रतिशत आरक्षण संबंधी संवैधानिक प्रावधान पर कोई खास समर्थन नहीं दिखा. छात्रों ने समान रोजगार मुहैया कराने पर ज्यादा जोर दिया और कलिकेश के सुझाव, ''देश को 100 प्रतिशत योग्यता-आधारित प्रणाली के साथ सभी को समान अवसर देने के लक्ष्य की ओर बढऩे की आवश्यकता है.'' का तालियों की गडग़ड़ाहट से स्वागत किया गया. इस वाहवाही में आरक्षण की घोषणा को सही ठहराने और अतीत में कांग्रेस और यूपीए की इसकी अनदेखी करने की गलती की ओर इशारा करने की निशिकांत दुबे की कोशिश भी धूमिल पड़ गई. सुष्मिता देव ने इस 10 प्रतिशत आरक्षण की पहल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 'आकस्मिक उपाय' बताते हुए इसे 'रोजगार सृजन की विफलता' की भरपाई करने की कवायद बताया.

जहां भाजपा सांसद ने आगामी चुनाव में मोदी के लिए 400 सीटों के स्पष्ट बहुमत की भविष्यवाणी की, तो बीजद ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के साथ क्रमशः 160 और 140 सीटों पर त्रिशंकु सदन की. ओडिशा की सत्तारूढ़ पार्टी के रूप में बीजद ने भाजपा और कांग्रेस, दोनों से किनारा करते हुए मध्यम मार्ग चुना. दर्शक अपनी बातों को बेबाकी से रख रहे थे, जिसे सुनकर दुबे ने वादा किया कि भाजपा ''यह सुनिश्चित करेगी कि युवाओं को रोजगार मिले और राम मंदिर का निर्माण हो.'' जिस पर मोदी के नाम के जोशीले नारों से सभागार गूंज उठा.

मोदी के अलावा, एक आम आदमी को भी भरपूर जयकार मिली. वे थे ओडिशा में जन्मे 48 वर्षीय आइपीएस अधिकारी बसंत कुमार रथ, जो जम्मू-कश्मीर में तैनात हैं. रथ ने कश्मीर के प्रति अपने प्यार का इजहार करते हुए कहा कि श्रीनगर की सड़कें उनके लिए पवित्र हैं. ''कश्मीर के लोग हमारे अपने लोग हैं और मैं उन्हें दुष्ट नहीं कह सकता.'' उन्होंने कहा कि उन्हें पत्थरबाजों से हमदर्दी है और वे मौत को गले लगाने से भी पीछे नहीं हटेंगे, जब तक उनके दिल में कश्मीर का प्यार बसा है.

पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद अजहरुद्दीन ने जब क्रिकेट विश्व कप 2019 में भारत की जीत की संभावना के बारे में बोलना शुरू किया तो दर्शकों में भी जोश भर आया.

सबसे ज्यादा तालियां यूट्यूब कॉमेडियन भुवन बाम ने बटोरीं जिनके एक करोड़ से भी ज्यादा सब्सक्राइबर्स हैं. अपने नामकी दीवानी भीड़ को देखकर भुवन कुछ पल के लिए मंच पर हैरान खड़े रह गए. पूरी दुनिया को रोजमर्रा की जिंदगी से प्रेरित हास्य और अटपटे किरदारों से लोटपोट करने वाले भुवन ने माना कि उनके जीवन में भी दुविधा और मुश्किल के दौर आए. उन्होंने कहा, ''मैं हमेशा अपनी लोकप्रियता से डरता हूं कि कहीं यह मेरे हाथ से छूट न जाए. ऐसी लोकप्रियता हमेशा बनी नहीं रह सकती. खुद को सर्वश्रेष्ठ समझना आपकी सबसे बड़ी भूल है.''

जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, भीड़ का उत्साह भी परवान चढ़ता गया. काफिराना और राब्ता गानों से मशहूर पाश्र्व गायिका निकिता गांधी के सुरों के जादू ने सबको विभोर कर दिया. इंडियाज गॉट टैलेंट 2009 के विजेता प्रिंस डांस ग्रुप के डांस ने भी लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया. डांस ग्रुप की चुनौतियों और कठिनाइयों से भरी राह पर जीत हासिल करने की वास्तविक कहानी दर्शकों के लिए मानो सबसे ज्यादा प्रेरक सबक रहीः सच है, घनघोर अंधेरे में ही सबसे प्रखर तारा दिखाई देता है.

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