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गोवाः उपचुनाव की बाधा

गोवा में होने जा रहे तीन महत्वपूर्ण उपचुनावों को देखते हुए सत्ताधारी भाजपा के लिए अंदरूनी असंतोष और गठबंधन के घटक दलों की नाराजगी परेशानी का सबब बन सकती है

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किरण डी. तारे 06 March 2019
गोवाः उपचुनाव की बाधा गोवा में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते शाह और पर्रीकर

महादेव नाईक भाजपा को झटका देते हुए 24 फरवरी को ऐसे समय वापस कांग्रेस में शामिल हो गए जब सत्ताधारी पार्टी अंदरूनी बगावत से जूझ रही है जबकि विधानसभा के तीन महत्वपूर्ण उपचुनाव सामने आ गए हैं.

ये उपचुनाव इसलिए कराने पड़ रहे हैं क्योंकि कांग्रेस के पूर्व विधायक सुभाष शिरोडकर (शिरोडा) और दिलीप सोप्ते (मांडरेम) अक्तूबर में भाजपा में शामिल हो गए थे. मापुसा में उपचुनाव का कारण यह है कि 14 फरवरी को भाजपा के विधायक फ्रांसिस डी्यसूजा का निधन हो गया था.

भाजपा के भीतर कुछ समय से असंतोष पनप रहा है क्योंकि पार्टी हर कीमत पर अपनी अल्पमत की सरकार बचाने की कोशिश कर रही है और इस कोशिश में वह अपने वफादार कैडरों की अनदेखी करके दलबदलुओं को अहमियत दे रही है. पार्टी पदाधिकारियों को इस नाराजगी का एहसास तब हुआ जब 9 फरवरी को आयोजित एक बैठक में बूथ-स्तर के केवल 15,000 कार्यकर्ता पहुंचे जबकि 35,000 कार्यकर्ताओं के आने की उम्मीद थी.

इस बैठक को पार्टी अध्यक्ष अमित शाह संबोधित करने वाले थे. पूर्व मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पार्सेकर की तरह नाईक ने भाजपा से अलग होने से बहुत पहले ही चेतावनी दी थी कि सोप्ते और शिरोडकर को अगर टिकट दिए गए तो वे पार्टी के खिलाफ काम करेंगे. पार्सेकर कह चुके हैं कि लोग उन्हें चुनाव लड़ाना चाहते हैं, भले भाजपा टिकट दे या न दे.

भाजपा के गोवा प्रभारी बी.एल. संतोष ने 25 फरवरी को पार्सेकर को मनाने के लिए उनसे मुलाकात की. पार्टी के भीतर असंतोष का समर्थन करते हुए नीलेश कैबराल ने कहा कि इसकी कोई गारंटी नहीं है कि पार्टी की सभाओं में हिस्सा लेने वाले सभी लोग भाजपा को ही वोट देंगे. अपनी ही सरकार पर निशाना साधते हुए और पणजी में मांडवी नदी पर तीसरे पुल के उद्घाटन का उल्लेख करते हुए कैबराल ने कहा कि केवल पुल बनाने से लोगों को आजीविका नहीं मिल जाती. हालांकि बाद में बात संभालते हुए उन्होंने कहा, ''एक बात तो तय है कि मैं भाजपा को ही वोट दूंगा.''

भाजपा के लिए डी्यसूजा का उत्तराधिकारी चुनना कठिन हो रहा है क्योंकि इसके कम से कम तीन नेताओं—संदीप फलारी, रूपेश कामत और सुधीर खांडोलकर ने उनकी सीट से चुनाव लडऩे की इच्छा जताई है. इन तीनों में कामत को मुख्यमंत्री मनोहर पर्रीकर का करीबी माना जाता है. डी्यसूजा के पार्षद बेटे जोशुआ के नामांकन का भी कयास लगाया जा रहा है.

ये उपचुनाव लोकसभा चुनाव के साथ कराए जा सकते हैं. भाजपा अगर तीनों सीटें जीत जाती है तो सहयोगी दलों पर इसकी निर्भरता खत्म हो सकती है. पार्टी के लिए चिंता की बात यह भी है कि उसके गठबंधन की सहयोगी महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी (एमजीपी) ने घोषणा की है कि वह तीनों उपचुनाव अकेले ही लड़ेगी. गठबंधन की तीसरी सहयोगी गोवा फॉरवर्ड पार्टी (जीएफपी) ने चेतावनी दी है कि एमजीपी अगर भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ती है तो सरकार गिर जाएगी.

जीएफपी के आवास मंत्री जयेश सलगांवकर ने कहा है कि सरकार के अल्पमत में आने की स्थिति में उनकी योजना पहले से तैयार है. सूत्रों का कहना है कि जीएफपी मुख्यमंत्री पर्रीकर का समर्थन करने के लिए कांग्रेस और एमजीपी को छोड़कर सभी पार्टियों को साथ लाएगी.

कांग्रेस पर्रीकर की बीमारी का हवाला देकर उनके इस्तीफे की मांग करती रही है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गिरीश कहते हैं, ''भाजपा सत्ता की भूखी है. उसने शिरोडकर और सोप्ते को लालच न दिया होता तो उपचुनाव की नौबत ही नहीं आती.''

—किरण डी. तारे

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