एडवांस्ड सर्च

मर्ज बढ़ता गया ज्यों-ज्यों दवा की

अफसरों की हीला-हवाली से आगरा और मेरठ में कोविड-19 संक्रमण बेकाबू होता देख मुख्यमंत्री योगी का रुख सख्त, प्रशासन में पूरी तरह से फेरबदल की तैयारी.

Advertisement
aajtak.in
आशीष मिश्रनई दिल्ली, 20 May 2020
मर्ज बढ़ता गया ज्यों-ज्यों दवा की देर आयद लखनऊ से गए वरिष्ठ अधिकारी मेरठ में दुकानों की जांच करते

अपने आवास पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 9 मई की शाम को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मेडिकल कालेजों के प्राचार्यों और चिकित्सा संस्थानों के निदेशकों से रू-ब-रू होने से पहले पूरा फीडबैक जुटा चुके थे. मेरठ की बारी आते ही मुख्यमंत्री ने मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आर.सी. गुप्ता से कोरोना वार्ड में भर्ती मरीजों की देखभाल के बारे में पूछा. डॉ. गुप्ता अपना जवाब पूरा करते उससे पहले ही योगी बोले कि उन्हें पता है, किस तरह की व्यवस्था है, सोशल मीडिया पर सब दिख रहा है.

इसके बाद मुख्यमंत्री ने मेरठ के अधिकारियों की जमकर आलोचना की. ऐसा ही तल्ख रवैया आगरा को लेकर भी दिखा. मुख्यमंत्री की बैठक शुरू होने से पहले आगरा में कोरोना संक्रमण के चलते 24वीं मौत की सूचना आ चुकी थी और संक्रमितों की संख्या साढ़े सात सौ के करीब पहुंच गई थी. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में कोरोना संक्रमण के लगातार बढ़ते मामलों पर आगरा के अधिकारीगण बगलें झांकते दिखे. कुछ ने आगरा में अधिक टेस्ट होने के चलते कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढऩे का तर्क दिया, लेकिन मुख्यमंत्री संतुष्ट नहीं हुए. योगी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में मौजूद मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी से वरिष्ठ अधिकारियों को जांच के लिए फौरन आगरा और मेरठ भेजने का आदेश दिया.

अगले दिन सुबह मुख्यमंत्री की अपने वरिष्ठ अधिकारियों की टीम-11 की बैठक के दौरान प्रमुख सचिव, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास, आलोक कुमार, पुलिस महानिरीक्षक (आइजी), विजय कुमार को आगरा और प्रमुख सचिव, सिंचाई, टी. वेंकटेश, आइजी लक्ष्मी सिंह को मेरठ पहुंचने का फरमान सुना दिया गया. इनके साथ स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी भेजे गए.

असल में, आगरा और मेरठ में कोरोना का प्रकोप योगी सरकार के लिए चिंता का सबब बन गया है. 14 मई की रात तक आगरा में कुल 24 तथा मेरठ में 15 लोगों की मौत कोरोना से हो चुकी थी जो यूपी में कुल हुई 88 मौतों के आधे से कुछ ही कम था.

अफसरों ने बिगाड़े हालात

मुख्यमंत्री ने रविवार 10 मई को ही अधिकारियों को विशेष विमान से आगरा और मेरठ पहुंचने का आदेश दिया था, लेकिन मौसम खराब होने के कारण जहाज उड़ान न भर सका. अगले दिन 11 मई को सुबह 10 बजे मुख्यमंत्री के दूत विशेष जहाज से आगरा पहुंच गए. आलोक कुमार के साथ प्रमुख सचिव, चिकित्सा शिक्षा, रजनीश दुबे समेत अन्य सभी अधिकारी एयरपोर्ट से सीधे सर्किट हाउस पहुंचे. शाम 4 बजे तक चली बैठक में आगरा के एस.एन. मेडिकल कॉलेज में अव्यवस्था का मुद्दा छाया रहा. इसके बाद अधिकारियों ने बंद कमरे में करीब दो घंटे मेडिकल कॉलेज, स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों से आमने-सामने बात की. पर सभी अधिकारी आगरा में कोरोना संक्रमण के बेकाबू होने का ठीकरा एक-दूसरे के विभागों पर फोड़ते रहे

लखनऊ से गए और बैठक में शामिल एक अधिकारी ने इंडिया टुडे को बताया, ‘‘अधिकारियों के बीच तालमेल की कमी से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुई हैं. तालमेल की कमी से हॉटस्पॉट में मरीजों की ट्रेसिंग में देरी हुई और कोरोना संक्रमण के मामले तेजी से बढ़े.’’ वहीं दूसरी ओर प्रमुख सचिव, सिंचाई, टी. वेंकटेश के नेतृत्व में मेरठ पहुंची टीम ने सुबह 11 बजे से ही शहर के बचत भवन में डेरा डाल दिया.

प्रमुख सचिव ने एक-एक बिंदु पर समीक्षा की और इस दौरान मेरठ मेडिकल कॉलेज की अव्यवस्था खुलकर सामने आ गई. प्रमुख सचिव ने वार्ड की सफाई और कोविड वार्ड में मरीजों पर ध्यान न देने जैसी शिकायतें तुरंत दूर करने का आदेश मेडिकल कॉलेज प्रशासन को दिया. मेरठ में कोरोना संक्रमण के विस्फोट के पीछे दिल्ली रोड स्थित नवीन सब्जी मंडी को लेकर प्रशासन की चूक थी. शासन से निर्देश मिलने के बाद भी स्थानीय प्रशासन यहां पर सोशल डिस्टेंसिंग की गाइडलाइन लागू नहीं करा पाया, जबकि इसी मंडी के एक बड़े फल व्यापारी की कोरोना से मौत हो चुकी थी.

प्रशासनिक खामी के कारण 5 मई को मंडी में छिपा जिन्न सामने आ गया. मेरठ में कुल 24 लोग कोरोना पॉजिटिव निकले. इसमें बड़ी तादाद सब्जी बेचने वालों की थी और यहां से बड़ी चेन पूरे मेरठ शहर में बन गई. समीक्षा बैठक में प्रशासनिक चूक से कोरोना संक्रमण फैलने की बात सामने आने के बाद प्रमुख सचिव, सिंचाई, टी. वेंकटेश और लक्ष्मी सिंह ने ड्रोन के जरिए जागृति विहार में नई अस्थायी मंडी के प्रबंध का जायजा लिया.

आगरा मॉडल पर सवाल

स्मार्ट सिटी वाले शहरों में कोरोना रोकथाम को लेकर यूपी में अव्वल स्थान पाने वाले आगरा जिले में बेकाबू होते संक्रमण ने इस मॉडल पर सवाल खड़े कर दिए हैं. प्रदेश में सबसे अधिक मामले आगरा में हैं. मरीजों की संख्या पर अंकुश न लगने पर शासन ने यहां पर बीमारी का थर्ड पार्टी ऑडिट कराने का फैसला लिया था. चिकित्सा शिक्षा विभाग के महानिदेशक के.के. गुप्ता के निर्देश पर लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों की एक टीम गठित की गई. इसमें पल्मोनरी विभाग के प्रमुख डॉ. सूर्यकांत और मेडिसिन विभाग के डॉ. विवेक कुमार को शामिल किया गया.

टीम ने 17 अप्रैल को आगरा पहुंचकर बीमारी के फैलने के कारणों की पड़ताल की. टीम ने कुल 350 पेज की एक रिपोर्ट तैयार कर चिकित्सा शिक्षा विभाग को सौंप दी है. इसमें कई बिंदुओं पर गड़बड़ी की बात सामने आई है. 7 अप्रैल को मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. जी.के. अनेजा ने दो हफ्ते का चिकित्सीय अवकाश लिया था. जिम्मेदारी से बचने के लिए कार्यवाहक प्राचार्य खुद क्वारंटीन में चले गए. फिर बाल रोग विभाग के डॉक्टर को जिम्मेदारी दी गई. उन्होंने बीमारी का हवाला देकर चार्ज लेने से मना कर दिया. इसके बाद रेडियोथेरेपी विभाग के डॉक्टर को कमान देकर किसी तरह मामला सुलझाया गया.

इस दौरान महामारी ने भयावह रूप ले लिया. चिकित्सा शिक्षा विभाग की रिपोर्ट में कहा गया है कि संक्रमण की रोकथाम में लगे डॉक्टर और कर्मचारी ठीक से प्रशिक्षित नहीं थे. इसकी वजह से रेजिडेंट और पैरामेडिकल स्टाफ संक्रमण की जद में आए. रिपोर्ट में आगरा में न्न्वारंटीन के लिए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर) की गाइडलाइन का पालन न किए जाने का भी जिक्र है. जो डॉक्टर कोरोना ड्यूटी में नहीं हैं वे भी क्वारंटीन में पहुंच गए थे. डॉक्टर होटल या हॉस्टल की बजाए घरों में क्वारंटीन में गए. डॉक्टर-कर्मचारी ने सोशल डिस्टेंसिंग की भी धज्जियां उड़ाई. जो डॉक्टर और कर्मचारी छुट्टी पर जा रहे थे, उनकी सेहत की जांच के लिए शुरू में मेडिकल बोर्ड तक गठित नहीं किया गया था.

बड़ी कार्रवाई के मूड में सरकार

आगरा और मेरठ में कोरोना संक्रमण की रफ्तार धीमी न पड़ने पर योगी सरकार बड़ी कार्रवाई का मन बना रही है. इसकी झलक आगरा के स्वास्थ्य महकमे में सरकार के प्रयोग के जरिए दिखाई देने लगी है.

सरकार ने लखनऊ में स्वास्थ्य महानिदेशालय के संयुक्त निदेशक डॉ. आर.सी. पांडेय को सीएमओ कार्यालय में विशेष कार्याधिकारी बनाया है. इन्हें कोरोना पर नियंत्रण और पर्यवेक्षण का काम सौंपा गया है. गोरखपुर जिला अस्पताल में वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अविनाश सिंह को आगरा मंडल के अपर निदेशक स्वास्थ्य कार्यालय में विशेष कार्याधिकारी/संयुक्त निदेशक का प्रभार सौंपा गया है.

वैसे, 10 मई को आगरा में सरकार ने एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग में बदलाव किया. ओएसडी रहे डॉ. अविनाश सिंह को आगरा मंडल का अपर स्वास्थ्य निदेशक बनाकर इस पद पर तैनात डॉ. ए.के. मित्तल को कमिशनर ऑफिस से संबंद्ध कर दिया गया. इसी तरह डॉ. आर.सी. पांडेय को आगरा का नया सीएमओ बनाकर इस पद पर रहे डॉ. मुकेश वत्स को डीएम ऑफिस से जोड़ दिया गया.

सरकार ने 13 मई की रात आगरा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनेजा को हटाकर चिकित्सा शिक्षा निदेशालय से संबद्ध कर दिया. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर गाज गिराकर प्रदेश सरकार ने फिलहाल कई शिकायतों के बावजूद आगरा के स्थानीय प्रशासन को जीवनदान दिया है.

88 मौतें हुई हैं उत्तर प्रदेश में कोविड-19 से14 मई तक. इनमें से 24 मौतें आगरा में और 15 मौतें मेरठ में हुई हैं.

***

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay