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जाति जोड़कर चुनाव जीतने की जुगत

खुद को दलित हितैषी साबित करने के लिए ही भाजपा ने मेरठ के सुभारती विश्वविद्यालय परिसर में शुरू हुई दो दिवसीय कार्यकारिणी बैठक के कार्यक्रम स्थल का नाम 1857 की क्रांति के शहीद मातादीन वाल्मीकि के नाम पर रखा.

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आशीष मिश्रनई दिल्ली, 29 August 2018
जाति जोड़कर चुनाव जीतने की जुगत मिशन 2019 मेरठ में प्रदेश भाजपा कार्यसमिति की बैठक में मौजूद पार्टी के दिग्गज नेता

मेरठ से बिजनौर जाने वाली रोड पर गंगानगर के उल्देपुर गांव में ईंटों से पटी गलियां, यहां पर दलितों-ठाकुरों के बीच हुए जातिगत संघर्ष की गवाही दे रही थीं. मेरठ में 11 अगस्त से शुरू हुई भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रदेश कार्यकारिणी बैठक के ठीक दो दिन पहले 9 अगस्त को हुई इस घटना ने सत्तारूढ़ दल को दरपेश चुनौतियों का एहसास करा दिया था. ये चुनौतियां मुख्य रूप से भाजपा के दलित आधार को पुख्ता करते हुए अन्य जातियों के साथ सामंजस्य बिठाने की हैं.

खुद को दलित हितैषी साबित करने के लिए ही भाजपा ने मेरठ के सुभारती विश्वविद्यालय परिसर में शुरू हुई दो दिवसीय कार्यकारिणी बैठक के कार्यक्रम स्थल का नाम 1857 की क्रांति के शहीद मातादीन वाल्मीकि के नाम पर रखा. कार्यक्रम स्थल पर बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर के कटआउट पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पूर्व गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी के साथ प्रमुखता से लगाए गए.

लेकिन सबसे चौंकाने वाला कटआउट पूर्व प्रधानमंत्री और पश्चिमी यूपी के प्रभावशाली जाट नेता रहे चौधरी चरण सिंह का था, जो केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद किसी भी प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में नहीं दिखा था.

जाहिर है, 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले पश्चिमी यूपी में जातीय समीकरण साधने के भाजपा के एजेंडे की झलक कार्यक्रम स्थल पर लगे नेताओं के कटआउट और चित्र स्पष्ट कर रहे थे. खुद को राष्ट्रवाद की सबसे बड़ी झंडाबरदार बताने के लिए भाजपा ने मेरठ का चुनाव किया, जहां से अंग्रेजों के खिलाफ 1857 की क्रांति का बिगुल फूंका गया था.

मेरठ में भाजपा के प्रदेश पदाधिकारियों, कार्यसमिति सदस्यों, जिलाध्यक्षों, जिला प्रभारियों समेत कुल 600 से अधिक कार्यकर्ताओं के साथ शुरू हुई कार्यकारिणी बैठक में प्रदेश में पिछले कुछ महीनों में गोरखपुर, फूलपुर और कैराना संसदीय उपचुनाव में हुई हार को भुलाकर लोकसभा चुनाव में पूरी ताकत से उतरने का संकल्प लिया गया.

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में यूपी की 80 संसदीय सीटों में से 71 सीटें जीतने वाली भाजपा ने इस स्वप्निल प्रदर्शन को 2019 के आम चुनाव में दोहराने के लिए एक बार फिर जातियों की गोलबंदी की रणनीति तैयार की है.

महागठबंधन का खतरा

पिछले वर्ष दिसंबर में हुए मेयर के चुनाव में भाजपा को मेरठ में वाल्मीकि समाज से आने वाली बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की उम्मीदवार से हार का सामना करना पड़ा था. इसके बाद पश्चिमी यूपी में कैराना लोकसभा और नूरपुर विधानसभा उपचुनाव में भी दलितों का रुझान बसपा की ओर ही दिखा. लोकसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी (सपा), बसपा, राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के संभावित महागठबंधन ने भाजपा रणनीतिकारों की नींद उड़ा दी है.

विधानसभा और लोकसभा उपचुनावों में दलित-मुस्लिम गठजोड़ अपना असर दिखा चुका है. भाजपा ने इससे निबटने के लिए अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू ) में आरक्षण का मुद्दा उछाल दिया है. कार्यसमिति के उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, ''भाजपा को दलित विरोधी कहने वाले बताएं कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में अनुसूचित वर्ग को आरक्षण क्यों नहीं मिला? ऐसे मसलों पर सभी राजनैतिक दलों की जुबान बंद क्यों हो जाती है?''

विपक्षी गठबंधन की काट के लिए भाजपा ने अपने ओबीसी कार्ड की धार तेज करने की तैयारी की है. इसके लिए पार्टी ने सबसे ज्यादा भरोसा उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य पर ही जताया है. मौर्य ने पिछड़ा वर्ग के बड़े चिंतक और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर के नाम पर हर जिले में सड़क बनाने की घोषणा कर पार्टी का एजेंडा स्पष्ट कर दिया है.

मौर्य अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गुर्जर, सैनी, जाट समेत पिछड़े वर्ग की उन जातियों के साथ बैठक करेंगे जो राजनैतिक रूप से उपेक्षित हैं. कार्यसमिति में यूपी प्रभारी ओम माथुर की गैर-मौजूदगी में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद भूपेंद्र यादव की मंच पर मौजूदगी अकारण नहीं थी. यादव वोटरों के बीच सेंध लगाने के लिए पार्टी भूपेंद्र यादव को यूपी प्रभारी का दायित्व सौंपने पर विचार कर रही है.

''हिंदुत्व के साथ सबका विकास'' का तड़का

पश्चिमी यूपी में कांवड़ यात्रा शुरू होने पर पहली बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कांवडिय़ों पर हेलिकॉप्टर से फूल बरसा कर 'हार्डकोर हिंदुत्व' का एजेंडा साफ कर चुके थे. मेरठ में प्रदेश कार्यसमिति में भी हिंदुत्व एजेंडे की झलक दिखी. कार्यसमिति बैठक के बाद उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य समेत कई मंत्रियों ने मेरठ में बाबा औघडनाथ और धर्मेश्वर मंदिर पहुंचकर पूजा भी की. हिंदुत्व एजेंडे को परोक्ष रूप से धार देने के लिए योगी ने कार्यसमिति में अपने भाषण में जोर देकर कहा कि भाजपा सरकार किसी का भी तुष्टीकरण नहीं करेगी.

उनका निशाना मुस्लिमों की ओर था. उनका एकमुश्त वोट भाजपा विरोधी गठबंधन के पास न जाए, इसके लिए पार्टी ने अल्पसंख्यक मोर्चा का नए सिरे से गठन कर पहली बार इसे बूथ तक पहुंचाने की तैयारी की है (देखें बॉक्स). मेरठ विश्वविद्यालय में प्रवक्ता डॉ. अमर वर्मा बताते हैं, ''मुस्लिमों का वोट भाजपा को नहीं मिलने वाला लेकिन, तीन तलाक और हलाला जैसे मुद्दे उठाकर पार्टी इस वोट बैंक में बंटवारा करने की कोशिश कर रही है.''

इन्हीं मुद्दों को लेकर अल्पसंख्यक मोर्चा प्रदेश भर में मंडल स्तर पर कार्यक्रम आयोजित करने जा रहा है. असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के मुद्दे को उछालकर भाजपा राष्ट्रवाद और हिंदुत्व का 'कॉकटेल' तैयार करने की जुगत में है. कार्यसमिति के समापन पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कहा, ''देश में शरणार्थी तो रह सकते हैं लेकिन, बांग्लादेशी, पाकिस्तानी या फिर किसी घुसपैठिए को नहीं रहने दिया जाएगा.'' भाजपा सभी जिलों में जिला कार्यसमिति की बैठकें आयोजित कर एनआरसी के मुद्दे पर जनमत तैयार करेगी.

संगठन पर जोर

प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद से पार्टी ने पहली बार सभी प्रकोष्ठों, मोर्चों, विभागों और प्रकल्पों का नए सिरे से गठन कर लोकसभा के चुनावी समर के लिए अपनी सेना तैयार की है. सभी मोर्चा अध्यक्षों को लक्ष्य सौंपा गया है (देखें बॉक्स). कार्यसमिति में यूपी के सभी पार्टी सांसदों और केंद्रीय मंत्रियों को न्योता भेजा गया था.

केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी और उनके बेटे सुल्तानपुर से सांसद वरुण गांधी के मेरठ की कार्यसमिति बैठक में न पहुंचने से संकेत मिला कि पार्टी के भीतर सब ठीक नहीं चल रहा. हालांकि सुलह की कोशिशें भी परवान चढ़ी हैं.

एक दूसरे के धुर विरोधी रहे भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी के मेरठ स्थित आवास पर संगठन महामंत्री सुनील बंसल का चाय पीने जाना पार्टी के कील-कांटे दुरुस्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. कार्यसमिति के उद्घाटन सत्र के मंच पर डॉ. वाजपेयी और सुनील बंसल अगल-बगल बैठे. महागठबंधन की काट के लिए अमित शाह ने यूपी में 'एक बूथ, 20 यूथ' का नारा दिया. इसमें 10 युवा दलित और पिछड़ा वर्ग के होने चाहिए.

अगले दो महीनों के दौरान पार्टी शहीद सम्मान समारोह, प्रभात फेरी, कवि सम्मेलन जैसे कार्यक्रमों के जरिए चुनावी अभियान को गति देगी. विपक्ष में रह कर सत्ता के विरोध में जातियों की गोलबंदी करने वाली भाजपा अब सत्ता में रहकर विपक्ष के विरोध में उन्हीं जातियों को कितना लामबंद कर पाती है? इसी सफलता पर भगवा टोली का चुनावी नतीजा तय होगा.

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