एडवांस्ड सर्च

भगवा खेमे को गाय की चुनौती

सरकारी सुस्ती की झलक प्रयागराज में दिख जाती है. सितंबर, 2017 में जब राज्य सरकार ने प्रयागराज में कुंभ की तैयारियां शुरू कीं, तो नगर विकास विभाग को जिले में आवारा पशुओं की देखभाल की योजना बनाने का भी निर्देश दिया था.

Advertisement
आशीष मिश्रनई दिल्ली, 15 January 2019
भगवा खेमे को गाय की चुनौती परेशानी का सबब कानपुर-झांसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर खड़े मवेशी

उत्तर प्रदेश का सीएम बनते ही योगी आदित्यनाथ ने स्लॉटर हाउस पर सख्ती का आदेश सुना दिया था. उनका फरमान मिलते ही अफसरों ने स्लॉटर हाउस पर शिकंजा तो कस दिया, पर बेसहारा और अनुत्पादक पशुओं (खासकर गोवंशीय) की देखभाल की कोई प्रभावी योजना नहीं बना सके. नतीजा, बेसहारा पशु तेजी से बढऩे लगे. ये फसलों को नुक्सान पहुंचाने लगे और सड़क दुर्घटनाओं के कारण बने. फिर इन आवारा पशुओं के खिलाफ लोगों का गुस्सा बढऩे लगा.

लोगों ने सरकारी दफ्तरों, स्कूलों, अस्पताल, पुलिस थानों में पशु बांधने शुरू कर दिए. आगरा, अलीगढ़, मेरठ, सहारनपुर, कानपुर, इलाहाबाद समेत दो दर्जन जिलों में सरकारी भवनों में जानवर बांधने गए लोगों की पुलिस-प्रशासन से भिड़ंत हुई. जाहिर है, लोकसभा चुनाव से पहले गाय के जरिए हिंदुत्व के एजेंडे को साधने में जुटी योगी सरकार के लिए गोवंश ही कानून-व्यवस्था का प्रश्न बन गया.

लोगों का गुस्सा थामने के लिए चुनावी वर्ष के पहले दिन हुई राज्य सरकार की कैबिनेट मीटिंग में गोसंरक्षण योजनाओं के लिए धन जुटाने के लिए टैक्स लगाने का निर्णय लिया गया. कैबिनेट ने आबकारी पर 'गो कल्याण सेस' लगाने के साथ मंडी शुल्क पर सेस एक फीसदी से बढ़ाकर दो फीसदी कर दिया. इसके अलावा टोल टैक्स से आधा फीसदी और फायदे वाली एजेंसियों और प्राधिकरणों से उनके लाभ में से भी 0.5 प्रतिशत टैक्स वसूला जाएगा. इन टैक्स से सरकार को सालाना 50 करोड़ रु. से अधिक का जुगाड़ होने की उम्मीद है जिनसे ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत, जिला पंचायत, नगरपालिका, नगर पंचायत, नगर निगमों में एक-एक हजार की क्षमता वाले अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल बनाए जाएंगे. पर फिलहाल तो हालात सही नहीं हैं.

सरकारी सुस्ती से बिगड़े हालात

सरकारी सुस्ती की झलक प्रयागराज में दिख जाती है. सितंबर, 2017 में जब राज्य सरकार ने प्रयागराज में कुंभ की तैयारियां शुरू कीं, तो नगर विकास विभाग को जिले में आवारा पशुओं की देखभाल की योजना बनाने का भी निर्देश दिया था. शहर में छह कांजी हाउस हैं जिसमें अधिकतम 1,200 पशु रखे जा सकते हैं. प्रयागराज नगर निगम के अनुमान के अनुसार, शहर में आवारा पशुओं की संख्या 5,000 से ज्यादा है. बीते वर्ष जनवरी में लखनऊ की तर्ज पर प्रयागराज में कान्हा उपवन बनाने का प्रस्ताव भी जमीन का इंतजाम न होने से अटका है. जिला प्रशासन कान्हा उपवन के लिए दो बार 'डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट'

(डीपीआर) शासन को भेज चुका है पर अभी तक कोई निर्णय नहीं हो सका. कुंभ को नजदीक आता देख प्रशासन ने शेरपुर में अस्थायी उपवन बनाने की तैयारी की है. प्रयागराज जिला प्रशासन के एक अफसर बताते हैं, ''नगर निगम ने कान्हा उपवन के लिए करछना तहसील में जमीन देखी थी पर शहर से दूर होने के कारण इस पर कोई निर्णय नहीं हो सका. दूरी के हिसाब से शेरपुर उपयुक्त जगह है.''

कान्हा उपवन में अफसर किस तरह खेल कर रहे हैं, इसकी बानगी बरेली के सीबीगंज स्थित कान्हा उपवन में दिखी. बेसहारा गायों को यहां रखा जाना था पर पशुओं की संख्या ज्यादा दिखाने के लिए अफसरों ने यहां कई सांड लाकर बंद कर दिए. यहां सांड के उपद्रव से 6 दिसंबर को एक बछड़े की मौत के बाद मामला खुला. कमिशनर ने इसकी जांच के आदेश दिए हैं. भारतीय किसान यूनियन के क्षेत्रीय अध्यक्ष हरनाम सिंह वर्मा बताते हैं, ''कान्हा उपवन की लगातार निगरानी न होने से अफसर इनमें बेसहारा गायों को लाने में रुचि नहीं ले रहे. नेताओं के आने की भनक मिलते ही आसपास से आवारा पशुओं को पकड़कर इनमें भर दिया जाता है.''

पर्याप्त बजट न होने से दिक्कतें

प्रदेश में 514 पंजीकृत गोशालाएं हैं. निजी संस्थाओं से संचालित इन गोशालाओं में गोवंशीय पशुओं को रखने के साथ ही बूढ़े, दुर्बल या रोगी पशुओं को रखने और इलाज की व्यवस्था भी है. लखनऊ के जानकीपुरम इलाके में नगर निगम से संचालित श्री लक्ष्मण गोशाला में 600 से अधिक गाय हैं. गायों के भोजन और अन्य व्यवस्था करने के लिए नगर निगम की ओर से प्रति गाय 40 रुपए मिलते हैं, जबकि एक गाय को दिन भर में कम से कम चार किलो भूसे की जरूरत होती है जो 80 रुपए में मिलता है. गोशाला में तैनात पशु चिकित्सक टी.एन. दीक्षित बताते हैं, ''भूसा, पशुआहार और दवाएं मिलाकर एक गाय पर औसतन रोज 150 रुपए से अधिक खर्च होता है. इस हिसाब से सरकार की मदद बहुत कम है.''

बजट की समस्या से जूझ रहीं गोशालाओं की मदद करने के लिए राज्य सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में प्रदेश के 16 नगर निगमों में गोशालाओं के लिए 17 करोड़ रु. का प्रावधान किया है. पिछले वित्तीय वर्ष में मंडी शुल्क पर एक प्रतिशत सेस से मिलने वाली राशि से 39 गोशालाओं को सात करोड़ रुपए से अधिक भरण-पोषण अनुदान दिया गया. सेवानिवृत्ति जिला पशु अधिकारी डॉ. रमेश कुमार भार्गव बताते हैं, ''जानवरों के अवैध व्यापार, स्लॉटर हाउस पर सख्ती से पिछले दो वर्षों में बेसहारा पशुओं की तादाद तीन गुनी तक पहुंच गई है पर गोशालाओं को मिलने वाले बजट में वृद्धि नहीं हुई है.

गोशालाओं की समस्याओं का मुख्यतः यही कारण है.'' बुंदेलखंड की बड़ी समस्या, अन्ना पशुओं से निबटने के लिए सपा सरकार ने 2016 में बांदा के अतर्रा, तिंदवारी और मटौंध में कान्हा पशु आश्रयस्थल के लिए तीन किस्तों में सात करोड़ रुपए से अधिक जारी किए थे. इन आश्रय स्थलों को मार्च, 2017 तक तैयार हो जाना था पर अभी तक इनका आधा निर्माण भी पूरा नहीं हुआ है. अन्ना पशुओं के खिलाफ किसानों के आंदोलन के बाद शासन ने बुंदेलखंड में अधूरे पड़े पशु आश्रय स्थलों का ब्योरा तलब किया है.

अनाथ हुआ गो सेवा आयोग

योगी ने पशुधन विभाग के पूर्व सचिव राजीव गुप्ता को जून, 2017 में यूपी में गो सेवा आयोग का अध्यक्ष बनाया था. जून, 2018 में अध्यक्ष के रूप में उनका एक वर्ष का कार्यकाल पूरा हो गया. सरकार ने न तो उनका कार्यकाल बढ़ाया और न ही किसी और को नियुक्त किया. बीते छह महीने से आयोग बगैर अध्यक्ष कार्यरत है. लखनऊ के इंदिरा भवन के दसवें तल पर चल रहा यह आयोग खुद बदहाल है. गो सेवा आयोग के सचिव और पशुपालन विभाग के संयुक्त सचिव आनंद कुमार बताते हैं, ''अध्यक्ष और सदस्य न होने से नए कार्य नहीं शुरू किए जा रहे हैं पर पुरानी सभी योजनाएं जारी हैं.'' आयोग के पास अंतहीन समस्याएं हैं.

इस विभाग के पास अपने अधिकारी कर्मचारी नहीं हैं. पशुपालन विभाग के अधिकारी ही आयोग से संबंद्घ होकर काम करते हैं. आयोग के एक अफसर बताते हैं, ''पिछड़ा वर्ग आयोग समेत अन्य कई संस्थाओं के पास खर्च के लिए एक स्वतंत्र बजट होता है. ये आयोग अपने कर्मचारियों की नियुक्ति भी स्वयं करते हैं लेकिन गो सेवा आयोग को सिर्फ दिखावे की संस्था बना कर रख दिया है.'' पशुपालन विभाग के कैबिनेट मंत्री एस.पी. सिंह बघेल बताते हैं, ''गो सेवा आयोग की स्थिति के बारे में मुख्यमंत्री कार्यालय को अवगत करा दिया गया है. जल्द ही कोई निर्णय हो जाएगा.''

लोकसभा चुनाव से पहले एक बार फिर गाय चुनावी मुद्दा बनने को तैयार है. लेकिन, इस बार भाजपा सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती गाय से जुड़ी योजनाओं को समय से पूरा करने की है.

गाय संरक्षण के फरमान की भरमार

22 मार्च, 2017: भाजपा सरकार ने अवैध बूचडख़ानों (स्लॉटर हाउस) पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया. लाइसेंसशुदा स्लॉटर हाउस में नियमों का सख्ती से पालन करने के आदेश दिए. स्लॉटर हाउस की निगरानी के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समिति बना दी गई. गो तस्करी पर भी पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के आदेश.

20 अप्रैल, 2017: मीट की दुकानों का लाइसेंस जारी करने का अधिकार 'फूड ऐंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट' (एफडीए) को सौंप दिया गया. मीट कारोबार की प्रक्रिया में बदलाव करते हुए 17 नए नियम जारी हुए. धार्मिक स्थल के आसपास मीट शॉप खोलने पर प्रतिबंध. इन दुकानों में पशुओं या पक्षियों को काटने पर भी रोक.

11 अक्तूबर, 2017: प्रदेश सरकार ने सर्वाधिक दूध उत्पादक और सबसे ज्यादा देसी गाय रखने वालों के लिए 'नंद बाबा पुरस्कार्य शुरू करने की घोषणा की. इन दोनों पुरस्कारों की राशि क्रमशः 50 हजार और एक लाख रुपए निर्धारित की गई. सबसे बड़े दूध उत्पादक को मिलने वाले गोकुल पुरस्कार की राशि डेढ़ लाख रुपए से बढ़ाकर दो लाख की गई.

5 नवंबर, 2017: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेसहारा गोवंश के संरक्षण के लिए प्रदेश के सभी जिलों में एक-एक बड़ी गोशाला खोलने की घोषणा की. इनका संचालन आम जनता की समितियों से किया जाना तय हुआ. इन गोशालाओं के निर्माण के लिए प्रत्येक जिले को 1.2 करोड़ रुपए दिए जाने का प्रावधान किया गया.

18 दिसंबर, 2017: सभी जिलों में डीएम की अध्यक्षता में गो संरक्षण समितियां गठित करने का आदेश दिया गया. एसएसपी और सीडीओ उपाध्यक्ष बनाए गए. जिलों में गोशालाओं का संचालन और देख-रेख करने के साथ गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए गोबर और गोमूत्र से बनने वाले उत्पादों को बढ़ावा देने का जिम्मा समिति को सौंपा गया.

19 दिसंबर, 2017: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में लाचार और बेसहारा घूमने वाले पशुओं के लिए गो अभयारण्य बनाने की घोषणा की. पहले चरण में 16 नगर निगमों और बुंदेलखंड के सात जिलों में अभयारण्य बनाए जाने का निर्णय लिया गया. इन अभयारण्य के लिए 100 एकड़ जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराने का आदेश दिया गया.

16 अक्तूबर, 2018: दुग्ध विकास मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने प्रदेश में देसी गाय के दूध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए दुग्ध उत्पादकों को पांच रुपए प्रति लीटर प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की. प्रदेश में दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों की संख्या भी पांच हजार से बढ़ाकर छह हजार की गई.

3 दिसंबर, 2018: प्रदेश कैबिनेट ने वर्गीकृत वीर्य से कृत्रिम गर्भाधान कराकर बछिया पैदा करने की योजना को मंजूरी दी. यह योजना प्रदेश के सभी 75 जिलों में प्रजनन योग्य देसी नस्ल के गोवंशीय पशुओं पर लागू होगी. इस योजना के तहत पशुओं की टैगिंग, फोटोग्राफी, किट से गर्भ परीक्षण भी किया जाएगा.

***

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay