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जमीन पर कब्जे का जौहर

रामपुर का मोहक्वमद अली जौहर विश्वविद्यालय इन दिनों विवादों के साये में है. ऐसे में न केवल यह विश्वविद्यालय बल्कि इसके चांसलर और सपा के कद्दावर सांसद आजम खान पर भी सियासी संकट.

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आशीष मिश्रनई दिल्ली, 05 August 2019
जमीन पर कब्जे का जौहर जौहर विश्वविद्यालय पर जमीन कब्जा करने का आरोप लगाने वाले किसान

आजादी से पहले नवाबों के दौर में रामपुर रियासत के शिक्षा निदेशक की कुर्सी संभालने वाले मौलाना मोहम्मद अली जौहर के वक्त यह इलाका तालीम का बड़ा केंद्र बन गया था. अब उन्हीं विद्वान नेता की याद में रामपुर रेलवे स्टेशन से करीब 12 किलोमीटर उîार में स्थापित मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की पहचान इसकी तालीम नहीं, बल्कि इससे जुड़े विवाद बन गए हैं. विश्वविद्यालय की उîारी सीमा की चारदीवारी से सटी फोरलेन सड़क सींगनखेड़ा गांव के मजरा आलियागंज को उससे अलग करती है. इस गांव में रहने वाले 45 वर्षीय बंदे अली कई वर्षों से अपनी दो बीघा जमीन को विश्वविद्यालय से वापस पाने की जंग लड़ रहे हैं

वे बताते हैं, ''जौहर विश्वविद्यालय के किनारे स्थित मेरी पुश्तैनी दो बीघा जमीन पर खेती होती थी. पांच साल पहले बाउंड्रीवाल खड़ी करके इस जमीन को विश्वविद्यालय में शामिल कर लिया गया जबकि जमीन से जुड़े सभी कागजात में मेरा नाम दर्ज है.’’ बीते पांच वर्षों में सरकारी कार्यालयों में दो दर्जन से ज्यादा दरख्वास्त देने के बाद निराश बंदे अली ने इस वर्ष मार्च में भी रामपुर के जिलाधिकारी आंजनेय कुमार सिंह को अपनी शिकायत सौंपी. जिलाधिकारी ने जांच कराई तो आलियागंज के कई किसानों की जमीन पर विश्वविद्यालय के नाम पर अवैध कब्जे की बात सामने आई.

राजस्व निरीक्षक मनोज कुमार ने 12 जुलाई को अजीमनगर थाने में विश्वविद्यालय का संचालन करने वाली संस्था मौलाना मोहक्वमद अली जौहर ट्रस्ट के अध्यक्ष और रामपुर से समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद आजम खान तथा उनके करीबी पूर्व सीओ सिटी, रामपुर आले हसन पर किसानों की जमीन कब्जाने के आरोप में मुकदमा दर्ज करा दिया.

बंदे अली बताते हैं, ''प्रशासन की कार्रवाई पर किसानों को पूरा ऐतबार नहीं था इसलिए सभी पीडि़त किसानों ने अपने स्तर पर भी मुकदमे दर्ज कराए.'' देखते-देखते दो दर्जन से ज्यादा मुकदमे आजम खान और आले हसन पर दर्ज हो गए.

सपा सरकार के दौरान देश में पहली बार बुंदेलखंड के जलस्रोतों की जीपीएस मैपिंग कर चर्चा में आए आइएएस अधिकारी आंजनेय कुमार सिंह अब रामपुर के जिलाधिकारी हैं. वे बताते हैं, ''किसानों की जमीन पर जबरन कब्जा करने और कोसी नदी की पांच हेक्टेयर जमीन को हथियाकर उस पर पक्का निर्माण करने के कारण आजम खान का नाम ऐंटी भूमाफिया पोर्टल में दर्ज करने का पर्याप्त आधार था.'' वैसे इससे राज्य की राजनीति में उबाल आ गया. आजम खान दावा करते हैं, ''प्रशासन बेबुनियाद आरोप लगाकर मुकदमे दर्ज करा रहा है.''

विवादों का विश्वविद्यालय

जौहर विश्वविद्यालय के चांसलर आजम खान ही हैं. 350 एकड़ से अधिक जमीन पर फैले इस विश्वविद्यालय की स्थापना 2006 में यूपी में मुलायम सिंह यादव सरकार के दौरान हुई थी.

विश्वविद्यालय का दावा है कि उसमें फैशन डिजाइनिंग, मेडिकल, इंजीनियरिंग, मास कम्युनिकेशन समेत कुल 33 पाठ्यक्रम चल रहे हैं और करीब 5,000 छात्र पढ़ रहे हैं. विश्वविद्यालय से जुड़े विवादों ने तूल तब पकड़ा जब आजम खान ने इसे अल्पसंख्यक दर्जा दिलाने का प्रयास शुरू किया. इसको लेकर पूर्व राज्यपाल टी.वी. राजेश्वर और इसके बाद बी.एल. जोशी से उनकी खूब तकरार हुई.

आजम को सफलता 2014 में मिली जब उनके करीबी और उत्तराखंड के तत्कालीन राज्यपाल अजीज कुरैशी को यूपी का भी कार्यभार दिया गया. कुरैशी ने जुलाई, 2014 में जौहर विश्वविद्यालय को अल्पसंख्यक दर्जा देने संबंधी विधेयक को मंजूरी दे दी. अपने स्थापना से ही विश्वविद्यालय पर जमीन कब्जाने के आरोप लगते रहे हैं. आंजनेय कुमार बताते हैं, ''जौहर विश्वविद्यालय 78 हेक्टेयर जमीन पर फैला है. इनमें 34 हेक्टेयर जमीन सरकारी है या फिर दलितों से ली गई है. कोसी नदी के किनारे की छह हेक्टेयर जमीन पर भी अवैध कब्जा किया गया है.'' नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने जौहर यूनिवर्सिटी से कोसी नदी में अतिक्रमण और पर्यावरण की शिकायतों की जांच संयुक्त समिति से कराने का आदेश दिया है.

शिकायतों की फेहरिस्त लंबी होती जा रही है. विश्वविद्यालय में सरकारी खर्च से बनी रोड, गेस्ट हाउस, सीवरेज लाइन और सिस्टम जैसे व्यवस्थाएं स्थापित करने की जांच स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआइटी) के हवाले है. आजम खान पर लगे आरोपों की जांच के लिए सपा का 21 सदस्यीय जांच दल रामपुर का दौरा करके लौटा है. इसमें शामिल एक विधायक बताते हैं, ''नदी की जिस जमीन पर जौहर ट्रस्ट का अवैध कब्जा बताया गया है असल में वह सरकार से खरीदी हुई है. इसके लिए 40 लाख रुपयों का भुगतान हुआ है. बावजूद इसके ट्रस्ट को दो हेक्टेयर जमीन कम दी गई है.'' अब तक 106 करोड़ रु. विश्वविद्यालय के लिए विभिन्न विभागों से स्वीकृत कराया जा चुका है.

इसमें सांसद निधि, विधायक निधि, त्वरित विकास निधि शामिल हैं. निजी संस्था पर सरकारी धन लुटाने की जांच भी प्रशासन ने शुरू कर दी है. रामपुर जिले में भाजपा के प्रभारी डॉ. चंद्रमोहन कहते हैं, ''आम जनता का धन उपयोग करने के बावजूद विश्वविद्यालय में किसी को अंदर जाने की इजाजत नहीं है. यहां क्या पढ़ाया जा रहा है? कौन पढ़ा रहा है? कौन पढ़ रहा है? इसकी भी जांच होनी चाहिए.''

अधिकारियों की मेहरबानी

आलियागंज के किसान मोहम्मद आलिम ने एफआइआर में पूर्व सीओ सिटी आले हसन खान और पूर्व अजीमनगर थानाध्यक्ष कुशलवीर सिंह पर भूमि का बैनामा कराने के लिए दबाव डालने और पीटने का आरोप लगाया है. वे कहते हैं, ''पूर्व सीओ और थाना प्रभारी ने मुझे एक दिन हवालात में बंद रखा. जमीन न देने पर चोरी, चरस और स्मैक के झूठे मुकदमे में जेल भेजने की धमकी दी. इसके बाद भी जब जमीन का बैनामा जौहर विश्वविद्यालय के पक्ष में नहीं हुआ तो जबरन कब्जा कर लिया गया.'' जमीन कब्जा करने के आरोपों में हसन पर 30 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हुए हैं. रामपुर के पुलिस अधीक्षक अजय पाल शर्मा बताते हैं, ''आले हसन का लुकआउट नोटिस जारी किया गया है ताकि वह विदेश न भाग सके.''

अधिकारियों ने रामपुर के सींगनखेड़ा गांव में सार्वजनिक उपभोग वाली करीब सात हेक्टेयर रेत की जमीन को नवीन परती भूमि बताकर शासन को रिपोर्ट भेजी थी. शासन ने 2013 में इस जमीन को जौहर ट्रस्ट के संयुक्त सचिव नसीर अहमद खान के नाम 30 वर्ष के लिए पट्टा कर दिया.

उप-जिलाधिकारी सदर की अदालत ने अब पट्टा निरस्त कर दिया है. रामपुर स्वार रोड पर बने उर्दू गेट को जल निगम की इकाई कंस्ट्रक्शन ऐंड डिजाइन सर्विसेज (सीऐंडडीएस) की 'सेनटेज' धनराशि से बनाने पर भी सवाल खड़े हुए हैं.

उत्तर प्रदेश जल निगम की निर्माण इकाइयों को जितने भी प्रोजेक्ट मिलते हैं, उनको पूरा करने के लिए प्रोजेक्ट की लागत का 12.50 फीसद सेनटेज यानी कमिशन दी जाती है.

कमिशन का उपयोग कर्मचारियों के वेतन एवं विभागीय खर्च में किया जाता है. आंजनेय कुमार कहते हैं, ''जिस तरह से रामपुर में सीऐंडडीएस के जरिए निर्माण कार्य कराया गया इसकी भी जांच की जा रही है. दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई होगी.'' शासन को भेजी रिपोर्ट में जिला प्रशासन ने जमीन के सर्किल रेट में हेर-फेर की बात कही है. रिपोर्ट के अनुसार, सींगनखेड़ा में खरीदी गई जमीन के सर्किल रेट कई बार बदले गए और नगरपालिका परिषद के अधिकारी शत्रु संपत्ति को वफ्फ की संपत्ति बनाने के फर्जीवाड़े में शामिल थे.

सपा जांच दल के सदस्य और विधान परिषद सदस्य राजपाल कश्यप कहते हैं, ''रामपुर में भाजपा सरकार बदले की भावना से काम कर रही है. विश्वविद्यालय से जुड़ी सभी संपत्ति, जमीन के दस्तावेज जौहर ट्रस्ट के पास हैं. जल्द ही असलियत सबके सामने आ जाएगी.''

मिट रही नवाबों की निशानी

भारत में विलय करते वक्त रामपुर के नवाब ने अपनी संपत्ति की पांच सूचियां बनाई थीं. पांचवीं सूची यानी शिड्यूल पांच की संपत्ति को उन्होंने किसी को नहीं सौंपा था. उन्होंने तत्कालीन कलेक्टर को इन संपत्ति का कस्टोडियन बनाया था.

रामपुर किले के पूर्वी गेट पर मौजूद मदरसा आलिया शिड्यूल पांच की संपत्ति में शामिल था. रामपुर रियासत का यह पहला कॉलेज था जिसकी सनद जामिया अजहर, मिस्र में मान्य थी. आजादी के बाद से मदरसा आलिया को राज्य सरकार से ग्रांट मिलती थी. वर्ष 2001 में राजनाथ सिंह यूपी के मुख्यमंत्री बने थे तो उन्होंने इसे अरबी विश्वविद्यालय बनाने की घोषणा की थी.

बाद में मुलायम सिंह यादव सरकार बनने के बाद इसकी ग्रांट बंद हो गई. 2014 में रामपुर की तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक मायादेवी ने गलत ढंग से लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को मदरसा आलिया का मालिक बना दिया.

इसके बाद पीडब्ल्यूडी ने इसे जौहर ट्रस्ट को पट्टे पर दे दिया. मदरसा आलिया बचाओ संघर्ष समिति और पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खान ने सपा सरकार के दौरान मदरसा आलिया की लाइब्रेरी से बहुमूल्य पुस्तकों के चोरी होने का आरोप लगाया था. मदरसा आलिया के प्रिंसिपल जुनैद खान ने इसकी पुलिस में रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी. एसपी अजय पाल शर्मा के नेतृत्व में पुलिस ने 30 जुलाई को जौहर यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी में छापा मारा. दस घंटे की कार्रवाई में पुलिस ने 2,000 से ज्यादा किताबें जब्त कीं. पुलिस का दावा है कि ये किताबें मदरसा आलिया की हैं.

जौहर विश्वविद्यालय के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और स्वार से विधायक अब्दुल्ला आजम का आरोप है कि पुलिस किताबें अपने साथ लेकर आई थी और प्रशासन पूर्वाग्रह से काम कर रहा है. पुलिस कार्रवाई में बाधा पहुंचाने के आरोप में अब्दुल्ला को हिरासत में ले लिया गया.

वहीं रामपुर में नवाबों के समय की संस्थाओं के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है (देखें बॉक्स). स्वार रोड पर स्थित यतीमखाना के अस्तित्व की जंग लड़ रहे रामपुर के युवा कांग्रेसी फैसल लाला कहते हैं, ''रामपुर में नवाबों के समय के बने सात प्राचीन गेट थे. शहर के सभी चारों कोनों पर एक-एक गेट थे, पर अब किसी का भी अस्तित्व नहीं बचा है. रामपुर की पूरी पहचान बदल कर रख दी गई है.''

सितंबर, 2012 में जौहर विश्वविद्यालय के उद्घाटन समारोह में शिरकत के लिए भेजे न्योता पत्र में आजम खान ने लिखा था, ''मेरा मिशन जिन हालात से गुजरा है उसका तसव्वुर भी बहुत खौफनाक है. बहुत कम है जो आप जानते हैं, बहुत ज्यादा है जो मैं जानता हूं, सहता रहा हूं और अब भी सह रहा हूं.'' अब संकट के दौर में आजम खान किस सहनशीलता के साथ लग रहे आरोपों से खुद को पाक-साफ साबित कर पाते हैं, उसी से उनका सियासी कद तय होगा.

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