एडवांस्ड सर्च

मंदिर नहीं तो अयोध्या ही सही

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीवापली के एक दिन पहले अयोध्या में भव्य दीपोत्सव मनाकर पार्टी की भविष्य की रणनीति का संकेत दिया.

Advertisement
aajtak.in
आशीष मिश्र नई दिल्ली, 25 October 2017
मंदिर नहीं तो अयोध्या ही सही उत्सव की रोशनी दीपावली की पूर्वसंध्या पर अयोध्या में रोशनी नहाया सरयू घाट

लखनऊ से गोरखपुर जाने वाले 280 किमी लंबे फोर लेन नेशनल हाइवे नंबर 28 के ठीक बीचोबीच एक सड़क अयोध्या की ओर मुड़ती है, सरयू नदी के समानांतर बना यह रास्ता अयोध्या में विकास कार्यों के बीच चल रही राजनैतिक रस्साकशी का गवाह है. हाइवे से करीब दो किलोमीटर चलने के बाद दाहिनी ओर सफेद रंग का आलीशान भवन दिखाई देता है. यह अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय है.

केंद्र में कांग्रेस सरकार के दौरान 12वें वित्त आयोग से मिले 12 करोड़ रुपए से यह भवन जनवरी, 2015 में बन कर तैयार हो गया था. भवन के मुख्य गेट के बाहर लाल रंग में पिछली समाजवादी पार्टी (सपा) सरकार के नारे 'उम्मीदों का प्रदेश उत्तर प्रदेश' लिखे दो लोहे के साइन बोर्ड खड़े हैं. इन बोर्डों पर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का चित्र भी लगा था, जिसे काले पेंट से छिपा दिया गया है.

ये बोर्ड बताते हैं कि अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय में राम कथा से जुड़ी गैलरियों, राम दरबार, और गुमनामी बाबा से जुड़ी वस्तुओं के प्रदर्शन के लिए शो-केस के निर्माण के लिए पिछली सपा सरकार ने धन मुहैया कराया था. रामकथा संग्रहालय इस मामले में भी महत्वपूर्ण है कि 6 दिसंबर, 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद के ढहाने से पहले यहां हुई खुदाई में मिले अवशेष सुरक्षित रखे गए हैं. बावजूद इसके पिछले ढाई वर्ष से यह भवन लोकार्पण की बाट जोह रहा है.

भवन से आगे बढ़ते ही दाहिनी ओर सरयू के ठीक किनारे मौजूद रामकथा पार्क के दिन बहुर चुके हैं. 18 वर्ष पहले 27 मार्च, 1999 को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने 'ओपन एयर थियेटर' वाले इस रामकथा पार्क का लोकार्पण किया था. उत्तर प्रदेश में जैसे ही भाजपा का वनवास शुरू हुआ, यह पार्क भी गर्दिश में आ गया. अब इसके दिन बहुरे हैं. यही वह जगह है, जहां पर 18 अक्तूबर को छोटी दीपावली के दिन दीपोत्सव मनाने अयोध्या में जुटे राज्यपाल राम नाईक और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उडऩखटोले (हेलिकॉप्टर ) से उतरे 'भगवान राम' की अगवानी की. यह रामकथा पार्क केंद्र सरकार की उस स्वदेश योजना का भी हिस्सा है जिसके तहत अयोध्या में सरयू नदी के किनारे रामकथा गैलरी का निर्माण होगा.

यहां भगवान राम का दरबार सजेगा. एक डिजिटल गैलरी बनेगी, जिसमें भगवान राम का जीवनवृत्ति उकेरा जाएगा और इसी रामकथा पार्क के ओपन एयर थिएटर में अनवरत चलने वाली 'डिजिटल होलोग्राफिक' रामलीला का भी मंचन होगा. इतना ही नहीं, सरकार ने अयोध्या के विकास के लिए पहली बार एक साथ कुल 133 करोड़ रुपए की योजनाएं शुरू करके (देखें ग्राफिक्स) अपना एजेंडा स्पष्ट कर दिया है.

एक रणनीति के तहत छोटी दीपावली पर राम जन्मभूमि में बने अस्थायी मंदिर में पहला दीपक जलते ही सरयू नदी के किनारे करीब दो लाख दीपक जला दिए गए. अयोध्या के साकेत महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य वी.एन. अरोड़ा बताते हैं, ''भाजपा का अयोध्या में राम मंदिर बनाने का वादा न्यायालय की सीमाओं में बंधा हुआ है. पूरी भाजपा सरकार ने अयोध्या में दीपावली मनाकर मंदिर मुद्दे को जिंदा और प्रासंगिक बनाए रखने की कोशिश की है. गुजरात और हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भी इसे भुनाया जाएगा.''

प्रतीकों से संदेश

उत्तर प्रदेश की सत्ता संभालने के दो महीने बाद 31 मई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या पहुंचे. पिछले 15 वर्ष के दौरान यह पहला मौका था जब प्रदेश के किसी मुख्यमंत्री ने रामलला के दर्शन किए थे. इसके ठीक एक दिन पहले मुख्यमंत्री ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद ढहाने के मामले में सीबीआइ कोर्ट में पेश होने लखनऊ आए पूर्व उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी समेत कई लोगों की अगवानी की थी.

मुख्यमंत्री के तौर पर अपने पहले अयोध्या दौरे में योगी आदित्यनाथ उन सभी स्थानों पर गए जो राम मंदिर आंदोलन के केंद्र बिंदु थे. आंदोलन के दौरान योगी के गुरु महंत अवैद्यनाथ ने सरयू के जल से हजारों लोगों को श्रीराम जन्म स्थल की मुक्ति और वहां भव्य राम मंदिर बनाने का संकल्प दिलाया था. नया घाट इलाका कारसेवकों और सुरक्षा बलों के बीच संघर्ष का केंद्र था. योगी आदित्यनाथ ने यहां सरयू नदी की पूजा करके अपनी सरकार की भविष्य की रणनीति का संकेत दे दिया था.

अयोध्या के प्रतिष्ठित तिवारी मंदिर के महंत गिरीश पति त्रिपाठी बताते हैं, ''मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भले ही सीधे तौर पर राम मंदिर निर्माण की बात करने से बच रहे हों लेकिन राम मंदिर से जुड़े प्रतीकों से जुड़ाव जाहिर कर वे मंशा स्पष्ट कर रहे हैं.'' मुख्यमंत्री एक रणनीति के तहत यह बताना चाह रहे हैं कि वे न तो अयोध्या को भूले हैं और न ही यहां से जुड़ी उन आकांक्षाओं को, जिन्हें पूरा करने के लिए देश के बहुसंख्यकों को आंदोलन करना पड़ा था.

छोटी दीपावली पर सरयू के घाट पर दीपोत्सव और नया घाट के किनारे रामकथा गैलरी का शिलान्यास और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दिगंबर अखाड़े में भव्य बहुद्देशीय हॉल का शिलान्यास करना जाहिर करता है कि राम जन्मभूमि पर न्यायालय का फैसला आने तक भाजपा प्रतीकों के सहारे इस मुद्दे को जिंदा रखना चाहती है.

हेरिटेज सिटी की राह

अयोध्या में दीपोत्सव मनाने की योजना के मुख्य सूत्रधार अवध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मनोज दीक्षित हैं. मई में अवध विश्वविद्यालय के कुलपति का पद संभालने से पहले दीक्षित लखनऊ विश्वविद्यालय के पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन विभाग के प्रमुख थे. 2013 में दीक्षित ने—सरयू अवध बालक सेवा समिति बनाकर विश्व पटल पर अयोध्या की सांस्कृतिक पहचान को स्थापित करने की शुरुआत की थी.

अयोध्या में कंचन महल से नागेश्वरनाथ मंदिर तक 'हेरिटेज वॉक', सरयू गंगा दशहरा जैसे कार्यक्रम शुरू हुए. इन्हीं कार्यक्रमों के अगले चरण के रूप में छोटी दीपावली पर दीपोत्सव का आयोजन हुआ. दीक्षित अब अयोध्या को विश्व धरोहर 'हेरिटेज सिटी' के रूप में विकसित करने की मुहिम में जुट चुके हैं. इस मुहिम में उनके साथ बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में भूगोल विभाग के प्रमुख प्रोफेसर राणा पी.बी. सिंह और यूनेस्को की इकाई 'इंटरनेशनल काउंसिल ऑन मॉन्यूमेंट्स ऐंड साइट' (आइकोमॉस) के सदस्य सर्वेश कुमार शामिल हैं. अयोध्या में हेरिटेज सिटी से जुड़ा सर्वे कार्य पूरा हो चुका है और करीब 400 पन्नों की एक रिपार्ट अपने अंतिम चरण में है.

अयोध्या को विश्व धरोहर का दर्जा दिलाने का अगला पड़ाव अगले वर्ष अक्तूबर में पूरा होगा जब यहां पर 'एशियन कल्चर लैंडस्केप एसोसिएशन' (एसीएलए) की पहली बैठक होगी. दीक्षित बताते हैं, ''अयोध्या को हेरिटेज सिटी का दर्जा मिलने के बाद यह देश में अहमदाबाद के बाद दूसरा शहर होगा.'' अयोध्या में अभूतपूर्व धूमधाम के साथ दीपोत्सव मानने के बाद भाजपा सरकार रामनगरी में होने वाले धार्मिक आयोजनों को एक नया कलेवर देने की तैयारियों में जुट गई है. संगम नगरी इलाहाबाद की तर्ज पर प्रदेश सरकार ने अयोध्या में भी एक मेला प्राधिकरण गठित करने की संभावना तलाशनी शुरू कर दी है.

अयोध्या जिला प्रशासन के एक अधिकारी बताते हैं, ''अयोध्या में हर वर्ष रावनवमी, सावन झूला और कार्तिक पूर्णिमा पर तीन प्रांतीय मेले होते हैं, जिनमें लाखों श्रद्धालु आते हैं. श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए यहां पर अयोध्या मेला प्राधिकरण गठित करने का एक प्रस्ताव तैयार करके सरकार को भेजा जाएगा.'' इतना ही नहीं, श्रद्धालुओं की संख्या में इजाफा करने के लिए अयोध्या से चित्रकूट के बीच 230 किलोमीटर लंबा सिक्स लेन एक्सप्रेसवे बनाने पर विचार हो रहा है जिसे रामपथ के नाम से जाना जाएगा.

पत्थरों की जुटान

अयोध्या में दीपोत्सव की चकाचौंध के बीच कारसेवकपुरम की कार्यशाला में राम मंदिर के लिए पत्थर तराशने का काम धीमा पड़ा है. कार्यशाला पर्यटकों से तो गुलजार है लेकिन पत्थर तराशने का काम एक ही कारीगर के हवाले है. कार्यशाला के प्रभारी गिरीश भाई सोमपुरा बताते हैं, ''मंदिर की दीवारों और छत के लिए पत्थर तराशे जा चुके हैं. करीब 60 फीसदी काम पूरा हो चुका है.'' यहां से आधा किमी दूर रामसेवकपुरम में मौजूद दूसरी कार्यशाला में सरगर्मियां बढ़ गई हैं. पिछले दो महीनों के दौरान यहां दो दर्जन ट्रक राजस्थान से पत्थर लेकर आ चुके हैं और इनके आने का सिलसिला जारी है.

श्री राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपालदास बताते हैं, ''राम जन्मभूमि पर 265.5 फुट लंबा, 140 फुट चौड़ा और 128 फुट ऊंचा मंदिर बनना है. इसके लिए 1,75,000 घन फुट पत्थर की जरूरत है. जिसमें से एक लाख घन फुट पत्थर रामसेवकपुरम पहुंच चुके हैं.'' श्री राम जन्मभूमि न्यास के एक सदस्य के मुताबिक, पहले दान की राशि से राजस्थान की बंशी पहाड़ी से पत्थर खरीदा जा रहा था. विपक्षी सरकारों ने जब खरीद और पत्थरों के परिवहन पर अड़ंगा लगाना शुरू किया तो न्यास ने 2014 में पत्थर खरीदने की बजाए दानदाताओं से पत्थर मंगाने का निर्णय लिया.

अयोध्या में विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता शरद शर्मा बताते हैं, ''प्रदेश की पूर्व सपा सरकार के दौरान वाणिज्यकर विभाग ने पत्थरों के लाने में काफी रोड़े अटकाए पर अब भाजपा सरकार और जीएसटी लागू होने के बाद राजस्थान से अयोध्या में पत्थर लाना काफी आसान हो गया है.'' आने वाले दिनों में रामसेवकपुरम में कुल 500 ट्रक पत्थर और आएंगे. मंदिर निर्माण पर आगे की रणनीति तय करने के लिए विश्व हिंदू परिषद की धर्म संसद की बैठक नवंबर के अंतिम हफ्ते में कर्नाटक के उडुपी में हो रही है. शर्मा बताते हैं, ''इस बैठक में तय होगा कि कार्यसेवकपुरम में पत्थर तराशने के कार्य को कितना तेज करना है.''

राजनीति की बिसात

अयोध्या में विकास कार्यों के शिलान्यास के साथ विवाद भी शुरू हो गए हैं. श्रीराम अस्पताल में नए बने आइसीयू भवन के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों लोकार्पण से पहले 10 अक्तूबर की रात सपा नेताओं ने अपना शिलापट लगा दिया. यह वही शिलापट था, जिसके जरिए पूर्व मंत्री और अयोध्या से पूर्व विधायक पवन पांडेय ने विधानसभा चुनाव के एक दिन पहले 4 जनवरी को आइसीयू का लोकार्पण किया था. हालांकि चुनाव घोषित होने के बाद यह शिलापट् आइसीयू में नहीं लगाया गया था. पांडेय बताते हैं, ''अयोध्या में सपा सरकार की योजनाओं का दोबारा लोकार्पण करके मुख्यमंत्री जनता के साथ मजाक कर रहे हैं.''

फैजाबाद से भाजपा सांसद लल्लू सिंह, पांडेय के सभी आरोपों को खारिज करते हैं. वे कहते हैं ''पूर्ववर्ती सपा सरकार ने अयोध्या में केवल घोषणाएं कीं, लेकिन काम नहीं किया. अब जब भाजपा सरकार ने अयोध्या में नगर निगम बनाने के साथ विकास की अन्य योजनाएं शुरू कीं तो सपाई परेशान हो गए हैं.'' अयोध्या और फैजाबाद नगर पालिका परिषद को मिलाकर अयोध्या नगर निगम बनने के बाद यहां महापौर के चुनाव की बिसात भी बिछ गई है. राजनैतिक मुद्दों की फसल उगाते-उगाते बांझ हो चुकी अयोध्या में विकास का खाद-पानी डाला जा रहा है. इस बार की फसल कैसी होगी यह तो वक्त ही बताएगा.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay