एडवांस्ड सर्च

उत्तराखंड-हिमाचल प्रदेश-पर्यटकों से पस्त पहाड़

इस बार उमड़ रही भीड़ से जोशीमठ और उत्तरकाशी में डीजल-पेट्रोल की आपूर्ति लडख़ड़ा गई. रोजाना करीब 10-10,000 तीर्थयात्री यमुनोत्री और गंगोत्री धाम पहुंच रहे हैं. चारधाम यात्रा के दो प्रमुख धाम के उत्तरकाशी जिले में मौजूद होने के कारण यात्री वाहनों का सर्वाधिक ठहराव उत्तरकाशी में ही है.

Advertisement
aajtak.in
संध्या द्विवेदी नई दिल्ली, 18 June 2019
उत्तराखंड-हिमाचल प्रदेश-पर्यटकों से पस्त पहाड़ नैनीताल बड़ी संख्या में गाडिय़ों की आवाजाही से झीलों के शहर नैनीताल की यातायात व्यवस्था चरमरा गई

महाराष्ट्र के जलगांव के राजेंद्र शाहू बड़े उत्साह के साथ तीर्थयात्रा पर निकले थे, लेकिन उनका सारा उत्साह उत्तराखंड में आकर काफूर हो गया. दरअसल, राज्य में इन दिनों सड़कों पर जगह-जगह भयानक जाम लग रहा है और बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी हो गई है. राजेंद्र बताते हैं, ''यहां न तो जाम ने हमारा पीछा छोड़ा, न ही मंदिरों में लगी लंबी लाइनों ने.'' मध्य प्रदेश के इंदौर से उत्तराखंड आए प्रवीण का चार धाम यात्रा का अनुभव ऐसा ही रहा. भन्नाए राजेंद्र और प्रवीण ने मसूरी, नैनीताल और हरिद्वार की सैर का अपना कार्यक्रम बीच में ही छोड़ दिया. उत्तराखंड ही नहीं, हिमाचल प्रदेश में भी कमोबेश ऐसे ही हालात हैं.

तीर्थयात्रा और पर्यटन सीजन में, हरिद्वार हो या नैनीताल, या फिर चारधाम यात्रा, उत्तराखंड में हर रूट जाम से हलकान है. कई स्थानों पर सैलानियों की भारी भीड़ की वजह से स्वास्थ्य चिकित्सा, पेयजल, परिवहन, आवास और शौचालय जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं. इससे सैलानी बेहाल हैं.

इस बार उमड़ रही भीड़ से जोशीमठ और उत्तरकाशी में डीजल-पेट्रोल की आपूर्ति लडख़ड़ा गई. रोजाना करीब 10-10,000 तीर्थयात्री यमुनोत्री और गंगोत्री धाम पहुंच रहे हैं. चारधाम यात्रा के दो प्रमुख धाम के उत्तरकाशी जिले में मौजूद होने के कारण यात्री वाहनों का सर्वाधिक ठहराव उत्तरकाशी में ही है. बद्रीनाथ मार्ग के एक मुख्य नगर रुद्रप्रयाग में तथा उसके आसपास के नौ पेट्रोल पंपों पर सामान्य दिनों में औसतन 10,000 लीटर पेट्रोल और 30,000 लीटर डीजल की खपत होती है, मगर इन दिनों वहां पेट्रोल की मांग 30,000 और डीजल की मांग 80,000 लीटर तक पहुंच गई है. वहीं, जोशीमठ में यात्रा मार्ग पर अधिकतर बैंकों के एटीएम में यात्रियों को धनराशि उपलब्ध नहीं हो पा रही है. जनपद चमोली में 69 एटीएम हैं, जिनमें प्रति दिन करीब पांच करोड़ रु. कैश डाला जाता है.

राज्य में पार्किग की समस्या भी विकराल बन गई है. यही नहीं, पर्यटकों की भीड़ उमडऩे से होटल संचालकों ने भी कमरों के किराए में मनमानी बढ़ोतरी करनी शुरू कर दी. मसूरी में होटल, गेस्ट हाउस, धर्मशालाओं के पैक होने से जून के पहले सप्ताहांत में तो पर्यटक खुले आसमान के नीचे रात गुजारने के लिए मजबूर दिखे.

उत्तराखंड के विभिन्न धामों में इस साल 12 जून तक 18,56, 490 तीर्थयात्री पहुंच चुके थे. मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के अनुसार, इस वर्ष अनुमान से बहुत ज्यादा श्रद्धालु और पर्यटक राज्य में आए हैं. सरकार पर्यटकों की बढ़ती संख्या को एक अच्छे अवसर के तौर पर देखती है, लेकिन इसके अनुरूप इन्फ्रास्ट्रक्चर तथा अन्य पर्यटन सुविधाएं विकसित करने की जरूरत है.

उत्तराखंड के मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों को कमियों को दूर करने के निर्देश दिए हैं. लेकिन जाहिर है, सरकार इसको लेकर बहुत गंभीर नजर नहीं आ रही.

हिमाचल प्रदेश में भी सैलानियों की भीड़ इस कदर उमड़ रही है कि पर्यटक स्थलों की सड़कें भी कम पड़ गईं. शिमला, मनाली और धर्मशाला में न सिर्फ रहने के लिए होटल कम पड़ गए हैं, बल्कि यहां आने वाले सैलानियों की गाडिय़ां बमुश्किल अपने गंतव्य की ओर बढ़ पा रही हैं. राजधानी शिमला को छोड़कर कुल्लू, मनाली, धर्मशाला और मैक्लोडगंज में ट्रैफिक समस्या से पर्यटक ही नहीं बल्कि स्थानीय बाशिंदे भी खासा परेशान हैं.

गाडिय़ों का बोझ छोटे शहर भी संभाल नहीं पा रहे हैं. शिमला में मई-जून में सामान्य स्थिति से तीन गुना ज्यादा गाडिय़ां हो गई हैं, जबकि यहां पार्किंग की जगह ही नहीं है. स्थानीय लोग सड़क किनारे गाडिय़ां खड़ी करते हैं और बाहर के वाहनों के लिए जगह नहीं है. शहर में वैकल्पिक मार्ग भी नहीं है, इसलिए पूरा दबाव सर्कुलर रोड पर है. कालका से शिमला तक फोरलेन का काम चल रहा है. इस कारण सोलन पुलिस के पसीने छूट रहे हैं.

हालांकि, शिमला की स्थिति से निबटने के लिए उपायुक्त शिमला अमित कश्यप ने खुद मोर्चा संभाला है. पर्यटकों की संक्चया को देखते हुए ट्रैफिक व्यवस्था संभालने के लिए उन्होंने 100 पुलिसकर्मी तैनात किए हैं. शोघि से शिमला तक पूरा दिन ट्रैफिक राइडर पेट्रोलिंग कर रहे हैं. सुबह 8 से रात 10 बजे तक पिकअप की एंट्री बंद कर दी गई है. वे खुद स्कूलों का दौरा कर स्थिति का मुआयना कर रहे हैं. इसके अलावा उपायुक्त शिमला ने यह भी निर्देश दिए हैं कि सड़क के किनारे खड़े वाहनों का तत्काल चालान कर दिया जाए.

जो इंतजाम शिमला में हुए हैं, वे कुल्लू, मनाली और मैक्लोडगंज में नहीं हैं. वहां पर्यटक परेशान हैं और गाडिय़ां 3 से 4 घंटे तक जाम में रेंग रही हैं. रोहतांग में स्थिति और भी बदतर है.

एनजीटी ने शिमला, धर्मशाला और मनाली जैसे पर्यटक स्थलों पर निर्माण पर रोक लगा दी है. इसलिए कोई अब कोई नए होटल नहीं बना सकता और ऐसे में ठहरने के लिए कमरे भी कम पड़ गए हैं. वहीं जो हेलिटैक्सी चलाई थी, वह भी महज छलावा साबित हुई. हेलिटैक्सी अभी काम नहीं कर रही, इसलिए सारा दबाव गाडिय़ों और सड़कों पर है. वहीं, शिमला में कई टन बिखरा कचरा निगम की कार्यप्रणाली की पोल खोल रहा है. कुल मिलाकर 50,000 की आबादी के लिए बना शिमला 3,00,000 लोगों का बोझ नहीं ढो पा रहा.

गर्मियों के दिनों में पिछले वर्ष शिमला में पानी की दिक्कत आई थी. हालांकि, इस बार मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने लगाम कसी है, लेकिन वे फिलहाल यूरोप के दौरे पर हैं. उनकी गैरमौजूदगी की वजह से निचले स्तर पर कुछ कोताही दिख रही है, मानो वे भी गर्मी से परेशान हों. खासकर पर्यटन विभाग की ओर से सैलानियों के लिए कोई विशेष प्रयास नहीं किया गया है. बड़ोग हो या पीटरहॉफ या फिर शिमला; इन पर्यटक स्थलों से बेहतर सेवाएं विभाग के बजाए निजी होटल व्यवसायी दे रहे हैं.

जाहिर है, एक ओर जहां गर्मी से राहत पाने या फिर तीर्थयात्रा के लिए लोग बड़ी संख्या में इन पहाड़ी राज्यों की ओर रुख कर रहे हैं, वहीं यहां की सरकार उनके लिए समुचित व्यवस्था नहीं कर पाई है. नतीजतन, दोनों राज्यों के हालात चरमरा गए हैं और केवल बाहरी सैलानी ही नहीं बल्कि स्थानीय बाशिंदे भी इससे हलकान हैं.

***

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay