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और कस गया शिकंजा

जेट एयरवेज को खरीदने के लिए उसके कर्मचारियों का एक समूह और लंदन की एडिग्रो एविएशन बोली लगाने को तैयार है. हिंदुजा-एतिहाद समूह, टाटा ग्रुप और कतर एयरवेज भी रुचि दिखा रहे हैं.

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मनु कौशिक और दीपक के. मंडलनई दिल्ली, 17 July 2019
और कस गया शिकंजा खतरे की उड़ान जेट एयरवेज के पूर्व चेयरमैन नरेश गोयल

गृह मंत्रालय से चौकसी का सर्कुलर, सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (एसएफआइओ) और आयकर विभाग की ओर से जांच—जेट एयरवेज के पूर्व चेयरमैन नरेश गोयल इस साल मार्च में एयरलाइन के बंद होने के बाद से जांच एजेंसियों के घेरे में हैं. गृह मंत्रालय के नोटिस के चलते गोयल को मई में दुबई जाने वाले विमान से उतार दिया गया. गोयल ने नोटिस के खिलाफ जब चुनौती दी तो दिल्ली हाइकोर्ट ने 9 जुलाई को आदेश दिया कि वे बतौर गारंटी 18,000 करोड़ रु. जमा कराएं जो उन्होंने जेट एयरवेज के नाम पर कर्ज लेकर चुकाए नहीं हैं, तभी वे विदेश यात्रा कर सकते हैं. 4 जुलाई को कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने एसएफआइओ को गोयल की ओर से पैसों के हेरफेर की जांच के लिए खुली छूट दे दी. यह जांच छह महीने में पूरी करनी है.

जेट एयरवेज के बंद होने से उड्डयन क्षेत्र में असंतुलन पैदा हो गया है—तीन महीनों से किरायों में काफी वृद्धि हुई है. वैसे जेट के प्रतिद्वंद्वी आक्रामक रूप से क्षमता बढ़ाने में जुट गए हैं. स्पाइसजेट ने अप्रैल-मई में अपने बेड़े में 25 विमान बढ़ा लिए तथा एक साल में 35 और विमान शामिल कर लेगा. इंडिगो इतने ही वक्त में अपने बेड़े में 65 विमान शामिल करने जा रहा है. जेट एयरवेज के बाजार का हिस्सा और एयरपोर्ट के निर्धारित समय (स्लॉट) को पहले ही झपट लिया गया है—इंडिगो घरेलू बाजार के 49 फीसद हिस्से पर काबिज हो चुका है, इसके बाद स्पाइसजेट का नंबर (14.8 फीसद) आता है.

जेट एयरवेज के किसी खरीदार की तलाश में कई महीनों की असफल कोशिश के बाद जून में जेट एयरवेज के कर्जदाताओं ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) के समक्ष दिवालिया का आवेदन दिया. 20 जून को एनसीएलटी ने उसे स्वीकार कर लिया और कार्यवाही को पूरा करने के लिए तीन महीने की सीमा निर्धारित की. जेट एयरवेज को खरीदने के लिए उसके कर्मचारियों का एक समूह और लंदन की एडिग्रो एविएशन बोली लगाने को तैयार है. हिंदुजा-एतिहाद समूह, टाटा ग्रुप और कतर एयरवेज भी रुचि दिखा रहे हैं. पर जेट एयरवेज के भारी-भरकम कर्ज और 16 विमानों की सीमित संपत्ति के अलावा एयरपोर्टों के उसके स्लॉटों को बांट दिए जाने से यह स्पष्ट नहीं कि उसकी नीलामी का क्या स्वरूप होगा.

—मनु कौशिक और दीपक के. मंडल

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