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तेलंगाना-महंगी न पड़ जाए सिंचाई

कांग्रेस पहले ही बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा रही है. कांग्रेस विधायक दल के नेता एम.बी. विक्रमार्क कहते हैं, ''केसीआर ने केएलआइएस में हेरफेर अपने परिवार को फायदा पहुंचाने के लिए किया.

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अमरनाथ के. मेनननई दिल्ली, 24 June 2019
तेलंगाना-महंगी न  पड़ जाए सिंचाई बड़ी योजना केसीआर 4 जून को मेदीगड्डा परियोजना स्थल पर

राज्य में गद्दीनशीन तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) कलेश्वरम लिफ्ट सिंचाई योजना (केएलआइएस) को बहुत शान से पेश करती रही है. दावा है कि यह भारी-भरकम योजना पूरी हो जाने पर 70 फीसदी तेलंगाना को सिंचाई की सुविधा मुहैया करेगी, जिसमें राज्य के 119 में से 80 निर्वाचन क्षेत्र आ जाते हैं. 2016 में शुरू की गई इस योजना का पहला चरण तकरीबन तैयार है, जिसमें तीन बड़े बांध शामिल हैं.

गोदावरी नदी में हालांकि अब पानी नहीं है, पर टीआरएस के प्रमुख और मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) 21 जून को इसका उद्घाटन करने जा रहे हैं क्योंकि जुलाई में कोई शुभ तारीख नहीं है. गोदावरी का फायदा उठाने का इसके अलावा कोई तरीका नहीं है कि इसका पानी लिफ्ट किया जाए, लिहाजा केसीआर की महत्वाकांक्षी योजना यह है कि बाढ़ के पानी को सात अलग-अलग जगहों पर क्रमबद्ध ढंग से लिफ्ट किया जाए और फिर रोज 2,000 मिलियन घन (टीएमसी) फुट पानी पंप करने के साथ शुरुआत की जाए.

इस तरीके से राज्य उक्वमीद कर रहा है कि वह हर साल बाढ़ के 180 दिनों के दौरान 540 टीएमसी पानी लिफ्ट करेगा जिससे 45 लाख एकड़ में फैली दो फसलों की सिंचाई की जा सकेगी. इसमें 1,832 किमी लंबे सप्लाइ मार्ग और 19 पंप हाउस के साथ-साथ अन्य बुनियादी ढांचे का निर्माण भी करना होगा. पर परियोजना तय वक्त से पीछे चल रही है और इसकी लागत बढ़ते-बढ़ते करीब 1 लाख करोड़ रु. हो गई है.

तेलंगाना केएलआइएस को देश की सबसे बड़ी लिफ्ट सिंचाई परियोजना कहकर इतरा रहा है और इसे राज्य की जीवनरेखा बता रहा है. परियोजना के आलोचकों को 'अज्ञानी' कहकर उनका मजाक उड़ाते हुए केसीआर कहते हैं कि एक बार केएलआइएस जब पूरी हो जाएगी, तब महज दो-एक साल में ही फसलों का जो मूल्य होगा, वह इस पूरे खर्च के बराबर होगा. यह कहने के बाद भी परियोजना के पूरी तरह चालू होने में अभी कम से कम पांच साल लगेंगे. केसीआर इसके प्रथम चरण के उद्घाटन में हड़बड़ी कर रहे हैं तो इसकी वजह यह है कि वे जुलाई-अगस्त में आने वाली बाढ़ का फायदा उठाकर करीमनगर-वारंगल इलाके के छोटे सिंचाई टैंकों में पानी लाना चाहते हैं. ऐसा वे लिफ्ट सिंचाई योजना को सही साबित करने के लिए भी कर रहे हैं ताकि ऊंची लागत पर परदा डाल सकें.

इसी में बड़ी चुनौती छिपी है. पहले चरण के लिए एक साल तक रोज महज दो टीएमसी पानी लिफ्ट करने के लिए करीब 4,992 मेगावॉट बिजली की जरूरत होगी. इसके पूरी तरह तैयार हो जाने पर केएलआइएस का पानी दुनिया में कहीं भी कभी भी सिंचाई के लिए दिए गए पानी में सबसे महंगा होगा. विश्लेषक बताते हैं कि परियोजना लागत 1.6 लाख करोड़ रु. पहुंच सकती है और इसके परिचालन तथा रखरखाव का खर्च सालाना प्रति एकड़ कम से कम 50,000 रुपए तक आ सकता है.

डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंटरनेशनल में जल नीति के पूर्व प्रमुख और जल उत्पादकता पर काम कर रहे सामाजिक उद्यम एगश्री के संस्थापक चेयरपर्सन डॉ. बिक्षम गुज्जा कहते हैं, ''भारत सप्लाइ साइड मैनेजमेंट की पुरानी मानसिकता में फंसा हुआ है. इस एक विचार पर हजारों करोड़ रु. खर्च कर दिए जाते हैं कि पानी की ज्यादा सप्लाइ किसानों के लिए अच्छी है. किसानों को जमीन के हरेक एकड़ से ज्यादा कमाई करने की जरूरत है, न कि धान उगाने के लिए सबसे महंगे पानी की. ज्यादा आमदनी का भरोसा दिलाया और पानी बचाया जा सकता है, तो किसान वह मॉडल अपना लेंगे. यह डिमांड साइड मैनेजमेंट है, जो दुनिया के कई हिस्सों में अच्छी तरह स्थापित है और इसमें पानी के परमिट भी शामिल हैं जो खरीदे-बेचे जा सकते हैं. भारत पानी के बड़े संकट की ओर बढ़ रहा है और ये महंगी परियोजनाएं संकट को और तेज कर रही हैं.''

कई विशेषज्ञों का कहना है कि केएलआइएस के भारी-भरकम भूल साबित होने की पूरी संभावना है जिसमें तेलंगाना सरकार आखिरकार उससे कहीं बहुत ज्यादा रकम खर्च कर बैठेगी जितनी किसानों को उनकी पूरी पैदावार पर मिलेगी.

कांग्रेस पहले ही बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा रही है. कांग्रेस विधायक दल के नेता एम.बी. विक्रमार्क कहते हैं, ''केसीआर ने केएलआइएस में हेरफेर अपने परिवार को फायदा पहुंचाने के लिए किया. उन्होंने परियोजना रिपोर्ट विधायकों तक से साझा नहीं की, क्योंकि उन्हें इस पर विधानसभा में सवाल उठाए जाने का डर था.''

45 लाख एकड़ या 70 प्रतिशत तेलंगाना की सिंचाई परियोजना के पूरे होने के बाद हो सकेगी.

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