Sahitya AajTak
Indira Gandhi National Centre for the Arts, New Delhi

LIVE: साहित्य आजतक 2018- सूफी गायक जावेद अली ने बांधा समा

साहित्य आजतक 2018 में सजे मंचों पर साहित्य और कलाप्रेमी शब्द, कला, कविता, संगीत, नाटक, सियासत और संस्कृति से जुड़ी बातों को देखेंगे और सुनेंगे. यहां मौजूद कई हस्तियां जिन्हें अबतक आपने सिर्फ पढ़ा है, या परदे पर देखा है. साहित्य आजतक पर इन हस्तियों से अब आप रूबरू होंगे.

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Sahitya Aajtak 2018
राहुल मिश्रनई दिल्ली, 16 November 2018
LIVE: साहित्य आजतक 2018- सूफी गायक जावेद अली ने बांधा समा साहित्य आजतक 2018, नई दिल्ली

दस्तक दरबार पर दूसरा सत्र: एक चांद है सर-ए-आसमान

साहित्य आजतक के दूसरे अहम सत्र एक चांद है सर-ए-आसमान में कवि, आलोचक और लेखक शम्स उर रहमान फारूखी और कवि और लेखक प्रेम कुमार नज़र ने शिरकत की. इस सत्र का संचालन अहमद महफूज़ ने किया.

इस सत्र के दौरान प्रेम कुमार नज़र ने शम्स उर रहमान फारूखी से गुफ्तगी का आगाज किया. प्रेम कुमार ने कहा कि फारूखी साहेब की हैसियत भी लिटरेरी डिक्टेटर की है. प्रेम कुमार ने कहा कि जब फारूखी साहेब ने साहित्यिक आलोचना शुरू की तब पूरा जमाना हैरान हो गया कि इस तरह की बातें कौन कह रहा है. प्रेम ने कहा कि फारूखी साहेब ने नई दिशा और नई सोच के साथ लिखना शुरू किया.

फारूखी ने कहा कि पहले के जमाने में आलोचना में किसी के लिए कुछ भी कह दिया जाता था. लेकिन क्या किसी ने ये  कहा कि गालिब और मीर में अंतर क्या है? मैनें ये सवाल खड़ा किया. फारूखी ने कहा कि बदलते समय के साथ लिखने और पढ़ने वालों का रिश्ता कमजोर हो जाता है. फारूखी ने कहा कि आमतौर पर आलोचना में उन्हीं शब्दों को घुमा-फिरा कर लगभग एक जैसी चीजे किसी के बारे में कह दिया जाता है और यह आलोचना एक कारोबार बन कर रह गई है.

फारूखी ने कहा कि पहले लोग आलोचना के लिए शायरों की ऐसी शायरी को बाहर कर देते थे जिसे वह गलत समझते थे. मीर के आलोचकों पर फारूखी ने कहा वे मीर की उन शेरों को देखा ही नहीं जिसमें उन्हें लगा कि गंदगी या गलत बात लिखी गई है. यदि कहीं क्लास पर तंज दिखा तो उसे बाहर कर दिया गया या फिर महिलाओं के लिए कुछ लिखा गया तो उसे गंदगी कहकर बाहर कर दिया गया. लिहाजा फारूखी ने दलील दी कि यदि मीर की आलोचना करनी हो तो मीर को पूरा पढ़ने की जरूरत है.

हल्ला बोल पर पहला सत्र: साहित्य का राष्ट्रधर्म

साहित्य आजतक 2018 के दूसरे अहम मंच हल्ला बोल के पहले सत्र साहित्य का राष्ट्रधर्म में डायरेक्टर, केंद्रीय हिंदी संस्थान नंदकिशोर पांडेय, लेखक ममता कालिया और लेखक अखिलेश ने शिरकत की. इस सत्र का  संचालन रोहित सरदाना ने किया.

दस्तक दरबार पर पहला सत्र: सूफी संगीत

साहित्य आजतक के पहले सत्र में सूफी गायक जावेद अली ने शिरकत की. दस्तक दरबार में इस सत्र का संचालन मिनाक्षी कंडवाल ने किया. इस सत्र के दौरान जावेद अली ने अपनी सूफी गायकी से महफिल में समा बांधने का काम किया.

स्वागत भाषण: कली पुरी, वाइस चेयरपर्सन, इंडियाटुडे ग्रुप

सरस्वती वंदना के साथ साहित्य आजतक 2018 का शुभारंभ हुआ. साहित्य के इस महाकुंभ के प्रमुख मंच दस्तक दरबार में सरस्वती वंदना हुई. मंच पर  प्रमुख अतिथि के भाषणो सत्र का  संचालन मिनाक्षी कांडवाल ने किया.

सोशल मीडिया के जमाने में अनफॉलो न हो जाए हमारी संस्कृति: कली पुरी

सरस्वती वंदना के साथ साहित्य आजतक 2018 का शुभारंभ हुआ. साहित्य के इस महाकुंभ के प्रमुख मंच दरबार हॉल से स्वागत भाषण हुआ. इंडिया टुडे की वाइस चेयरपर्सन कली पुरी ने कार्यक्रम की शुरुआत करने के लिए ये भाषण दिया. मंच पर  प्रमुख अतिथि के भाषणो सत्र का  संचालन मिनाक्षी कांडवाल ने किया.

कली पुरी ने कहा कि साहित्य आजतक 2018 को स्वागत राजधानी दिल्ली के खूबसूरत मौसम ने भी किया. कली ने कहा कि अब साहित्य आजतक का मंच डिजिटल जगत में सालभर आपके बीच रहेगा.

इस साल साहित्य का महाकुंभ दिल्ली के इंडिया गेट स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में 16, 17 और 18 नवंबर को आयोजित हो रहा है. इस महाकुंभ को सौ के करीब सत्रों में बांटा गया है और तीन दिनों के दौरान 200 से अधिक विद्वान, कवि, लेखक, संगीतकार, अभिनेता, प्रकाशक, कलाकार, व्यंग्यकार और समीक्षक मंच पर शिरकत करेंगे.

साहित्य आजतक 2018 में सजे मंचों पर साहित्य और कलाप्रेमी शब्द, कला, कविता, संगीत, नाटक, सियासत और संस्कृति से जुड़ी बातों को देखेंगे और सुनेंगे. यहां मौजूद कई हस्तियां जिन्हें अबतक आपने सिर्फ पढ़ा है, या परदे पर देखा है. साहित्य आजतक पर इन हस्तियों से अब आप रूबरू होंगे.

हिंदी समाचार चैनल ‘आजतक’  की ओर से आयोजित साहित्य के इस महाकुंभ का यह तीसरा साल है. पिछले सालों की तरह इस साल भी यह महाकुंभ दिल्ली के इंडिया गेट स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में 16, 17 और 18 नवंबर को आयोजित हो रहा है.

तीन दिनों तक इस कार्यक्रम में हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी, अवधी, भोजपुरी, पंजाबी साहित्य और कला से जुड़ी बड़ी हस्तियां जुट रही हैं. इसके साथ ही इस साल दूसरी भारतीय भाषाओं और विधाओं के दिग्गजों की बातों का आप आनंद उठा सकें.

कार्यक्रम में हिस्सा लेने के यहां रजिस्टर करें-

तीन दिनों के इस महाकुंभ में अन्नू कपूर, वडाली ब्रदर्स फेम उस्ताद पूरन चंद वडाली जी, उस्ताद राशिद खान, नूरा सिस्टर्स से लेकर शेखर सुमन, दीप्ति नवल, गिन्नी माही, नरेंद्र कोहली से लेकर सुरेंद्र मोहन पाठक, राहत इंदोरी से लेकर डॉ हरिओम पंवार, जयराम रमेश से लेकर मनोज तिवारी शिरकत करेंगे.

पूरा कार्यक्रम यहां देखें

‘साहित्य आज तक’ का यह कार्यक्रम फ्री है, पर इसके लिए रजिस्ट्रेशन कराना आवश्यक है. इसके लिए आप ‘आज तक’ और हमारी दूसरी सहयोगी वेबसाइट पर दिए गए लिंक पर जाकर या फिर 7836993366 नंबर पर मिस्ड कॉल करना भर होगा, और आपका पंजीकरण हो जाएगा. तो तैयार हो जाइए साहित्य के इस महाकुंभ से जुड़ने के लिए.

साहित्य आजतक 2018: पहले दिन ये सितारे होंगे शामिल, जानें पूरा कार्यक्रम

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