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घोटालों में घिरी शिक्षक भर्ती

एक ओर तो फर्जी तरीके से नौकरी करतीं शिक्षिकाएं पकड़ी गईं, वहीं शिक्षक भर्ती प्रक्रिया भी भ्रष्टाचार और कानूनी दांव-पेच में उलझी

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aajtak.in
आशीष मिश्रलखनऊ, 18 June 2020
घोटालों में घिरी शिक्षक भर्ती मनीष अग्निहोत्री

उत्तर प्रदेश में गोंडा के मुजेहना ब्लॉक के कमड़ावा गांव में रहने वाली 28 वर्षीया अनामिका शुक्ला रोज की तरह सुबह आठ बजे अपने घरेलू काम में व्यस्त थीं. तभी रेलवे से रिटायर उनके पिता सुभाष चंद्र शुक्ल के आए फोन ने उन्हें सांसत में डाल दिया. उन्होंने अपनी बेटी को अखबारों में छपी उन खबरों की जानकारी दी जिसमें उसके दस्तावेजों के आधार पर कई जिलों के कस्तूरबा गांधी विद्यालय में अनामिका शुक्ला नाम की फर्जी शिक्षिकाएं पकड़ी गई हैं.

यह पता-चलते ही अनामिका के चेहरे पर हवाइयां उडऩे लगीं. दरअसल, अनामिका ने 2017 में कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूल में विज्ञान शिक्षिका के लिए सुल्तानपुर, जौनपुर, बस्ती, मिर्जापुर और लखनऊ में आवेदन किया था. पढऩे में मेधावी अनामिका की मेरिट अच्छी थीं लेकिन स्वास्थ्य कारणों से वे काउंसलिंग में शामिल नहीं हो पाई थीं. इसकी वजह से अनामिका का चयन नहीं हो पाया.

अपने पिता की बात सुनकर हैरान-परेशान अनामिका फौरन अपने पति दुर्गेश को लेकर गोंडा के बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) इंद्रजीत प्रजापति के पास पहुंचीं. अनामिका ने उन्हें अपने शैक्षिक दस्तावेज दिखाए. अनामिका ने 2017 में आवेदन के लिए निवास प्रमाणपत्र ऑनलाइन बनवाया था. इसमें उन्होंने अपने पिता की जगह पति दुर्गेश का नाम दर्ज किया था. लेकिन, अन्य जिलों में लगाए गए दस्तावेजों में निवास प्रमाणपत्र में पिता का नाम दर्ज है. बीएसए ने निदेशालय से आए प्रमाणपत्रों को जब अनामिका के दस्तावेजों से मिलान किया तो हेराफेरी सामने आ गई. इन्हीं अनामिका शुक्ला के प्रमाणपत्रों के आधार पर ही नौ जिलों में फर्जी शिक्षिकाएं अनामिका शुक्ला बनकर कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में नौकरी कर रही थीं.

गरीब परिवारों की बालिकाओं में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय का प्रोजेक्ट शुरू किया था. हर ब्लॉक में एक कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय का प्रावधान किया गया है. उत्तर प्रदेश के 822 ब्लॉक में 746 में कस्तूरबा गांधी विद्यालय चल रहे हैं. पूरी तरह से आवासीय इन विद्यालयों में कक्षा छह से आठ तक की पढ़ाई होती है. जिले के कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में शिक्षकों की रिक्तियों के आधार पर आवेदन मांग कर 'जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान' (डायट) के प्रधानाचार्य की अध्यक्षता में कमेटी मेरिट के आधार पर शिक्षकों का चयन करती है. ये शिक्षक संविदा पर 11 महीने 29 दिन काम करते हैं. इन विद्यालयों में पढ़ा रहे शिक्षकों का मूल प्रमाणपत्र जांचने की कोई भी व्यवस्था नहीं थी.

इसी वर्ष फरवरी में राज्य सरकार ने कस्तूरबा गांधी विद्यालय के शिक्षकों और कर्मचारियों से जुड़ी सभी जानकारियों को केंद्रीय मानव संपदा पोर्टल के तहत बने प्रेरणा फ्रेमवर्क में ऑनलाइन दर्ज करने का आदेश दिया था. इसके बाद अचानक एक बड़ा घोटला सामने आ गया. विभाग को बागपत के बड़ौत में स्थित कस्तूरबा गांधी विद्यालय के शिक्षकों के दस्तावेजों के ऑनलाइन दर्ज करने के दौरान पता चला कि यहां कार्यरत शिक्षिका अनामिका शुक्ला के दस्तावेज से वाराणसी, कासगंज, अलीगढ़, रायबरेली, प्रयागराज, सहारनपुर, अमेठी और आंबेडकर नगर में भी शिक्षिकाएं ड्यूटी कर रही हैं. इनमें से तीन जिलों में कथित अनामिका शुक्ला नाम की शिक्षिका ने ज्वाइन नहीं किया. छह जिलों के कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में अनामिका शुक्ला नाम की शिक्षिकाओं को कुल 12,24,700 रुपए मानदेय के रूप में दिए गए. खास बात यह है कि तीन शिक्षिकाओं का भुगतान एक ही खाते में हुआ है.

इन सभी कथित अनामिका शुक्ला की पड़ताल की गई तो पता चला कि कासगंज में अनामिका शुक्ला के नाम से पढ़ा रही शिक्षिका असल में कायमगंज के रजपालपुर की रहने वाली सुप्रिया जाटव है. सुप्रिया पर एफआइआर कराकर उसे जेल भेज दिया गया है. इसी तरह अमेठी, आंबेडकर नगर समेत अन्य जिलों में भी फर्जी अनामिका शुक्ला पर कार्रवाई की गई है. प्रदेश सरकार ने इस मामले की जांच स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) को सौंपी है, लेकिन कस्तूरबा गांधी विद्यालय से जुड़े इस घोटाले ने शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार के एक बड़े रैकेट के संचालित होने की तरफ इशारा किया है.

उधर परिषदीय स्कूलों में सहायक शिक्षकों की भर्ती भी कानूनी दांव-पेच और भ्रष्टाचार के आरोपों से उलझ गई है. पिछली समाजवादी पार्टी की सरकार में शिक्षा मित्रों का परिषदीय स्कूलों में सहायक अध्यापक के रूप समायोजन विधि सम्मत न होने से सुप्रीम कोर्ट ने इसे निरस्त कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने ही कुल एक लाख 37 हजार पद जिनके सापेक्ष शिक्षा मित्र कार्य कर रहे थे, इन पदों पर शिक्षकों की भर्ती करने का आदेश दिया था. यह भर्तियां दो बार में की जानी थीं. इसमें शिक्षा मित्रों को भारांक दिया जाने का भी आदेश दिया गया था. यह भारांक प्रत्येक वर्ष की सेवा पर ढाई अंक और यह 25 अंक से ज्यादा नहीं होना था. यह भारांक उन्हीं को मिलना था जो क्वालिफाइंग परीक्षा पास करेंगे. इसके बाद दो चरणों में शिक्षक भर्ती करने की योजना बनी.

पहली बार 68,500 और दूसरी बार 69,000 पदों पर. चूंकि बीटीसी या 'डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन' धारक और शिक्षक योग्यता दक्षता परीक्षा (टीईटी) पास करने वाले ही आवेदन कर सकते थे इसलिए 68,500 पदों पर शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में केवल एक लाख पांच हजार आवेदन ही आए. इसमें कुल नंबर 150 का 45 प्रतिशत अनारक्षित श्रेणी और शेष आरक्षित श्रेणी के लिए 40 प्रतिशत का कट-ऑफ रखा गया. इस आधार पर केवल 44 हजार अभ्यर्थी ही शिक्षक भर्ती परीक्षा को पास कर पाए.

दिसंबर, 2018 में जब 69,000 पदों पर शिक्षक भर्ती का दूसरा चरण शुरू हुआ तब तक केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने बीटीसी या डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन धारक के साथ बीएड डिग्री धारक और टीईटी पास करने वाले अभ्यर्थियों को भी शिक्षक भर्ती के लिए आवेदन करने के लिए योग्य मान लिया था. नतीजा यह हुआ कि इन पदों के लिए अचानक आवेदकों की संख्या बढ़कर चार लाख 31 हजार पर पहुंच गई. आवेदकों की संख्या अधिक होने के कारण विभाग ने कट-ऑफ बढ़ाकर अनारक्षित के लिए 65 प्रतिशत और अराक्षित के लिए 60 प्रतिशत कर दिया. कट-ऑफ बढ़ाने के विरोध में शिक्षा मित्रों ने हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. शिक्षा मित्र रमेश चौरसिया बताते हैं, ''सरकार ने भर्ती प्रक्रिया के विज्ञापन में कट-ऑफ का कोई जिक्र नहीं किया है. जनवरी, 2019 में परीक्षा के बाद अचानक ऊंचे कट-ऑफ की घोषणा कर दी जो कि नियम विरुद्ध है.''

मार्च, 2019 में हाइकोर्ट की एकल बेंच ने भर्ती प्रक्रिया रोक दी. इसके बाद सरकार ने हाइकोर्ट के डबल बेंच में पुनर्विचार याचिका दाखिल की. शिक्षा विभाग के एक अधिकारी बताते हैं, ''कोर्ट में सरकार ने बताया कि मेधावी अभ्यर्थियों का चयन करने के लिए कट-ऑफ अधिक रखा गया है. इससे कोर्ट संतुष्ट हुआ और 6 मई को भर्ती प्रक्रिया पर लगी रोक हटा दी गई.'' इसके बाद नतीजा जारी करने से पहले बेसिक विभाग ने शिक्षक भर्ती परीक्षा की आंसर-की जारी की.

आंसर-की जारी होने के बाद फिर बवाल मच गया. अभ्यर्थियों ने तीन प्रश्नों के उत्तरों पर आपत्ति जताई. परीक्षा नियामक प्राधिकारी की विशेषज्ञ समिति ने भी इन प्रश्नों के उत्तर को संदिग्ध मानते हुए तीनों प्रश्नों के समान अंक सभी अभ्यर्थियों को देने का निर्णय लिया. इसके बाद सरकार ने नतीजा जारी किया जिसमें 1,46,060 लोग क्वालिफाइ हुए. इनमें से 69 हजार चुनने के लिए भर्ती परीक्षा में मिले अंक का 60 फीसद और शैक्षिक योग्यता से 40 फीसद अंक लेकर मेरिट बनाई गई. एक जून को शिक्षकों को जिला आवंटन की सूची का प्रकाशन कराने के बाद विभाग काउंसलिंग की तैयारी कर रहा था कि भर्ती परीक्षा में कुल 13 प्रश्नों के जवाब को लेकर आपत्ति जताते हुए कुछ अभ्यर्थियों की याचिका पर हाइकोर्ट की एकल बेंच ने पूरी भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी.

69,000 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में गड़बडिय़ों को लेकर विपक्ष ने सरकार पर हमला बोला है. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने इसे उत्तर प्रदेश का व्यापम घोटाला करार दिया. अपने एक ट्वीट में उन्होंने लिखा, ''शिक्षक भर्ती में जिस तरह से गड़बडिय़ों के मामले सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं. ये गड़बडिय़ां पूरी व्यवस्था पर ही प्रश्नचिह्न हैं. उत्तर प्रदेश के युवाओं का भविष्य रौंदा जा रहा है.'' बसपा प्रमुख मायवती ने इसकी सीबीआइ जांच तक की मांग कर डाली है.

वहीं, कानूनी दांव-पेच में उलझी 69,000 शिक्षकों की भर्ती के लिए प्रयागराज में परीक्षा केंद्र बनाए गए एक विद्यालय के प्रबंधक और उनसे जुड़े गिरोह का मामला भी सामने आया है. शिक्षक भर्ती में अभ्यर्थी प्रतापगढ़ के राहुल सिंह को झांसा देकर शातिरों ने 7.50 लाख रुपए उत्तीर्ण कराने के नाम पर ले लिए थे. परिणाम आने के बाद ठगी के शिकार हुए राहुल सिंह ने 4 जून को पूर्व जिला पंचायत सदस्य डॉ. कृष्ण लाल पटेल समेत आठ लोगों के खिलाफ सोरांव थाने में फर्जीवाड़ा की एफआइआर दर्ज कराई.

सोरांव पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी कृष्ण लाल पटेल समेत 11 लोगों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है. इनके पास से 22 लाख रुपए नकद और फर्जी दस्तावेज भी मिले थे. पकड़े गए आरोपियों में दो अभ्यर्थी भी शामिल थे, जिनमें अभ्यर्थी धर्मेंद्र सिंह टॉपरों की लिस्ट में है. धर्मेंद्र को 150 में 142 अंक मिले थे. प्रयागराज पुलिस के एक बड़े अधिकारी ने बताया, ''पुलिस को पूछताछ में पता चला कि पकड़े गए आरोपियों ने इससे पहले भी कई प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली की है. कुछ समय पहले हुई लेखपाल और हॉर्टिकल्चर परीक्षा में भी शातिरों ने अपने रिश्तेदारों की नौकरी लगवाई है.''

राज्य सरकार ने इस पूरे रैकेट का खुलासा करने के लिए एसटीएफ को जिम्मेदारी सौंपी है. फिलहाल, शिक्षक भर्ती से जुड़े रैकेट के तार दूसरी भर्ती परीक्षाओं से भी जुड़ रहे हैं. प्रदेश सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती निष्पक्ष ढंग से इस पूरे मामले की जांच जल्द पूरा कराने की है. इससे न केवल भर्ती प्रक्रियाओं में चल रहे एक बड़े सिंडीकेट की धड़पकड़ हो पाएगी बल्कि चयन प्रक्रियाओं की सुचिता भी स्थापित होगी.

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