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स्मार्ट मनीः ऐसे घटाएं अपने होम लोन की किस्त का बोझ

आरबीआइ से मकान के लिए कर्ज लेने वालों को एमसीएलआर विधि अपनाने की छूट दे दी है. हालांकि बैंक इस विकल्प को अपनाने के लिए बची हुई रकम पर 0.5 प्रतिशत राशि और टैक्स फीस के तौर पर लेते हैं.

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aajtak.in
मंजीत ठाकुर Ghaziabad, 31 October 2017
स्मार्ट मनीः ऐसे घटाएं अपने होम लोन की किस्त का बोझ होम लोन

अगर आपने बैंक से कर्ज लेकर मकान खरीदा है तो ईएमआइ (इक्वेटेड मंथली इंस्टालमेंट्स) आपके मासिक बजट पर बहुत बड़ा बोझ साबित हो सकते हैं.

दूसरी तरफ, ईएमआइ ब्याज दरों से निर्धारित होती है. इन दिनों ज्यादातर बैंक मकान के नए खरीदारों को 8.35-8.5 फीसदी की ब्याज दर पर कर्ज दे रहे हैं. लेकिन मौजूदा खरीदारों के लिए ये ब्याज दर थोड़ी अधिक हो सकती है, खासकर उन खरीदारों के लिए जिन्होंने 1 अप्रैल, 2016 से पहले कर्ज लिया है. इस तारीख को आरबीआइ ने कर्ज देने के लिए एक नया बेंचमार्क शुरू किया था जिसे एमसीएलआर कहा जाता है जिससे बैंक कर्ज की अवधि के आधार पर अलग-अलग बेंचमार्क दर तय कर सकते हैं.

इसकी वजह से पहले वाली बेस दर तय करने का तरीका खत्म हो गया. पहले अलग-अलग नहीं बल्कि एक ही बेंचमार्क दर हुआ करती थी. इस नए बेंचमार्क को रेपो रेट का कहीं ज्यादा सटीक प्रतिबिंब माना जाता है जिसके आधार पर ब्याज को कर्ज की अवधि के आधार पर तय किया जा सकता है. लेकिन दूसरी तरफ एनबीएफसी (गैर-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियां) और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां (एचएफसी) अब भी प्राइम लेंडिंग दर पर होम लोन दे रही हैं जहां बेंचमार्क रेट कर्ज लेने वाले की क्रेडिट साख पर तय किया जाता है.

भारतीय रिजर्व बैंक की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, आरबीआइ की ओर से दिसंबर 2014 से रेपो रेट (वह ब्याज दर जिसपर रिजर्व बैंक कर्ज संस्थाओं को कर्ज देता है) में दो फीसदी की कमी करने के बावजूद देश भर के बैंकों में कर्ज की औसत दर में केवल 1.25 प्रतिशत की कमी आई है, नोटबंदी के बाद 0.5 प्रतिशत. इस तरह बैंकों की ओर से ब्याज दरों में उतनी कटौती नहीं की गई है, जितनी कि होनी चाहिए थी. अगर आपने पहले से बैंकों से होम लोन ले रखा है तो ब्याज दरों में कटौती कराने के कई तरीके हैं.

एमसीएलआर का विकल्प

आरबीआइ से मकान के लिए कर्ज लेने वालों को एमसीएलआर विधि अपनाने की छूट दे दी है. हालांकि बैंक इस विकल्प को अपनाने के लिए बची हुई रकम पर 0.5 प्रतिशत राशि और टैक्स फीस के तौर पर लेते हैं. एमसीएलआर कहीं ज्यादा पारदर्शी तरीका है. इसलिए कर्जदारों के लिए इस विकल्प को चुनना लंबी अवधि फायदेमंद साबित हो सकता है. अगर कर्ज लेने वाले ने 20 साल के लिए 50 लाख रुपए का कर्ज ले रखा है और उसे इस समय 9 प्रतिशत का ब्याज दर देना पड़ रहा है तो एमसीएलआर के विकल्प पर जाने के लिए उसकी फीस 25,000 रु. होगी. लेकिन उस पर जाने से अगर ब्याज दर 8.5 प्रतिशत हो जाती है तो ब्याज में पूरे 9.3 लाख रु. की बचत होगी.

होम लोन स्थानांतरण

आप बचे कर्ज को दूसरे बैंक में स्थानांतरित कर सकते हैं जो कम ब्याज दर का प्रस्ताव दे रहा हो. नया बैंक मौजूदा बैंक को आपका बचा हुआ कर्ज चुका देता है और फिर नए बैंक की ब्याज दर के अनुसार ईएमआइ शुरू हो जाती है.

बैंक से मोलभाव

अपने बचे हुए कर्ज को नए बैंक में स्थानांतरित करने से पहले आप अपने मौजूदा बैंक से मोलभाव कर सकते हैं. जब आप मौजूदा बैंक को बताते हैं कि आप किसी अन्य बैंक में अपना कर्ज स्थानांतरित करने की योजना बना रहे हैं तो ज्यादातर बैंक आपके कर्ज की ब्याज दर कम करने के लिए तैयार हो जाते हैं. हालांकि स्थानांतरित करने के लिए आपको कुछ फीस देनी पड़ सकती है. ये फीस यानी दो-ढाई हजार या बैंक के मुताबिक अलग-अलग हो सकती है.

कोई भी विकल्प चुनें लेकिन आपको सबसे पहले नफा-नुक्सान का हिसाब लगा लेना चाहिए. इससे आपको स्थानांतरण फीस और कागजी काम दोनों में मदद मिलती है. आम तौर पर शुरू के दिनों में ही इस तरह के फैसले लेना फायदेमंद होता है. आपको साथ में दी गई तालिका को गौर से देखना चाहिए.

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