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शेयर बाजार से टैक्स बचाएं, पैसा बनाएं

मिसाल के तौर पर, म्युचुअल फंड स्कीम "ए'' में निवेश पर किसी व्यक्ति का 2 लाख रु. का एलटीसीजी बनता है और उसे इक्विटी म्युचुअल फंड स्कीम "बी'' पर 1.25 लाख का लांग टर्म कैपिटल लॉस हुआ है.

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aajtak.in
मंजीत ठाकुर/ संध्या द्विवेदी नई दिल्ली, 04 May 2018
शेयर बाजार से टैक्स बचाएं, पैसा बनाएं शेयर बाजार

करीब 14 साल बाद लांग   टर्म कैपिटल गेन (एलटीसीजी) टैक्स वापस आया है. 1 अप्रैल, 2018 से इक्विटी म्युचुअल फंड में निवेश करने वालों को सालाना एक लाख रु. से अधिक की आय पर 10 प्रतिशत एलटीसीजी टैक्स भरना होगा. बहरहाल इसके ग्रैंडफादर  प्रावधान का शुक्रिया करें, जो आपको वित्त वर्ष 2017-18 के लिए टैक्स भरने से बचा सकता है. हालांकि एलटीसीजी टैक्स कम करने के कुछ तरीके हैं...

परिजनों के नाम निवेश करें

कुछ खास परिजनों (पिता, पत्नी, बच्चे) से मिले उपहारों पर टैक्स नहीं लगता. इसलिए विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि आप अपने निवेश का पोर्टफोलियो परिजनों के बीच बांट लें. डालमिया एडवाइजरी सर्विस के संस्थापक ब्रजेश डालमिया बताते हैं, "हर व्यक्ति को एक लाख रु. तक की छूट मिलती है.

परिजनों के बीच पोर्टफोलियो को बांट लेने के कारण आप टैक्स बहुत कम या नगण्य कर सकते हैं.'' बच्चों के नाम से निवेश में छूट तभी मिलेगी अगर उनकी उम्र 18 साल या उससे ज्यादा है. ऐसा इसलिए क्योंकि टैक्स नियमों के अनुसार 18 साल या उससे अधिक उम्र के बच्चों को अपने अधिकार प्राप्त हैं और उन्हें स्वतंत्र व्यक्ति (इंडिविजुअल) के रूप में गिना जाता है.

लांग टर्म कैपिटल लॉस को दर्शाकर लाभ लें

शेयर या इक्विटी आधारित म्युचुअल फंड में निवेश पर हुए लांग टर्म कैपिटल लॉस को दर्शाकर इक्विटी आधारित म्युचुअल फंड पर दिए जाने वाले एलटीसीजी टैक्स की बचत की जा सकती है.

मिसाल के तौर पर, म्युचुअल फंड स्कीम "ए'' में निवेश पर किसी व्यक्ति का 2 लाख रु. का एलटीसीजी बनता है और उसे इक्विटी म्युचुअल फंड स्कीम "बी'' पर 1.25 लाख का लांग टर्म कैपिटल लॉस हुआ है. ऐसे में वह स्कीम "बी'' पर हुए नुक्सान को स्कीम "ए'' पर हुए फायदे के साथ दर्शाकर टैक्स को एडजस्ट कर सकता है.

अगर निवेशक को डायरेक्ट इक्विटी शेयर्स में भी कोई लांग टर्म कैपिटल लॉस हुआ है, तो उसे भी दर्शाकर वह टैक्स बचा सकता है. ऊपर बताए मामले में शुद्ध एलटीसीजी 75,000 रु. का ही हुआ (2 लाख रु. के फायदे में से सवा लाख रु. का नुक्सान घटाकर) जो कि एक लाख रु. की छूट सीमा से नीचे है. इस पर निवेशक एलटीसीजी की बचत कर सकता है.

फिर से निवेश कर दें

टैक्स को न्यूनतम करने का एक और तरीका है. आप पोर्टफोलियो का मंथन करें क्योंकि एलटीसीजी की गणना अधिग्रहण की वास्तविक लागत पर होती है. पोर्टफोलियो में थोड़ा बदलाव करके आप अधिग्रहण की लागत को बदल सकते हैं. मान लें कि 20 अप्रैल, 2018 को 180 रु. के नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) पर आपने किसी म्युचुअल फंड स्कीम की 1,000 यूनिट्स खरीदीं. अप्रैल 2019 तक उसका एनएवी 260 रु. हो गया.

इस तरह आपका 80,000 रु. का लांग टर्म कैपिटल गेन हुआ. अगर आप सारे यूनिट्स 27 अप्रैल, 2019 को बेच देते हैं और फिर से उसे खरीद लेते हैं तो आपका खरीद मूल्य अब 260 रु. और खरीद तारीख 27 अप्रैल 2019 हो जाएगी. अब अगर अगले साल एनएवी बढ़कर 345 रु. हो जाता है तो आपकी आमदनी

85,000 रु. हो जाएगी जो कि एक लाख रु. की टैक्स सीमा से कम है और आपको टैक्स नहीं देना होगा. हालांकि बहुत से लोग इस रणनीति को अपनाने का सुझाव नहीं देते.

—कुंदन किशोर

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