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अजमेर जिला कोर्ट में भर्ती के नाम पर फर्जीवाड़ा

अदालत में बाबुओं की भर्ती को लेकर भारी रिश्वतखोरी का खुलासा.

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aajtak.in
क्षितिज गौड़जयपुर, 12 May 2013
अजमेर जिला कोर्ट में भर्ती के नाम पर फर्जीवाड़ा

अजमेर में हो क्या रहा है? एक घोटाले में हाथ डालो तो घोटालों का सिलसिला हाथ में आ जाता है. पिछले चार महीने में अजमेर के पुलिस अधीक्षक राजेश मीणा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लोकेश सोनवाल, राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के वित्तीय सलाहकार नरेंद्र तंवर, 12 थानेदारों के बाद अब कोर्ट के दो बाबुओं और दो वकीलों को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने शिकंजे में लिया है. सोनवाल को ढूंढऩे के लिए ब्यूरो ने जब उसके पैरवीकार वकील भगवानसिंह चौहान के मोबाइल को सर्विलांस पर लिया तो अजमेर की अदालत में भर्ती का एक घोटाला निकल आया.

अजमेर जिला अदालत में पिछले नवंबर में 47 बाबुओं और 2 स्टेनोग्राफरों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू हुई थी. इसके लिए करीब 5,000 आवेदन मिले. लिखित और फिर टाइपिंग परीक्षा हुई. नतीजे आते, उससे ठीक दो दिन पहले ब्यूरो ने छापेमारी करके चार आरोपियों को दबोचा. भर्ती तो उसके बाद टलनी ही थी. इस मामले में दर्ज कराई गई प्राथमिकी में ब्यूरो ने कहा है कि उसे कहीं से भर्ती के लिए कुछ आवेदकों से पैसे वसूले जाने की खबर मिली. पड़ताल करने पर पता चला कि केकड़ी के वकील हेमराज कानावत का अजमेर के एक न्यायाधीश के यहां आना-जाना है.

कुछ आवेदकों ने उससे संपर्क साधा. हेमराज ने वकील भगवानसिंह चौहान को भी कुछ आवेदकों को भर्ती कराने का भरोसा दिया. इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस में ब्यूरो ने पाया कि हेमराज ने राहुल, शालिनी शर्मा, अमर, हितेश जैसे कुछ आवेदकों से पैसे जुटाए. भगवान के अलावा नसीराबाद कोर्ट में नाजिर राजेश शर्मा इस काम में उसकी मदद कर रहे थे.

इस मामले में जांच की मंजूरी मिलने पर ब्यूरो ने कई टीमें बनाकर छापेमारी शुरू की. इस पर भगवान सिंह घर से भाग छूटा. अब मुख्य सूत्रधार हेमराज का पीछा किया गया. वह एक सुबह नसीराबाद से हटूंडी होते हुए सिविल लाइंस क्षेत्र पहुंचा और एक बंगले में चला गया. भगवान अब राजेश को फोन करता है कि काम हो गया. इसके बाद राजेश भगवान के घर पहुंचता है. उधर हेमराज अपनी कार लेकर शहर की पुरानी आरपीएससी बिल्डिंग पहुंचता है, एक साथी को उतारता है और फिर कार को सूचना केंद्र चौराहे ले जाता है. यहां मोटर साइकिल पर आकर हेमराज से मिलता है. हेमराज फिर केकड़ी की ओर रवाना होता है और बीच में ही ब्यूरो उसे धर लेता है.

हेमराज की कार से काले रंग के दो बैग मिले. उसमें कथित तौर पर ऐसे दस आवेदकों की सूची मिली, जिनका काम कराया जाना था. इनमें से कुछ तो लिखित परीक्षा में भी फेल हो चुके थे. ब्यूरो को दिए बयान में भगवान ने कबूल किया कि जज उसके परिचित हैं. ब्यूरो के दूसरे दल ने उसी समय नसीराबाद कोर्ट के नाजिर राजेश और कोर्ट में ही बाबू उसके भाई हितेश शर्मा के घर छापा मारा. राजेश के यहां आलमारी में 12 लाख रु. थैली में मिले. एक दूसरी थैली में 1.75 लाख रु. मिले. उसके घर से कई आवेदकों के रोल नंबर और लिखित/टाइपिंग परीक्षा के परचे मिले.

ब्यूरो के मुताबिक, पूरी जांच में सामने आया है कि हेमराज के जज से संबंध थे. हेमराज ने भगवान, राजेश और हितेश की मदद से हर अभ्यर्थी से 6-6 लाख रु. लिए थे. यही नहीं, सरवाड़ तहसील में अब्दुल रज्जाक नाम का अपना बिचौलिया भी रखा हुआ था, जो ग्रामीण इलाके के आवेदकों से अलग से पैसे ले रहा था.  राजस्थान हाइकोर्ट प्रशासन ने न्यायाधीश का तबादला बांसवाड़ा परिवार अदालत में कर दिया है. ब्यूरो की पुलिस महानिरीक्षक स्मिता श्रीवास्तव कहती हैं कि अभी इस मामले में और भी खुलासे होने को हैं.

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