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पंजाब-आसार अच्छे नहीं

प्रदेश अध्यक्ष श्वेत मलिक उत्तरी अमृतसर पर अच्छी पकड़ रखने वाले पूर्व मंत्री अनिल जोशी को फूटी आंख भी नहीं देखना चाहते. छीना भी दूसरी बार टिकट न मिलने से ज्यादा उत्साह नहीं दिखा रहे हैं.

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असित जॉलीनई दिल्ली, 15 May 2019
पंजाब-आसार अच्छे नहीं अकेले की लड़ाई? हरदीप सिंह पुरी अपना नामांकन पत्र दाखिल करने जाते हुए.

अरुण जेटली 2014 में अमृतसर लोकसभा सीट से हार गए थे. तब पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उन्हें एक लाख से ज्यादा वोटों से हराया था. तीन साल बाद कांग्रेस के अपेक्षाकृत जूनियर नेता गुरजीत सिंह औझला ने भाजपा के उम्मीदवार राजिंदर मोहन सिंह छीना को 2,00,000 वोटों से पटखनी दे दी थी. इस बार भी भाजपा के उम्मीदवार और केंद्र में आवास व शहरी मामलों के राज्यमंत्री हरदीप सिंह पुरी के लिए जीत की संभावनाएं बहुत उज्ज्वल नहीं हैं. वे इस पवित्र शहर में अपने राजनीतिक पांव जमाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

हालांकि अमृतसर से उनका एक नाता रहा है—उनकी नानी जलियांवाला बाग नरसंहार में बच गई थीं—फिर भी पर्यवेक्षकों का कहना है कि पुरी को बाहर का आदमी समझा जाता है. इसके अलावा उन्हें भाजपा की पंजाब इकाई में आपसी टकराव का भी सामना करना पड़ रहा है. प्रदेश अध्यक्ष श्वेत मलिक उत्तरी अमृतसर पर अच्छी पकड़ रखने वाले पूर्व मंत्री अनिल जोशी को फूटी आंख भी नहीं देखना चाहते. छीना भी दूसरी बार टिकट न मिलने से ज्यादा उत्साह नहीं दिखा रहे हैं. इतना ही नहीं, अमृतसर में अब तक कोई बड़ा नेता चुनाव प्रचार के लिए नहीं आया है, हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के आने की बात सुनी जा रही है.

यहां तक कि शिरोमणि अकाली दल, जिसने 2014 में अमृतसर की सीट जेटली को थाली में रखकर 'परोसने' को वादा किया था, यहां से नदारद है.

इस सब के बीच पुरी अब केवल 'विजन डॉक्यूमेंट' पर भरोसा कर सकते हैं, जिसे उन्होंने अमृतसर में तैयार किया था. अमृतसर को ग्लोबल सिटी बनाने का वादा करते हुए वे कहते हैं, ''अमृतसर को भारतीय जनमानस में ऊंचा स्थान दिलाने का समय आ गया है.'' उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी औझला यहां के लिए दशकों से जाना-पहचाना चेहरा रहे हैं. जमीनी नेता औझला को अक्सर तपती गर्मी में भी कई किमी चलकर लोगों से संपर्क करते हुए देखा जा सकता है.

2014 में किसी को भी उम्मीद नहीं थी कि जेटली अमृतसर से हार जाएंगे. इस बार लड़ाई उतनी टक्कर की नहीं है फिर भी नतीजा क्या होगा, इसकी भविष्यवाणी करना संभव नहीं है.

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