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मोस्ट इफेक्टिव स्वच्छता एंबेसडरः बदलाव के लिए बैटिंग

 अपनी शोहरत और लोकप्रियता का इस्तेमाल इस बात को सुनिश्चित करने के लिए कि स्वच्छ भारत का लक्ष्य हासिल हो जाए.

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aajtak.in
कौशिक डेका नई दिल्ली, 07 October 2019
मोस्ट इफेक्टिव स्वच्छता एंबेसडरः बदलाव के लिए बैटिंग स्वच्छता को बढ़ावा सचिन तेंडुलकर पिछले दस साल से स्वच्छता को प्रोत्साहन दे रहे हैं

मोस्ट इफेक्टिव स्वच्छता एंबेसडर

विजेता:  सचिन तेंडुलकर

जीत की वजह: अपनी शोहरत और लोकप्रियता का इस्तेमाल इस बात को सुनिश्चित करने के लिए कि स्वच्छ भारत का लक्ष्य हासिल हो जाए

उसे खेलने की आजादी हो, वह सपने देख सके, वह स्वस्थ रहे, उसे पीने के लिए साफ पानी मिले, वह स्कूल जा सके और उसे रहने के लिए साफ-सुथरी जगह मिले—ये सब सहूलतें हर बच्चे को किस्मत से नहीं बल्कि उसके हक से मिलनी चाहिए. स्वच्छ भारत मिशन के लक्ष्य को हासिल करके हम एक ऐसी दुनिया के करीब जा सकेंगे जहां इन सारी चीजों को हासिल करने वाले बच्चों को हम किस्मत वाले नहीं कहेंगे बल्कि बस बच्चों के लिए सामान्य सी बात मानेंगे.'' यह बात क्रिकेट दिग्गज सचिन तेंदुलकर ने अप्रैल, 2018 में एक कॉलम में लिखी थी.

जिन दिनों वे खेल में सक्रिय थे तब मास्टर ब्लास्टर को हम शायद ही किसी सार्वजनिक मंच पर सुन पाते थे. वे सारी बातें केवल अपने खेल को ही करने देते थे. अपने रिटायरमेंट के बाद भी तेंडुलकर का स्वभाव बदला नहीं है और वे अपने काम को अपने शब्दों से ज्यादा बोलने देते हैं. बस इतना हुआ है कि बैट की जगह झाडू़ ने ले ली है. हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें 2014 में भारत के 'स्वच्छता दूतों' में से एक मनोनीत किया था लेकिन तेंडुलकर तकरीबन दस साल से भारत में स्वच्छता अभियान को बढ़ावा दे रहे हैं.

18 सितंबर, 2011 को एक 12 घंटे लंबी 'सपोर्ट माइ स्कूल टेलीथन' में उन्होंने देशभर में 140 सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं, खास तौर पर बच्चियों के लिए टॉयलेट तैयार करने के लिए छेड़े गए अभियान में 7 करोड़ रुपए एकत्र करने में मदद दी जो इसके लिए रखे गए लक्ष्य से 2 करोड़ रुपए ज्यादा थे. स्वच्छता दूत बनने के बाद तेंडुलकर ने पहला अभियान अपने घर के पास के एक मोहल्ले को साफ करने का छेड़ा. उसी साल उन्होंने सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत आंध्र प्रदेश में पुट्टमराजु कंद्रीगा गांव को गोद लिया ताकि गांव वालों को सफाई व स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं मिल सकें.

वे 2012 से लेकर 2018 तक राज्यसभा के भी सदस्य रहे. साल 2016 में इस गांव को खुले में शौच से मुक्त घोषित कर दिया गया. साल 2017 में उन्होंने उस्मानाबाद में दोंजा नाम के एक अन्य गांव को गोद लिया जो पिछले कई वर्षों से लगातार सूखे का सामना कर रहा था. वहां उन्होंने सफाई और पीने के पानी की उपलब्धता के लिए ढांचा खड़ा करवाने का काम हाथ में लिया.

उसी साल तेंडुलकर ने 'मिशन-24' शुरू किया, जिसका मकसद मुंबई के एम. ईस्ट वार्ड में जीवन की गुणवत्ता को सुधारना था. इस वार्ड को शहर में सबसे ज्यादा झुग्गी बस्ती आबादी वाला माना जाता है और मुंबई मानव विकास रिपोर्ट 2009 में यह वार्ड शहर के कुल 24 वार्ड में मानव विकास के पैमाने पर सबसे निचले पायदान पर था. इस परियोजना को दो गैरसरकारी संस्थाओं—अपनालय और मुंबई फस्र्ट ने बृहत्तमुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के साथ मिलकर हाथ में लिया था. इसका मकसद था वहां अस्पतालों, स्कूलों, पानी और नाली जैसी बुनियादी सुविधाओं को उपलब्ध कराना.

जो बात तेंडुलकर को अन्य दूतों से अलग करती है, वह है हर उम्र, लिंग और वर्ग के लोगों के बीच उनकी समान रूप से व्याप्त लोकप्रियता. भारत रत्न तेंडुलकर सोशल मीडिया सक्रिय हैं. उनके ट्विटर और फेसबुक पर तीन करोड़ से ज्यादा फॉलोअर्स हैं. जाहिर है कि उनका सोशल मीडिया पर भी अच्छा-खासा प्रभाव है.

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