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हिमाचल प्रदेश/ चुनाव प्रचार-पहाड़ पर मजबूत कदम

राज्य का मुख्यमंत्री बनने के बाद जयराम ठाकुर की यह पहली चुनावी परीक्षा है. इसलिए पार्टी से लेकर सरकार और संगठन का तालमेल बिठाए रखने के लिए उन्होंने तकनीक का सहारा लिया है. मुख्यमंत्री होने के नाते उन्होंने यूं तो चारों सीटों पर प्रचार की कमान सीधे अपने हाथ में ली है, लेकिन उनके सामने कई चुनौतियां मुंह बाएं खड़ी हैं.

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aajtak.in
संध्या द्विवेदी/ मंजीत ठाकुर 09 May 2019
हिमाचल प्रदेश/ चुनाव प्रचार-पहाड़ पर मजबूत कदम जयराम ठाकुर

पहाड़ों की रेंगती सड़कों पर चढ़ाई चढ़ती गाड़ी. दूर, धौलाधार की बर्फ से ढकी पहाड़ी की ठंडक तो कहीं ऊबड़-खाबड़ रास्ते. भले ही हिमाचल प्रदेश में अंतिम चरण में सिर्फ चार सीटों के लिए मतदान होना हो, लेकिन आचार संहिता के इस लंबे दौर में जनता से रू-ब-रू होने का बेहतरीन मौका भाजपा के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने खोया नहीं है.

राज्य का मुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी यह पहली चुनावी परीक्षा है. इसलिए पार्टी से लेकर सरकार और संगठन का तालमेल बिठाए रखने के लिए उन्होंने तकनीक का सहारा लिया है. मुख्यमंत्री होने के नाते उन्होंने यूं तो चारों सीटों पर प्रचार की कमान सीधे अपने हाथ में ली है, लेकिन उनके सामने कई चुनौतियां मुंह बाएं खड़ी हैं.

पैर की मांसपेशी खिंच जाने के बावजूद जयराम ठाकुर ने राज्य की 68 में से 40 से अधिक विधानसभाओं सीटों का दौरा कर लिया है. 'ऊपर' व 'नीचे' के हिमाचल में बंटा यह पहाड़ी राज्य अब 'एक' है, इसका संदेश देना जयराम नहीं भूलते. सीढ़ीनुमा खेतों में बैठी भीड़ को पहाड़ के एक कोने से संबोधित करते हुए पहाड़ी भाषा में अपनी बात कहकर वे महिलाओं व युवाओं को अपनेपन का एहसास करवाते हैं. पत्तल पर मिला दाल-भात व खैरू खाना इसलिए भी पसंद करते हैं क्योंकि ग्रामीण परिवेश में उन्होंने भी बचपन से ऐसा ही जीवन जीया है.

जयराम ठाकुर हर रोज सुबह 5 बजे फोन पर कॉन्फ्रेंस करके अपनी टीम को आगामी योजना और कार्य को निर्देश देते हैं. प्रत्याशियों से फीड बैक से लेकर विपक्ष की कार्यप्रणाली का विवरण भी लेते हैं. इसके लिए बाकायदा पार्टी से आई मेल और व्हाट्सएप समूहों को रिव्यू करना वे जरूरी मानते हैं. आदतन कार्यप्रणाली में शालीनता रखने वाले हिमाचली पहाड़ी नेता जयराम ठाकुर, चुनावी भाषणों में तीखी जुबान से आहत हैं. ''मैं नहीं चाहता कि पहाड़ की सीधी-सादी जिंदगी जीने वाले ऐसे अलफाज सीखें जो कभी उन्होंने सुने भी न हों. पहाड़ की संस्कृति बहुत शांत और समृद्ध है. बात सही तरीके से भी कही जा सकती है.''

वे अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं शांता कुमार, जे.पी. नड्डा, प्रभारी मंगल पांडे और प्रेम कुमार धूमल से लगातार बात करते हैं. अब प्रदेश में नरेंद्र मोदी व अमित शाह की रैलियां प्रस्तावित हैं, इसलिए कार्यक्रमों को मूर्त रूप देने के अलावा तिनके-तिनके को जोड़कर बड़ा कर रहे हैं.

वे न सिर्फ अपने नाराज साथियों को वापस पार्टी में ले रहे हैं बल्कि कांग्रेस के महत्वपूर्ण नेताओं को भी पार्टी में वापस लिया जा रहा है. कांग्रेस से पुराने मंत्री रहे सिंघीराम हों या स्वतंत्र विधायक सुरेंद्र काकू, निर्दलीय लड़े प्रवीण शर्मा या महेंद्र सोफत. कद्दावर नेताओं को पार्टी की मुख्य धारा में जोडऩे के लिए जयराम ठाकुर खुद पहल कर रहे हैं. हां, पार्टी के पुराने अध्यक्ष सुरेश चंदेल को कांग्रेस तोडऩे में कामयाब हो गई.

बहरहाल, डॉक्टरों ने मुक्चयमंत्री को न चलने की सलाह दी है. इसके बावजूद उनमें कदम दर कदम पहाड़ की ऊंचाई को छूने की चाह है ताकि अपनी पहली परीक्षा पर खरा उतरा जा सके.

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