एडवांस्ड सर्च

केरल-मोर्चे से गायब वाम

राहुल फैक्टर, कासरगोड में हत्याओं और सबरीमला ने यूडीएफ के लिए रास्ता तैयार किया. एलडीएफ का सूपड़ा साफ

Advertisement
aajtak.in
जीमोन जैकब केरल, 11 June 2019
केरल-मोर्चे से गायब वाम जीत का सेहरा तिरुवनंतपुरम में अपनी जीत का जश्न मनाते शशि थरूर

कांग्रेस देश के दूसरे हिस्से में निराश हो सकती है, लेकिन केरल में तो पार्टी की चांदी ही चांदी है! कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) ने राज्य की कुल 20 लोकसभा सीटों में से 19 जीतकर सत्तारूढ़ लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) को हाशिए पर ढकेल दिया.

लोकसभा चुनाव घोषित होने से पहले राज्य में कांग्रेस बेहाल दिख रही थी, उसे जैसे पुनर्जीवन मिल गया है. के.वी. थॉमस और पी.जे. कुरियन जैसे दिग्गज आपस में लड़ रहे थे. ओमन चांडी, वी.एम. सुधीरन, मुल्लापल्ली रामचंद्रन और के.सी. वेणुगोपाल जैसे शीर्ष नेता चुनाव लडऩे की स्थिति में नहीं दिखते थे. बेहतर प्रत्याशियों की तलाश के लिए संघर्ष करते हुए, कांग्रेस ने पार्टी के उम्मीदवार की सूची को एक सप्ताह के लिए टाल दिया और आखिरकार चुनाव लडऩे के लिए नेताओं की दूसरी पंक्ति तैयार की. लगता है, यह रणनीति काम कर गई है.

वायनाड से चुनाव लडऩे के कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के फैसले ने पार्टी की किस्मत बदल दी. अल्पसंख्यक कांग्रेस के साथ खड़े हुए. कांग्रेस की केरल इकाई के प्रमुख एम. रामचंद्रन ने इंडिया टुडे को बताया, ''अल्पसंख्यकों, महिलाओं और युवाओं ने कांग्रेस को वोट दिया. मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के जन-विरोधी और सर्वसत्तावादी कार्यशैली ने हमें बहुत मदद की.''

वे यूडीएफ को 47.3 प्रतिशत वोट मिलने के तीन बड़े कारण मानते हैं, ''कासरगोड में दो युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं की हत्या ने माकपा की क्रूरता को उजागर किया. पुलिस महानिदेशक लोकनाथ बेहरा के 'जी-हुजूर' रवैये और पुलिस के कुप्रबंधन ने भी एलडीएफ के पतन में योगदान दिया. अंत में, सबरीमला पर सरकार के रुख ने सत्ताधारी दल को सबक सिखाने के लिए वोटरों को कांग्रेस के पक्ष में खड़ा किया.''

कासरगोड, कन्नूर, वडकारा, कोझीकोड, पलक्कड़, अलातुर और कोल्लम के माकपा गढ़ों में वोटों को वामदलों से खिसकर कांग्रेस की ओर जाते देखा जा सकता था. लेकिन वामदल इस रुझान को समझने या अभियान के दौरान इसके मुकाबले के लिए कोई रणनीति बनाने में विफल रहे. अंत तक, एलडीएफ के शीर्ष नेताओं को लगता था कि कम से कम आठ सीटें तो वे जीत ही जाएंगे. लेकिन माकपा की एक के बाद एक सारी चुनावी रणनीति विफल रही.

कुछ लोग एलडीएफ की हार में आरएसएस का हाथ मानते हैं. द हिंदू के एन.जे. नायर के अनुसार, ''आरएसएस ने अपने काडर को तिरुवनंतपुरम, अटिंगल, पठनमथिट्टा, त्रिशूर और पलक्कड़ की पांच प्रमुख सीटों पर भाजपा के पक्ष में वोट करने और अन्य 15 सीटों पर कांग्रेस को वोट देने का निर्देश दिया.''

फिर, वायनाड से चुनाव लडऩे के राहुल के फैसले ने उत्प्रेरक का काम किया और अल्पसंख्यक कांग्रेस के साथ खड़े हो गए.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay