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हिमाचल प्रदेशः निवेश को न्योता

सरकार ने राज्य में देश-विदेश के निवेशकों को लुभाने के लिए लैंड बैंक, ऑनलाइन मंजूरी से लेकर कर में रियायत, यानी कारोबार की सहजता के उपायों का खाका पेश किया

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डी.डी. गुप्ता 21 February 2019
हिमाचल प्रदेशः निवेश को न्योता सलाह-मशविराः निवेशकों के औद्योगिक प्रस्तावों पर बात करते मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर

सेब राज्य हिमाचल प्रदेश में अब वे उत्पाद बनाए जाएंगे जो देश—विदेश के लोगों के जायके का हिस्सा होंगे. फूड प्रोसेसिंग उद्योगों को राज्य में भाजपा सरकार इसलिए ज्यादा से ज्यादा लगाना चाहती है क्योंकि यहां न सिर्फ खाद्य वस्तुओं का संवर्धन होगा बल्कि उससे प्रोडक्ट बनाने का उचित तापमान व माहौल भी है. यहां अपने सेब, कीवी, सी-बकथोर्न के अलावा कई ऐसे फल व कृषि उत्पाद होते हैं जो कम समय में खराब हो सकते हैं.

जयराम सरकार ने एक व्यापक नीति बनाने के बाद इन्वेस्टर्स को निमंत्रण दिया है. मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर खुद इस विषय की निगरानी कर रहे हैं और आला स्तर पर प्रधान सचिवों की एक बड़ी टीम काम कर रही है. न सिर्फ फूड पार्क बल्कि फूड प्रोसेसिंग यूनिट, कोल्ड स्टोर भी लगेंगे. इसके अलावा, ऊर्जा, फार्मा उद्योग और हेल्थ टूरिज्म के मद्देनजर सरकार ने एक नया प्रयोग किया है. देश-विदेश के निवेशकों को हिमाचल में उद्योग लगाने के लिए 31 और 1 फरवरी को इन्वेस्टर्स मीट आयोजित किया गया. बेंगलूरू और हैदराबाद में पहुंची समूची सरकार ने बड़े औद्योगिक घरानों को बताया है कि जमीन की उपलब्धता से लेकर अन्य रियायतों पर कैसे प्रस्ताव दिए जा रहे हैं.

सस्ती बिजली से लेकर समयबद्ध मंजूरियां भी इसमें शामिल हैं. राज्य में हर विधानसभा क्षेत्र में बन रहे हेलीपैड और 168 नेशनल हाइवे उद्योगों को सुगमता प्रदान करेंगे. रजिस्ट्रेशन से लेकर बैंक लोन की व्यवस्था भी लचीली होगी.

हिमाचल प्रदेश मुख्यतः ऐसे क्षेत्रों मंल फोकस कर रहा है जिस में पर्यटन को बढ़ावा मिले. टूरिज्म के साथ ही हाइड्रोपावर पर भी काम हो सके. मुख्यमंत्री ठाकुर कहते हैं, ''ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट करने का उद्देश्य यही है कि हिमाचल देव भूमि के अलावा देश का इंडस्ट्रियल हब बन सके. हमने ऐसी औद्योगिक नीति बनाई है जिसमें बुनियादी ढांचा सुदृढ़ मिले.'' प्रदेश में इन्वेस्टमेंट की वृहद संभावना है, आइटी, टूरिज्म इलेक्ट्रॉनिक, रियल एस्टेट, हेल्थ केयर और सब से ज्यादा तो फ्रूट प्रोसेसिंग यूनिटों का स्कोप है. हिमाचल एशिया का सबसे बड़ा फार्मा हब है. ठाकुर बताते हैं, ''फूड प्रोसेसिंग व्यवस्था के लिए अलग से नीति बना रहे हैं. क्योंकि हमारी मौसमी स्थितियां ऐसी हैं जो फल व सब्जी प्रबंधन के लिए उपयुक्त हैं. हम स्टैंप ड्यूटी पर छूट देंगे और फ्लोर एरिया रेशियो नियमों में भी छूट प्रदान करेंगे. जबकि भूमि प्रयोग व्यवस्था में भी रियायत प्रदान करेंगे. क्योंकि प्रदेश के पास न केवल शुद्ध हवा है बल्कि सस्ती व अबाधित बिजली भी उपलब्ध है.''

जो बदलाव राज्य सरकार ने किए हैं उसके साथ मुख्य तौर पर उद्योगों को अतिरिक्त लाभ भी दिए जाने हैं. इनमें विभिन्न स्तर पर अनुमति लेने के बजाए एक ही फॉर्म पर मंजूरी मिलेगी. इन्वेस्टर्स पेमेंट ऑनलाइन करेगा जिसे डीम्ड अनुमति मिल जाएगी. लैंड सेक्शन के लिए भी सिंगल विंडो में स्वीकृति होगी.

7 दिनों के भीतर बिजली कनेक्शन मिल जाएगा. इंस्पेक्शन भी अलग-अलग विभाग नहीं करेंगे बल्कि प्रदूषण नियंत्रण, उद्योग, श्रम विभाग इक्ट्ठा मिलकर निरीक्षण करेंगे. उद्योग को रियायत समयबद्ध मिलेगी. प्राइवेट लैंड बैंक दिया जा रहा है. कारोबार की सहजता के लिए हर विभाग समयबद्ध कार्य पूरा करेगा जो सर्विस गारंटी ऐक्ट के तहत तहत आएगा.

प्रदेश सरकार खाद्य प्रसंस्करण को प्राथमिकता दे रही है. मौजूदा खाद्य विधायन यूनिटों को बढ़ावा देना और नए लगाना सरकार की प्राथमिकता में है. कोल्ड स्टोर बनाना और फ्रोजन मटर का संवर्धन करना भी इस योजना का हिस्सा है. टमाटर से बने उत्पादों पर कार्य किया जाएगा. मशरूम को सुखाकर प्रिजर्व किया जाएगा. फ्रूट वाइन बनाने को लेकर कई किस्म के उद्योगों को लगाया जाना प्रस्तावित है. इसके लिए मेगा फूड पार्क बनाया जा रहा है. इसमें न सिर्फ टेस्ट लैब होंगी बल्कि 12 कोल्ड चेन प्रोजेक्ट बनेंगे, जिसके लिए भूमि का चयन भी कर लिया गया है.

उद्योगों के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार ने लैंड बैंक तैयार कर लिया है. चार जगह इंडस्ट्रियल पार्क बनेंगे—कांगड़ा, ऊना, शिमला और सोलन. इन जगहों पर पहुंचना आसान है. कांगड़ा में सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क बनेगा. ऊना में मेगा फूड पार्क और टेक्सटाइल पार्क बनाया जाना है. सोलन के अदूवाल में बायोटेक्नोलॉजी पार्क और नालागढ़ के क्षेत्र में बल्क ड्रग पार्क बनेगा. शिमला के मैहली में सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क बनने जा रहा है. राज्य सरकार ने इसी तरह पर्यटन का सर्किट भी तैयार कर लिया है.

हिमाचल में प्रत्येक वर्ष औसतन 2 करोड़ पर्यटक आते हैं. धार्मिक एडवेंचर, ईको, सांस्कृतिक टूरिज्म तो है ही, इसके अलावा सरकार बद्दी, सोलन, सुकेती झटिंगरी, बंजार और बिलासपुर में टूरिज्म इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करके निवेशकों को नए ऑफर दे रही है. हेली टैक्सी से टूरिज्म सर्किट जुड़ेगा, जिसमें रोपवे, फिल्म सिटी, लेक टूरिज्म, चाय व फल बागान टूरिज्म के अलावा पांच सितारा होटल जुड़ेंगे. इस क्षेत्र में 10,000 करोड़ रु. का निवेश अपेक्षित है.

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