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जम्मू-कश्मीरः उग्रवादियों के निशाने पर पुलिस

जम्मू-कश्मीर पुलिस विभाग में उग्रवाद की लड़ाई घरों तक ले जाने के फैसले को लेकर बहस छिड़ गई है. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी कहते हैं कि वे और उनके बहुत से सहकर्मी उग्रवादियों के परिवार वालों को निशाना बनाए जाने के खिलाफ थे.

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aajtak.in
असित जॉलीनई दिल्ली, 11 September 2018
जम्मू-कश्मीरः उग्रवादियों के निशाने पर पुलिस जानलेवा हरकतेंः मारे गए पुलिसकर्मी के ताबूत के पास रोता-बिलखता एक रिश्तेदार

अगस्त की 22 तारीख. शाम को दो हथियारबंद लोग पुलवामा में पुलिस इंस्पेक्टर मोहम्मद अशरफ डार के घर में घुस गए और उनके दो बेटों को अगवा कर लिया. इसके बाद अशरफ जब आए तो उनकी गोली मारकर हत्या कर दी. उसी रोज उग्रवादियों ने छुट्टी पर घर आए दो और पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी.

हाल के महीनों में उग्रवादियों के मारे जाने के जवाब में पुलिस कर्मियों पर हमलों की अभूतपूर्व घटनाएं देखने को मिली हैं. इतना ही नहीं, उनकी हत्याओं का प्रदर्शन भी किया जा रहा है. इन दिनों दिखाए जा रहे एक वीडियो में 28 साल के एसपीओ (स्पेशल पुलिस ऑफिसर) मोहम्मद सलीम शाह जिन्हें हाल में तरक्की देकर ट्रेनी कांस्टेबल बना दिया गया था, उग्रवादियों के सामने गिड़गिड़ा रहे हैं. गोलियों से छलनी शाह का शव 21 जुलाई को कैमोह गांव के बाहर मिला.

एक सप्ताह बाद हिज्बुल मुजाहिदीन के उग्रवादियों ने एसपीओ मुदस्सिर अहमद लोन को त्राल में उनके घर से अगवा कर लिया. पुलिस महकमे में खानसामा की नौकरी करने वाले लोन के परिजनों ने रहम की भीख मांगी.

उन्हें इस चेतावनी के साथ रिहा किया गया कि जम्मू-कश्मीर पुलिस के दूसरे कर्मचारी नौकरी छोड़ दें. अकेले त्राल में ही 20 एसपीओ ने मस्जिद के लाउडस्पीकरों से नौकरी छोडऩे के फैसले का ऐलान किया.

जम्मू-कश्मीर पुलिस (जेकेपी) के पास करीब 35,000 एसपीओ हैं जो पुलिस विभाग में नियमित नौकरी मिलने की आस लगाए हुए हैं. पुलिस विभाग राज्य के युवाओं के लिए रोजगार का मुख्य आकर्षण बना हुआ है. जुलाई 2016 में हिज्ब कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद दो वर्षों में घाटी के करीब 9,000 युवा पुलिस में भर्ती हो चुके हैं.

इस साल 29 अगस्त की हत्या को मिलाकर कुल 35 पुलिसकर्मियों की हत्या हो चुकी है, जो 2017 में पूरे साल कुल हत्या से भी ज्यादा है. इन हमलों के जवाब में सुरक्षा बलों ने दक्षिण कश्मीर के कई गांवों में छापे मारे.

दो स्थानीय उग्रवादियों के घरों को आग लगा दी गई ताकि ''उग्रवादियों पर दबाव डाला जा सके.'' हिज्ब के कमांडर रियाज नाइकू के पिता असदुल्ला नाइकू समेत परिवार के कई सदस्यों को हिरासत में ले लिया गया.

लेकिन सुरक्षा बलों का यह कदम तुरंत ही उलटा पड़ गया. नाइकू के पिता को रिहा कराने के लिए उग्रवादियों ने पुलिसकर्मियों के परिवार के 11 सदस्यों को अगवा कर लिया. अब जम्मू-कश्मीर पुलिस विभाग में उग्रवाद की लड़ाई घरों तक ले जाने के फैसले को लेकर बहस छिड़ गई है.

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी कहते हैं कि वे और उनके बहुत से सहकर्मी उग्रवादियों के परिवार वालों को निशाना बनाए जाने के खिलाफ थे. उनका इशारा था कि यह फैसला ऊपर से आया था.

इस स्थिति ने चिंता पैदा कर दी है. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी कहते हैं, ''कश्मीर में आज खाकी वर्दी पहनने से आप निशाना बन सकते हैं, भले ही आप कहीं भी तैनात हों.'' इस सबके बीच कहा जा रहा है कि राज्य पुलिस एक सलाह देने जा रही है जिसमें पुलिसकर्मियों को दो घंटे से ज्यादा अपने घर पर रहने की इजाजत नहीं दी जाएगी. केंद्रीय गृह मंत्रालय भी पुलिसकर्मियों के परिवारों के लिए 'सुरक्षित आवास' बना रहा है.

इस साल अभी तक मारे गए पुलिसकर्मियों की संख्या 2017 में मारे गए पुलिसकर्मियों से अधिक है.

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