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जम्मू-कश्मीरः खौफ में वर्दीधारी

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हिज्बुल मुजाहिदीन कमांडर रियाज नाइकू के निर्देशन में करीब दो दर्जन आतंकवादियों ने बटागुंड और कपरान गांवों में तड़के सुबह हमले किए. इससे पहले दक्षिण कश्मीर में भी इसी तरह हत्याएं हुई थीं.

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aajtak.in
मोअज्जम मोहमम्मद, श्रीनगर मेंनई दिल्ली, 03 October 2018
जम्मू-कश्मीरः खौफ में वर्दीधारी ड़ी क्षति मारे गए पुलिसकर्मियों के ताबूत पर फूल चढ़ाता एक पुलिसकर्मी

जम्मू-कश्मीर पुलिस के तीन जवानों, फिरदौस अहमद कुचे, निसार अहमद धोबी और कुलवंत सिंह की शोपियां में 21 सितंबर को हत्या कर दिए जाने के कारण घाटी में तैनात पुलिसबलों में खौफ का माहौल बन गया है. सरकार और सुरक्षाबलों ने इन हत्याओं को मामूली घटना के रूप में दर्शाने की कोशिशें कीं, पर हकीकत यही है कि घाटी में पुलिसबल का मनोबल गिरा है और उनके इस्तीफे की बाढ़-सी आ गई है. खासतौर से निचले रैंक के अधिकारी और जवान इस्तीफे दे रहे हैं.

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हिज्बुल मुजाहिदीन कमांडर रियाज नाइकू के निर्देशन में करीब दो दर्जन आतंकवादियों ने बटागुंड और कपरान गांवों में तड़के सुबह हमले किए. इससे पहले दक्षिण कश्मीर में भी इसी तरह हत्याएं हुई थीं. आतंकियों ने पुलिसकर्मियों को बंदूक की नोक पर उनके घरों से बाहर निकाला और करीब से गोली मार दी. मारे गए पुलिसकर्मियों में राजपूत परिवार का भी एक जवान शामिल था जो परिवार का एकमात्र कमाऊ सदस्य था. 1990 के दशक में घाटी से हुए हिंदुओं के पलायन के बावजूद यह परिवार घाटी छोड़कर नहीं गया था.

कुछ दिन पहले ही नाइकू ने एसपीओ (विशेष पुलिस अधिकारी) को चेतावनी दी थी कि या तो वे नौकरी छोड़ दें या फिर मरने के लिए तैयार हो जाएं. एक फेसबुक पोस्ट में नाइकू ने उन्हें "कश्मीर की आजादी की जंग के खिलाफ भारत की ओर से इस्तेमाल किए जा रहे खामोश हत्यारे'' बताते हुए आरोप लगाया था कि ये एसपीओ सुरक्षाबलों को आतंकवादियों की गतिविधियों और उनके छिपने के ठिकानों की सूचना दे रहे हैं. श्रीनगर में इसी तरह की चेतावनी वाले कई पोस्टर नजर आए, जिनमें से एक तो सीआरपीएफ कैंप के बाहर भी लगाया गया था.

21 सितंबर के बाद, दर्जनों एसपीओ ने सोशल मीडिया पर अपना इस्तीफा पोस्ट किया और स्थानीय मस्जिद कमेटियों को खत लिखकर अपने इस्तीफे की जानकारी दी. राज्य के डीजीपी दिलबाग सिंह ने इन रिपोर्टों को "प्रायोजित अफवाहें'' करार देते हुए खारिज करते हुए कहा कि इसमें कुछ भी नया नहीं है और "आतंकवादी पहले भी इस तरह की अफवाहें फैलाने की कोशिशें कर चुके हैं''. लेकिन सोशल मीडिया पर पुलिसकर्मियों का इस्तीफा पोस्ट किया जाना जारी है.

फेसबुक पोस्ट के जरिए पुलिसबल छोडऩे का ऐलान सबसे पहले कुलगाम की एक महिला एसपीओ रफीका अख्तर ने किया था. 15 साल से पुलिस के साथ काम कर रहीं रफीका ने 23 सितंबर को एक वीडियो पोस्ट कर अपने इस्तीफे का ऐलान किया. उसके बाद पुलिस शिकायत निवारण इकाई में तैनात 22 वर्षीय रमीज राजा सहित कई अन्य लोगों ने अपने इस्तीफे पोस्ट किए. यह भी कहा जा रहा है कि इस्तीफे की घोषणा महज रणनीति हो सकती है. 2011 के चुनावों के बाद इसी तरह की धमकियों के जवाब में पंचायत सदस्यों ने "इस्तीफे'' का ऐलान किया था पर उनमें से ज्यादातर चुपचाप जून 2016 में अपने कार्यकाल की समाप्ति तक काम करते रहे. फिर भी, इस ताजा सिलसिले ने राज्य प्रशासन को पुलवामा और शॉपियां में इंटरनेट सेवाएं बंद करने को मजबूर कर दिया है.

जम्मू-कश्मीर के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मानते हैं कि बढ़ते हमलों से एसपीओ के मनोबल पर असर तो पड़ा है. इस साल जनवरी से लेकर अब तक 37 पुलिसकर्मी मारे गए हैं. राज्य सरकार अब "सुरक्षित'' जिला पुलिस लाइनों के भीतर ही पुलिसबलों के परिवारों के लिए आवास और गेस्ट हाउस बनाने की योजना बना रही है. साथ ही, एसपीओ का वेतन मौजूदा 6,000 रुपए से बढ़ाकर 15,000 रुपए किया जा रहा है. तात्कालिक उपाय के तौर पर, दक्षिण कश्मीर में रहने वाले जवानों को फिलहाल घर जाने से बचने की सलाह दी गई है.

जम्मू-कश्मीर के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी स्वीकार करते हैं कि इन हमलों के कारण जवानों के मनोबल पर असर तो हुआ है

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