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आइसीआइसीआइ बैंक घोटालाः क्या आ गई कोचर की विदाई की वेला?

कोचर को पतन की तरफ ले जाने वाले हालात भी उतने ही नाटकीय रहे हैं जितना कॉर्पोरेट जगत में उनका सीढिय़ां चढऩा था. 56 वर्षीय कोचर आइसीआइसीआइ बैंक के साथ 1984 में मैनेजमेंट ट्रेनी के तौर पर जुड़ी थीं.

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एम.जी. अरुणनई दिल्ली, 26 June 2018
आइसीआइसीआइ बैंक घोटालाः क्या आ गई कोचर की विदाई की वेला? आइसीआइसीआइ की सीईओ चंदा कोचर

देश के दूसरे सबसे बड़े और 11 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की कुल जमा संपत्ति वाले बैंक आइसीआइसीआइ की बोर्ड ने आखिरकार बाजार नियामक सेबी और निवेशकों के दबाव के आगे घुटने टेकते हुए एमडी और सीईओ चंदा कोचर को छुट्टी पर भेज दिया. चंदा कोचर के खिलाफ यह कदम अपने लिए कथित फायदों की एवज में कर्ज देने और भुगतान करने तथा बैंक के साथ उनके निजी हितों के टकराव की आंतरिक जांच के चलते उठाया गया है. 18 जून को बोर्ड ने संदीप बख्शी को पांच साल के लिए बैंक का चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर नियुक्त किया, जो बैंक की बीमा कंपनी आइसीआइसीआइ प्रुडेंशियल की अगुआई कर रहे थे.

हालांकि बीते तीन महीनों से ज्यादा समय से कोचर को पद से हटाने की मांग हो रही थी, पर मार्च में बोर्ड ने उनके खिलाफ आरोपों को खारिज करते हुए क्लीन चिट दे दी थी. मुश्किल तब शुरू हुई जब मीडिया ने वीडियोकोन और आइसीआइसीआइ बैंक दोनों के शेयरधारक अरविंद गुप्ता के उठाए मुद्दों को सामने रखा. गुप्ता ने 2016 में प्रधानमंत्री और सेबी को लिखा था और आरोप लगाया था कि यह बैंक में ''एहसान के बदले एहसान'' का साफ मामला है.

उन्होंने आरोप लगाया था कि चंदा कोचर के पति दीपक कोचर ने अपने पत्नी के साथ अपने रिश्तों का फायदा उठाया था. दीपक वैकल्पिक ऊर्जा की अपनी स्टार्ट-अप कंपनी नुपॉवर में निवेशक के तौर पर वीडियोकोन समूह के चेयरमैन वेणुगोपाल धूत को ले आए थे. केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआइ) धूत की तरफ से दिए गए 64 करोड़ रुपए के कर्ज सहित नुपॉवर में हुए लेनदेन, अलग-अलग कंपनियां बनाने और वीडियोकोन को आइसीआइसीआइ बैंक से 3,250 करोड़ रुपए का कर्ज मिलने के छह महीने बाद तमाम शेयर धूत की तरफ से दीपक कोचर को अंतिम तौर पर ट्रांसफर कर देने की जांच कर रही है.

इसके साथ ही दीपक के भाई राजीव कोचर के कारोबारी सौदे भी जांच के दायरे में हैं. राजीव की कंपनी एविस्टा एडवाइजरी ग्रुप आइसीआइसीआइ बैंक के ग्राहकों को सलाह देती थी, जिसे साफ-साफ हितों के टकराव का मामला माना जा रहा है. सेबी ने मई में आइसीआइसीआइ बैंक और चंदा कोचर को प्रतिभूति कानून के तहत खुलासे की शर्तों के कथित उल्लंघन के लिए कारण बताओ नोटिस दिया था.

कोचर को पतन की तरफ ले जाने वाले हालात भी उतने ही नाटकीय रहे हैं जितना कॉर्पोरेट जगत में उनका सीढिय़ां चढऩा था. 56 वर्षीय कोचर आइसीआइसीआइ बैंक के साथ 1984 में मैनेजमेंट ट्रेनी के तौर पर जुड़ी थीं, जब यह इंडस्ट्रियल क्रेडिट ऐंड इनवेस्टमेंट कार्पोरेशन ऑफ इंडिया हुआ करता था. तरक्की की सीढिय़ां चढ़ते हुए उन्होंने 2009 में बैंक के एमडी और सीईओ की कमान संभाली. वे उद्योग के सबसे ज्यादा तनख्वाह हासिल करने वालों में भी शुमार हैं—2016-17 में उन्हें 6 करोड़ रु. से ज्यादा तनख्वाह मिलती थी. उनके मार्गदर्शक और तब बैंक के चेयरमैन के.वी. कामथ ने 2003 के मुश्किल वक्त में उन्हें जिम्मेदारी सौंपी थी, जब बैंक के दिवालिया होने की अफवाहें फैली थीं, जो गुजरात से शुरू हुई बताई जाती थीं.

उस वक्त वे बैंक में रिटेल की प्रमुख थीं. वर्षों बाद एमडी की कमान संभालने पर संकट से निबटने के कोचर के हुनर की फिर आजमाइश हुई जब वैश्विक वित्तीय संकट के बाद बैंक को एक बार फिर इसी किस्म की अफवाहों से जूझना पड़ा. उन्हें बैंक को सेक्टर की विशालकाय  कंपनी बनाने का श्रेय दिया जाता है, जिसके पास देश भर में 4,800 से ज्यादा शाखाओं और 14,000 से ज्यादा एटीएम का विशाल नेटवर्क है और जिसका कामकाज 17 देशों में फैला है. 31 मार्च, 2018 को खत्म हुए साल में बैंक ने टैक्स चुकाने के बाद 6,777 करोड़ रुपए का मुनाफा कमाया था.

जानकारों को लगता है कि निवेशकों की चिंताओं को दूर करने के लिए पहले ही काफी कुछ किया जाना चाहिए था. शेयरधारकों की प्रॉक्सी कंपनी इनगवर्न के संस्थापक और एमडी श्रीराम सुब्रमण्यम कहते हैं, ''निवेशकों को फिक्र इस बात की है कि आइसीआइसीआइ बैंक के बोर्ड ने पर्याप्त और जल्दी कार्रवाई नहीं की. यहां तक कि पूरे बोर्ड को बदलने की जबरदस्त मांग भी उठ सकती थी. जांच अब तेजी से पूरी होनी चाहिए.'' सूत्रों का कहना है कि कोचर का कार्यकाल मार्च 2019 में खत्म हो रहा है और संभव है कि उनके साथ नया करार नहीं किया जाएगा और नए एमडी और सीईओ, संभवतः बख्शी, कमान संभालेंगे.

सुब्रमण्यम कहते हैं कि आइसीआइसीआइ बैंक के पुराने दिग्गज बख्शी (वे बैंक के साथ 1986 में जुड़े थे) बैंक में अपने अनुभव और जानकारी की वजह से अच्छा चुनाव होंगे. फिर ताज्जुब क्या कि 18 जून को जब पहली खबरें आईं कि बोर्ड ने कोचर को छुट्टी पर जाने और कमान बख्शी को सौंपने के लिए कहा है, तब बीएसई में बैंक के शेयर चार फीसदी चढ़ गए.

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