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हिमाचल प्रदेशः युवा हाथों में हाथ

पार्टी में अब तक पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का दबदबा रहा है. लेकिन पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा भी जोर-आजमाइश करते रहे हैं. 2012 के विधानसभा में जब वीरभद्र सिंह को मुख्यमंत्री बनाया गया, तब आनंद शर्मा के समर्थक सुखवेंदर सुखू पार्टी अध्यक्ष बने.

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aajtak.in
मंजीत ठाकुर/ संध्या द्विवेदी नई दिल्ली, 15 October 2018
हिमाचल प्रदेशः युवा हाथों में हाथ जल संकट शक्ति ऐप लॉन्च करने के अवसर पर पार्टी अध्यक्ष सुखू और प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल

अब तक उम्रदराज नेताओं के पंजे में रही हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस, अब नई युवा टीम के सुपुर्द आ गई है. पहले 2014 के लोकसभा चुनाव और फिर दिसंबर, 2017 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की हार के बाद संगठन को तरोताजा करने के लिए ‘फॉर्मूला भाजपा’ तलाशा गया. विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के दिग्गजों को जिस तरह पटखनी मिली, उसके बाद संगठन नई युवा पीढ़ी के हवाले है. हालांकि नई पीढ़ी में भी ज्यादातर पुराने कद्दावर नेताओं की संतान हैं. प्रदेश के पार्टी अध्यक्ष सुखवेंदर सुखू ने सामान्य कार्यकर्ताओं को तरजीह देने का काम शुरू कर दिया है. इसको लेकर पार्टी के कुछ दिग्गजों में बेचैनी भी है.

पार्टी की नई प्रभावी रजनी पाटिल ने संगठन की नकेल कस रखी है. उन्होंने नए-पुराने, छोटे-बड़े, सभी नेताओं को मोदी सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतारा है. विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार को महज नौ महीने बीते हैं, लेकिन कांग्रेसी कुनबा जिस हनक के साथ सड़कों पर उतर रहा है, वह आगामी लोकसभा चुनावों के लिए पार्टी के कड़े तेवर का संकेत करता है.

हालांकि पार्टी में अभी भी नेतृत्व की लड़ाई जारी है. पार्टी में अब तक पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का दबदबा रहा है. लेकिन पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा भी जोर-आजमाइश करते रहे हैं. 2012 के विधानसभा में जब वीरभद्र सिंह को मुख्यमंत्री बनाया गया, तब आनंद शर्मा के समर्थक सुखवेंदर सुखू पार्टी अध्यक्ष बने. सुखू संगठन में नई युवा को टीम को पनाह देते गए. अब जब पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेसी मंत्री या फिर बोर्डों-निगमों में मलाईदार पद पर बैठे दिग्गज हार गए, तब वीरभद्र खेमा कमजोर पड़ गया.

हारने वाले कौल ङ्क्षसह और जी.एस. बाली जैसे दिग्गज तो मुक्चयमंत्री पद के दावेदारों में थे. हालांकि चुनाव में पूर्व मंत्री आशा कुमारी और मुकेश अग्निहोत्री ने जीत दर्ज की थी. जब वीरभद्र खेमे ने कांग्रेस विधायक दल के नेता के रूप में मुकेश को चुना, तो बतौर पार्टी अध्यक्ष सुखू ने संगठन में द्ब्रलॅाक से जिला स्तर तक अपनी नई टीम खड़ी कर दी. वहीं वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य भी बड़ी आकाक्षाएं पाले हुए हैं. वे क्रिकेट के जरिए प्रदेश में अपनी जड़ें मजबूत करने में जुटे हैं.

वीरभद्र खेमा लोकसभा चुनावों से पहले पार्टी अध्यक्ष के पद से सूखू को हटवाना चाहता है. वहीं आनंद खेमा ऐसी स्थिति में भी अपना मोहरा बैठाना चाहता है. लेकिन जिस तरह से सुखू ने संगठन को सक्रिय रखा और केंद्र सरकार पर वार की रणनीति बनाई, उससे संभव है कि लोकसभा चुनाव उन्हीं की अध्यक्षता में लड़ा जाए.

कांग्रेस राज्य में डिजिटल तौर पर भी मुस्तैद है. उसने बूथ और ब्लॉक स्तर पर भी टीम बनाई है, जिसे मोबाइल के जरिये जोड़ा गया है. रोजाना टीम को निर्देश दिए जाते हैं. तीन स्तर पर योजना बनती है—पहला, स्थानीय मुद्दों, प्रादेशिक मुद्दे और तीसरा राष्ट्रीय मुद्दे. सोशल मीडिया में कार्टून और छोटी वीडियो बनाकर भाजपा पर हमला बोला जाता है. वहीं राष्ट्रीय स्तर के मुद्दों की तस्वीरें-वीडियो भी शेयर होते हैं. इसकी फीडबैक केंद्रीय टीम लेती है. सुखू बताते हैं, ''हमने तय किया है कि कार्यकर्ता मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ बोलें. हमने पेट्रोल मूल्य वृद्धि, राज्य में बढ़े बसों के किरायों पर विरोध रैलियां की हैं. इसका असर सरकार पर हुआ है. खराब सड़क व्यवस्था जैसे मुद्दों से हम जनता को अवगत कर रहे हैं.'' 

2014 में कांग्रेस प्रदेश की चारों लोकसभा सीटों पर हार गई थी. लेकिन मंडी सीट पर वीरभद्र परिवार का अच्छा-खासा असर दिखा. इस बार मंडी से सुखराम ने भाजपा का दामन थामा है जो वीरभद्र परिवार के दांव पलटने का माद्दा रखता है. वहीं कांग्रेस राज में वीरभद्र ने भाजपा के खिलाफ भ्रष्टाचार के बड़े मुद्दे उठाए थे. लेकिन अभी तक जयराम सरकार के खिलाफ कांग्रेस के पास बोलने को कुछ भी नहीं है. हालांकि कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता नरेश चैहान कहते हैं, ''हमने कई नए विंग बनाए हैं. किसान खेती, कामगार विंग आदि, जिनके माध्यम में हम लोगों के संपर्क में हैं. हम प्रदेश में बढ़ते नशे के खिलाफ बोल रहे हैं और खराब सड़क व्यवस्था पर भी.''

लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस नए लोगों की तलाश में है. पार्टी अध्यक्ष कहते हैं कि इसके लिए आंतरिक सर्वे चल रहा है. मंडी से वीरभद्र के बेटे विक्रमादित्य की हसरत परवान चढ़ी है तो शांता कुमार की काट ढूंढी जा रही है. कांग्रेस शिमला से नया चेहरा, तो हमीरपुर में अनुराग की चुनौती बढ़ाने के लिए बेहतर उम्मीदवार देना चाहती है. बहरहाल, उसकी युवा टीम नए तेवरों से लैस है.

लोकसभा चुनावों के मद्देनजर हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस को नए चेहरों की तलाश है

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