एडवांस्ड सर्च

फूल पर सियासत

बारह बरस बाद 2018 में नीलकुरिंजी में फूल आने को हैं लेकिन मुन्नार पहाडिय़ों पर छिड़ी जमीन कब्जाने की जंग

Advertisement
जीमोन जैकबकेरल, 15 December 2017
फूल पर सियासत प्रकृति से खिलवाड़छ मुन्नार में कब्जाया गया एक प्लांट (ऊपर) खिले हुए कुरिंजी फूल

हर बारह बरस में खिलने वाले नीलकुरिंजी पौधे में जुलाई 2018 में फूल आने वाले हैं. केरल की मुन्नार पहाडिय़ों में पाए जाने वाले इस अनोखे पौधे पर फिर राजनीति शुरू हो गई है. 2006 में मुख्यमंत्री वी.एस. अच्युतानंदन की वाम मोर्चा सरकार ने राष्ट्रीय अभयारण्यों की तर्ज पर नीलकुरिंजी के लिए 3,200 हेक्टेयर के क्षेत्रफल को संरक्षित क्षेत्र घोषित कर दिया था. दरअसल, सरकार ने यह ऐलान इसलिए किया था क्योंकि पिछली बार इन फूलों की खूबसूरती को देखने करीब दस लाख पर्यटक जुटे थे. सरकार के इस फैसले का पर्यावरण प्रेमियों ने तो स्वागत किया था, लेकिन स्थानीय भूमि पट्टेदारों और भू-माफिया ने इसका जमकर विरोध किया था.

आखिरकार दबाव में आकर अच्युतानंदन कुरिंजी सैंक्चुअरी से जमीन के मालिकों को बाहर करने को तैयार हो गए थे. जिन लोगों को इससे फायदा हुआ था, उनमें इडुक्की से सांसद जोएस जॉर्ज और उनका परिवार भी था, जिन्होंने 58 एकड़ जमीन होने का दावा किया था. उनकी तरह कई अन्य राजनीतिकों को भी फायदा हुआ था.

लेकिन इस साल नवंबर के शुरू में जमीन पर वाम मोर्चा के इस सांसद के दावे को खारिज कर दिया गया क्योंकि उनके दावे को गैरकानूनी पाया गया था. पूर्व प्रधान वन संरक्षक वी.एस. वर्गीज कहते हैं कि उस इलाके में जमीन पर फर्जी दस्तावेज रखना आम बात है और अपराधी—राजनीतिकों-नौकरशाहों की मिलीभगत के कारण उनका सत्यापन करना अक्सर असंभव हो जाता है.

इस मुद्दे पर एलडीएफ और यूडीएफ सरकारों के चुप रहने से लगभग एक दशक से कुरिंजी सैंक्चुअरी का मामला भुलाया जा चुका था. लेकिन यह मामला उस वक्त दोबारा उठ गया जब वर्तमान मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने 2018 में नीलकुरिंजी के फूलने होने से पहले तैयारी करने के लिए एक बैठक बुलाई. पर्यटन विभाग ने मुन्नार में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए एक जोरदार हरित अभियान चलाने की योजना बनाई. इसके बाद एक बार फिर विवादित मुद्दे खड़े हो गए. 19 विधायकों वाली सीपीआइ और वन विभाग की प्रभारी का कहना था कि ''इस से केवल वैध जमीन मालिकों को ही बाहर रखा जाएगा. '' लेकिन सीपीएम के मंत्री एम.एम. मणि, जो इडुक्की से हैं, का कहना है कि पट्टों को जांच के बिना ही इससे बाहर रखा जाए. गठबंधन के भीतर ही विरोधी राय के कारण मुख्यमंत्री को मुन्नार का दौरा करने और जमीन के मालिकों से बात करने के लिए एक तीन सदस्यीय उपसमिति का गठन करना पड़ा.

विपक्षी नेता रमेश चेन्निथला, जो कांग्रेस से हैं, का कहना है कि यह उपसमिति ''नीलकुरिंजी सैंक्चुअरी बर्बाद करने के लिए बनाई गई है ताकि भू-माफिया को फायदा पहुंचाया जा सके.'' मजे की बात है कि भाजपा एकमात्र ऐसी पार्टी है जिसे अतिक्रमण करने वालों को बचाने में कोई प्रत्यक्ष रुचि नहीं है. इसमें राजनीतिक अवसर देखकर राज्य इकाई के प्रमुख कुम्मनम राजशेखरन ने मुन्नार में गैर-कानूनी रूप से जमीन हड़पने वालों के खिलाफ राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल में याचिका दी है. वे कहते हैं, ''माकपा पर्यावरण की दृष्टि से नाजुक इस इलाके को तबाह कर रही है.'' मुख्यमंत्री विजयन का कहना है कि उनकी सरकार ''कुरिंजी की जमीन की सुरक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है.'' इस बात पर जोर देते हुए कि केवल छोटे जमीन मालिकों को बचाया जाएगा, मुख्यमंत्री का कहना था कि कोई भी फैसला उपसमिति की रिपोर्ट मिलने के बाद ही किया जाएगा.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay