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हैवानियत की इंतेहां

राजसमंद में एक मुसलमान की निर्मम हत्या ने कट्टर हिंदुत्व की बढ़ती नफरत को उजागर किया

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रोहित परिहारराजस्थान, 15 December 2017
हैवानियत की इंतेहां पूरूषोत्तम दिवाकर

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी इस वीडियो की तुलना आइएसआइएस और तालिबान के उन वीडियो से कर रहे हैं, जिनमें बेरहमी से बंधकों के सिर कलम करते दिखाया जाता है. राजस्थान के राजसमंद जिले से जो वीडियो सामने आया है, वैसा भारत में पहले नहीं देखा गया. तीन बेटियों के पिता 38 वर्षीय शंभुलाल रैगर ने पश्चिम बंगाल के मालदा के रहने वाले 48 साल के मोहम्मद अफराजुल उर्फ भुट्टू को मजदूरी के काम का लालच देकर बुलाया और फिर अपने खेत में, जो कलेक्ट्रेट से एक किलोमीटर से भी कम दूरी पर है, ले जाकर उस पर कुल्हाड़ी और दरांती से बेहरहमी से वार करने लगा. हमले के दौरान अफराजुल रहम की भीख मांगता रहा पर शंभु का इतने से मन नहीं भरा. उसने उसके बाद अफराजुल को तेल छिड़ककर जला दिया.

इस दौरान शंभु का 15 साल का भांजा इस पूरे हमले का वीडियो बना रहा था. आरोपी ने इससे पहले आधे दर्जन ऐसे वीडियो भी बना रखे हैं जिसमें वह हिंदू कट्टरपंथियों की उग्र सांप्रदायिक भाषा बोलता दिखता है और हिंदुओं से धर्म के नाम पर एक होने और जाति के नाम पर विभाजित न होने की बात भी कह रहा है. लेकिन उसने पुलिस से कहा कि उसने अफराजुल को लव जेहाद की वजह से मारा, ताकि वह हिंदू लड़कियों को मुसलमानों के हाथों शोषित होने से बचा सके. जाहिर है, यह पूरी तरह से मुसलमानों के खिलाफ नफरत भरे अपराध का मामला है.

लव जेहाद शब्द हिंदू कट्टरपंथियों ने प्रसारित किया है ताकि मुसलमानों पर हिंदू लड़कियों को साजिश के तहत प्रेमजाल में फंसाने का आरोप लगाया जा सके. आरोपी का भांजा भी पुलिस हिरासत में है और उस पर बाल अपराध कानून के तहत आरोप तय किए जाएंगे. पुलिस अफसरों ने इंडिया टुडे से कहा, ''यह देखना हैरानी भरा है कि मुसलमानों के खिलाफ हिंदू कट्टरपंथियों के दुष्प्रचार ने किस तरह शंभु का ब्रेनवाश किया. यहां तक कि उसके भांजे का भी.'' पिछले महीने जयपुर में आरएसएस के आनुषंगिक संगठन के आध्यात्मिक मेले में बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद ने लव जेहाद के खिलाफ परचे बांटे थे और उसमें मुसलमानों को खलनायक बताया था.

अब तक की जांच में पता चला है कि अफराजुल निर्दोष था. अभी तक उसका किसी हिंदू लड़की से किसी किस्म के संबंध की जानकारी नहीं है. वह अपने भाई के साथ 15 साल पहले राजसमंद और उदयपुर आया था और मजदूरी से शुरुआत करते हुए छोटा-मोटा ठेकेदार बन गया था. आरोपी शंभु का कहना है कि उसने अफराजुल को चुना क्योंकि वह मुसलमान था. शंभु खुद संगमरमर का छोटा कारोबारी है जो कुछ साल तक गुडग़ांव और गुजरात, जहां उसके मां-बाप रहते हैं, में काम करके लौटा है. उसने इमारतें बनाने और बेचने का धंधा शुरू किया था पर नोटबंदी ने उसके कारोबार को चौपट कर डाला और साल भर से वह बेकार बैठा था. पुलिस का कहना है कि वह किसी हिंदू अतिवादी संगठन से नहीं जुड़ा है, न ही उसके परिवार में किसी ने अंतरजातीय या धर्म से बाहर शादी की है. उसे अपने किए का पछतावा नहीं है और खास तौर पर लव जेहाद के नाम पर मुसलमानों के खिलाफ फैलाए गए नफरत के असर में था. उसकी एक नाबालिग बेटी मानसिक रूप से अस्थिर है.

शंभु के मन में मुसलमानों के खिलाफ वैर की वजह उसकी कॉलोनी में हुई एक घटना थी, जिसमें वह खुद भी शामिल था. करीब 15 साल पहले पश्चिम बंगाल के मुस्लिम ठेकेदार बल्लू शेख का उसकी कॉलोनी की एक महिला डॉली बाई से प्रेम संबंध था. कुछ साल बाद बल्लू ने उसे छोड़ दिया और डॉली की बेटी पूजा रैगर के साथ रहने लगा जो उस वक्त महज 14 साल की थी. वह पूजा को अपने घर मालदा ले गया. दो महीने बाद डॉली मालदा गई और बेटी को वापस ले आई. कुछ वक्त बाद बल्लू के साथ रहने के लिए पूजा फिर मालदा चली गई. पांच या छह साल पहले वह अपनी मां को फोन करने लगी और कहने लगी कि उसके साथ अच्छा सुलूक नहीं किया जा रहा है. तीन साल पहले डॉली ने पूजा को लाने के लिए शंभु को मालदा भेजा. शंभु वहां पूजा से मिला और उसने उसे सफर के लिए कुछ रकम दे दी. दस दिन बाद पूजा अपनी मां के पास लौट आई. कुछ साल मां के साथ रहने के बाद पूजा अलग रहने लगी. शंभु ने पुलिस को बताया कि बल्लू मुसलमान था, जिसने डॉली और पूजा, दोनों की जिंदगी बर्बाद कर दी और पूजा को देह व्यापार में धकेल दिया. शंभु और पूजा, दोनों ने इस बात से इनकार किया है कि उन दोनों के बीच कोई रिश्ता था या हाल ही में कोई संपर्क हुआ था.

बिना किसी वजह के इस बर्बर हत्या के बाद मानवाधिकार संगठन पीपल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज ने राज्य में मुसलमानों के खिलाफ भड़काऊ गतिविधियों पर लगाम लगाने में नाकामी के लिए मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया का इस्तीफा मांगा है. राजे ने इस घटना को जघन्य बताया और इसकी निंदा की है, ''यह घटना निंदनीय है. पर यह सराहनीय है कि पुलिस ने आरोपी को फौरन गिरफ्तार कर लिया.'' पर इस घटना ने पिछले महीने जयपुर की उस घटना की याद दिला दी जिसमें हीरा तराशने का काम करने वाले चेतन सैनी का शव रहस्यमयी ढंग से नाहरगढ़ के किले की दीवार से लटका मिला. उसके आसपास 35 जगहों पर पद्मावती फिल्म के खिलाफ प्रदर्शन से जुड़ी बातें लिखी थीं. इन नारों के दोतरफा मतलब निकाले जा सकते थे, यानी कट्टरपंथी मुसलमानों को भी दोषी ठहराया जा सकता था या फिल्म के विरोधियों को भी. किसी सुराग के अभाव में पुलिस उस हत्या को खुदकुशी मान रही है. जांच की रफ्तार इतनी धीमी है कि दो हफ्तों बाद भी मृतक के हाथ की लिखावट को वहां लिखे गए नारों से मिलाने के लिए भेजे गए नमूनों की फोरेंसिक रिपोर्ट नहीं मिली है, विसरा रिपोर्ट की तो बात ही छोड़ दें, जिससे पता चलेगा कि वह नशे में था या नहीं.

इतना साफ है कि प्रदेश में सांप्रदायिक उन्माद बढ़ रहा है, जिसमें गायों के नाम पर पहले ही दो मुसलमानों की हत्या हो चुकी है. इस हत्या के बाद पुलिस ने राज्य में इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया. पुलिस महानिदेशक ओ.पी. गल्होत्रा ने ऐसे वीडियो के वायरल किए जाने पर चिंता जताई. पुलिस के मुताबिक, उसने पूरी एहतियात बरती है ताकि राजसमंद और उसके आसपास सांप्रदायिक दंगे न भड़कें. पर पुलिस को सांप्रदायिक नफरत फैलाने में लिप्त हिंदू कट्टरपंथियों के खिलाफ कड़े कदम भी उठाने होंगे भले ही राज्य में हिंदुत्ववादी भाजपा की सरकार हो.

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