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गुजरातः कोली नेता के दल बदलने से कांग्रेस को लगा एक और धक्का

रूपानी अरसे से बावलिया को रिझा रहे थे. उन्हें जल संसाधन, पशुपालन और ग्रामीण विकास मंत्रालय दिए गए हैं. इनसे रूपानी को ग्रामीण गुजरात में भाजपा के समर्थन आधार को पुख्ता करने में मदद मिल सकती है.

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aajtak.in
संध्या द्विवेदी/ मंजीत ठाकुर नई दिल्ली, 17 July 2018
गुजरातः कोली नेता के दल बदलने से कांग्रेस को लगा एक और धक्का स्वागतः शपथ लेते नए मंत्री कुंवरजी बावलिया और मुख्यमंत्री रूपानी

अब गुजरात में कांग्रेस की सुधरती हालत को 3 जुलाई को एक बड़ा धक्का लगा है. कोली समाज के असरदार नेता 63 वर्षीय कुंवरजी बावलिया कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए. उन्होंने सौराष्ट्र में कोलियों और अन्य ओबीसी वोटरों के बीच कांग्रेस के पैर जमाने में खासी मदद की थी. कांग्रेस की विधायकी से इस्तीफा देने के कुछ ही घंटों के भीतर उन्हें मुख्यमंत्री विजय रूपानी की सरकार में राज्यमंत्री के तौर पर शपथ भी दिलवा दी गई.

रूपानी अरसे से बावलिया को रिझा रहे थे. उन्हें जल संसाधन, पशुपालन और ग्रामीण विकास मंत्रालय दिए गए हैं. इनसे रूपानी को ग्रामीण गुजरात में भाजपा के समर्थन आधार को पुख्ता करने में मदद मिल सकती है. बावलिया कांग्रेस से तभी से नाराज थे जब राहुल गांधी ने उन्हें विधानसभा में विपक्ष का नेता बनाने से मना कर दिया था.

उनके बजाय युवा पटेल नेता परेश धनानी को यह ओहदा दे दिया गया. राज्य इकाई के मुखिया के ओहदे के लिए भी बावलिया को दरकिनार करके 42 वर्षीय ओबीसी नेता अमित चावड़ा को राज्य कांग्रेस अध्यक्ष बना दिया गया था.

बावलिया ने हाल में ऑल इंडिया कोली समाज के अध्यक्ष की कमान संभाली है. भाजपा को उम्मीद है कि उनसे 2019 के चुनावों में पार्टी को मदद मिलेगी. भाजप के नेताओं का कहना है कि पार्टी में आने से भाजपा को इस समुदाय की मौजूदगी वाले अन्य राज्यों में भी मदद मिलेगी. रूपानी सरकार में अब दो कोली नेता हैं—दूसरे पुरुषोत्तम सोलंकी हैं.

भाजपा में शामिल होने के बाद बावलिया ने कांग्रेस अध्यक्ष पर हमला बोलते हुए कहा, ''राहुल गांधी जातिवाद से तार-तार पार्टी में सफल नहीं हो सकते. वे खुद जातिवाद की सियासत करते हैं.'' धनानी ने भी पलटवार करते हुए कहा कि बावलिया ने अपनी 'सत्तालोलुपता' के आगे घुटने टेक दिए.

इस पालाबदल से भौचक कांग्रेस नेता बताते हैं कि बावलिया को रिश्तेदारों के लिए टिकट सहित वह सब दिया गया जो उन्होंने मांगा. बावलिया का पहला इम्तहान छह महीनों से भी कम वक्त में होगा जब उन्हें विधानसभा में लौटने के लिए जसदण से भाजपा उम्मीदवार के तौर पर उपचुनाव लडऩा पड़ेगा.

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