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आंध्र प्रदेशः जमीन पर सरकार

अपनी कल्याणकारी योजनाओं पर अमल के लिए ग्राम स्वयंसेवकों की फौज खड़ी कर रहे हैं जगन

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aajtak.in
अमरनाथ के. मेनन/ मंजीत ठाकुर आंध्र प्रदेश, 27 August 2019
आंध्र प्रदेशः जमीन पर सरकार फोटोः के. भास्कर

आंध्र प्रदेश में सरकारी कामकाज को नीचे से ऊपर ले जाने की अनोखी शैली अपनाई जा रही है. मुख्यमंत्री वाइ.एस. जगनमोहन रेड्डी शपथ लेने के दिन (30 मई) किए गए अपने एक वादे पर अमल करने जा रहे हैं. वे कल्याणकारी योजनाओं और सेवाओं को लोगों तक पहुंचाने के आखिरी पायदान में सुधार के लिए 15 अगस्त तक 2,66,000 ग्राम स्वयंसेवकों की भर्ती करने वाले थे.

आजादी की सालगिरह के दिन इस व्यवस्था का उद्घाटन करते हुए जगन ने नवनियुक्त स्वयंसेवकों से कहा, ''तमाम लोगों तक, और जिन्होंने हमें वोट नहीं दिया उन लोगों तक भी, बराबरी से सरकारी सेवाएं पहुंचनी चाहिए, इस हद तक कि उनकी राय बदल जाए. आपके जरिए मेरी आवाज और भरोसा राज्य के हरेक शख्स तक पहुंचना चाहिए.'' उन्होंने यह भी कहा, ''अपनी 3,648 किमी लंबी पदयात्रा के दौरान मैंने लोगों को परेशानियां देखीं.

तभी मैंने सरकारी योजनाओं को असरदार ढंग से पहुंचाने के लिए स्वयंसेवक और ग्राम सचिवालय व्यवस्था का ऐलान किया था.'' आंध्र के मुख्यमंत्री ने कहा कि वे पहले साल में स्वयंसेवकों की सेवा का इस्तेमाल चुनाव से पहले किए गए अपने पांच वादे पूरे करने के लिए करेंगे. स्वयंसेवक पहले लाभार्थियों का पता लगाएंगे, उनकी परेशानियों का आकलन करेंगे और फिर सिफारिश करेंगे कि सरकार की कौन-सी योजना उनके लिए सबसे अच्छी रहेगी. हरेक स्वयंसेवक 50 परिवारों की जिम्मेदारी संभालेगा और उसे हर महीने 5,000 रुपए मिलेंगे.

स्वयंसेवकों की भर्ती की यह योजना सरकारी कामकाज को बिल्कुल जमीन तक ले जाने के जगन के फैसले का हिस्सा है. लेकिन आलोचना हो रही है कि जगन अपने पार्टी समर्थकों को वॉलंटियर के तौर पर भर्ती कर रहे हैं. जगन को उम्मीद है कि ये स्वयंसेवक समय के साथ समुदाय के नेताओं के तौर पर विकसित होंगे. नजर रखने के लिए मुख्यमंत्री के दफ्तर के कॉल सेंटर से एक टोल फ्री टेलीफोन नंबर 1902 जोड़ दिया गया है. इस पर लोग शिकायतें दर्ज करवा सकते हैं.

2 अक्तूबर से हरेक ग्राम सचिवालयम में एक ग्राम सचिव भी नियुक्त कर दिया जाएगा. ग्राम सचिवालयम का मुख्य काम 72 घंटों के भीतर सरकारी योजनाओं के फायदे लोगों तक पहुंचाना होगा. हरेक ग्राम सचिवालयम में गांव के ही 10 लोगों को नौकरी दी जाएगी. उम्मीद है कि ग्राम स्वयंसवेक व्यवस्था और ग्राम सचिवालय मिलकर राजकाज के विकेंद्रीकरण की शानदार मिसाल बनेंगे और लोगों के साथ स्थायी जुड़ाव का काम करेंगे.

ग्राम सचिव के ओहदे के लिए बहुत लोग लालायित होंगे क्योंकि उन्हें 15,000 रुपए की मासिक तनख्वाह और  सरकारी नौकरी की सुरक्षा मिलेगी, उसके साथ सत्ता के रुतबे की तो बात ही छोड़ दें. इन पदों के लिए लाखों लोग दौड़ में हैं—औसतन 21 उम्मीदवार हर पद के लिए. दूसरे राज्यों के भी 4,909 लोग कतार में हैं. इस भर्ती पर नजर रख रहे एक अफसर कहते हैं, ''तनख्वाह और सुरक्षा मजबूत आकर्षण हैं. इसके लिए इंटरमीडिएट या प्लस 2 पास करने वाले योग्य उम्मीदवार हैं लेकिन बेरोजगारी का आलम यह है कि इंजीनियरिंग ग्रेजुएट भी बड़ी तादाद में परीक्षा में बैठ रहे हैं.''

ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा 1 सितंबर से चरणों में आयोजित की जाएगी. यह 2014 में आंध्र प्रदेश के पुनर्गठन के बाद सरकारी भर्ती का पहला बड़ा अभियान है. सरकार के सत्ता में आने के बाद तीन महीनों के भीतर 4,00,000 से ज्यादा नौकरियों का सृजन करके राज्य अपने किस्म का एक रिकॉर्ड कायम करेगा. सरकार 15 अक्तूबर को वाइएसआर रायतु भरोसा योजना (किसानों को मुफ्त बिजली और चार साल तक सालाना 12,500 रुपए महीना निवेश सहायता) और 26 जनवरी तक अम्मा वोडी योजना (गरीब मांओं को अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए 15,000 रुपए का सालाना अनुदान) भी लॉन्च करेगी. जगन ने वादा किया है कि उगाड़ी या तेलुगु नववर्ष के दिन ''राज्य में कोई भी गरीब परिवार बेघर नहीं होगा.''

लेकिन पदयात्रा के दौरान किए गए जगन के इन ऊंचे-ऊंचे वादों को पूरा करने के लिए क्या राज्य के पास पैसा है? राज्य का कर्ज, जो 2014-15 में 1.3 लाख करोड़ रुपए था, 2018-19 में बहुत ज्यादा बढ़कर 2.6 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया. इसके बाद भी सरकार ने इस जुलाई में 2.3 लाख करोड़ रुपए का कल्याणकारी बजट पेश किया. कोई भी अंदाज लगा सकता है कि पैसा कहां से आएगा.

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